
उत्तराखंड में सितंबर 2025 से शुरू हुई युवा आपदा मित्र योजना के तहत 1826 युवाओं को आपदा प्रबंधन का प्रशिक्षण दिया जा चुका है, जिनमें 874 बेटियां शामिल हैं। योजना का उद्देश्य आपदा के समय त्वरित राहत और बचाव के लिए प्रशिक्षित स्वयंसेवक तैयार करना है। प्रशिक्षण में जोखिम पहचान, प्राथमिक उपचार, खोज-बचाव और राहत शिविर प्रबंधन जैसे महत्वपूर्ण कौशल सिखाए जा रहे हैं।
- सितंबर 2025 से शुरू योजना में बेटियों की दमदार भागीदारी
- उत्तराखंड में आपदा से निपटने को तैयार हो रहे युवा
- एनसीसी और एनडीआरएफ कैंप में दिया जा रहा विशेष प्रशिक्षण
- खोज-बचाव से लेकर राहत शिविर प्रबंधन तक सिखाए जा रहे कौशल
देहरादून। आपदा संभावित राज्य उत्तराखंड में आपदा प्रबंधन को मजबूत बनाने की दिशा में युवाओं की सक्रिय भागीदारी बढ़ रही है। खास बात यह है कि इस पहल में बेटियां भी बेटों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर आगे बढ़ रही हैं। सितंबर 2025 से शुरू की गई युवा आपदा मित्र योजना के तहत अब तक 1826 युवाओं को प्रशिक्षित किया जा चुका है, जिनमें 874 बेटियां शामिल हैं। राज्य की भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए यहां भूस्खलन, अतिवृष्टि, बादल फटने और भूकंप जैसी प्राकृतिक आपदाओं का खतरा बना रहता है।
ऐसे में सरकार ने आपदा के समय त्वरित राहत और बचाव कार्यों के लिए स्थानीय स्तर पर प्रशिक्षित स्वयंसेवकों की टीम तैयार करने की योजना बनाई है। योजना के अंतर्गत एनसीसी, एनएसएस, स्काउट गाइड और ‘मेरा युवा भारत’ से जुड़े कुल 4310 युवाओं को प्रशिक्षण देने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। फिलहाल 1826 युवाओं को प्रशिक्षण दिया जा चुका है, जिनमें 952 युवक और 874 युवतियां शामिल हैं। यह आंकड़ा दर्शाता है कि आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में बेटियां भी तेजी से आगे आ रही हैं।
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प्रशिक्षण कार्यक्रम में युवाओं को आपदा की प्रकृति और जोखिम की पहचान, प्राथमिक उपचार, खोज एवं बचाव अभियान, राहत शिविर प्रबंधन, घायलों को सुरक्षित स्थान तक पहुंचाने और संकट के समय समन्वय स्थापित करने जैसे व्यावहारिक कौशल सिखाए जा रहे हैं। यह प्रशिक्षण शिविर एनसीसी कैंपों के साथ-साथ राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (एनडीआरएफ) और राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल के परिसरों में आयोजित किए जा रहे हैं। विशेषज्ञ प्रशिक्षकों की देखरेख में युवाओं को आपदा की वास्तविक परिस्थितियों का अनुभव कराने के लिए मॉक ड्रिल भी कराई जा रही हैं।
आपदा प्रबंधन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, इस योजना का उद्देश्य केवल प्रशिक्षण देना नहीं, बल्कि युवाओं में सामाजिक जिम्मेदारी और नेतृत्व क्षमता विकसित करना भी है। आपदा के समय स्थानीय स्तर पर प्रशिक्षित स्वयंसेवकों की मौजूदगी राहत कार्यों को तेज और प्रभावी बनाएगी। प्रदेश में आपदा से निपटने की तैयारियों को सुदृढ़ करने के लिए यह योजना मील का पत्थर साबित हो सकती है, खासकर तब जब बेटियां भी बड़ी संख्या में इसमें भागीदारी कर रही हैं और संकट की घड़ी में मददगार बनने के लिए आगे आ रही हैं।






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