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विकासनगर के कालसी क्षेत्र में दिव्यांग बुजुर्ग दंपती को सार्वजनिक नल से पानी लेने से रोके जाने और अभद्रता करने का गंभीर मामला सामने आया है, जिससे आहत होकर दंपती तहसील मुख्यालय पहुंचे। उप जिलाधिकारी ने मामले को गंभीर मानते हुए तत्काल जांच और कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
- सार्वजनिक नल से पानी भरने पर दिव्यांग दंपती को रोका, तहसील तक पहुंचा मामला
- गांव में दिव्यांगों से अभद्रता का आरोप, प्रशासन हरकत में
- तहसील कार्यालय की सीढ़ियों पर बैठकर बुजुर्ग दंपती ने सुनाई पीड़ा
- मानवता को शर्मसार करने वाला मामला, एसडीएम ने दिए जांच के निर्देश
देहरादून : उत्तराखंड के देहरादून जिले के विकासनगर क्षेत्र अंतर्गत कालसी तहसील से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने सामाजिक संवेदनशीलता और मानवीय मूल्यों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्राम आरा निवासी 75 वर्षीय दिव्यांग दल्लू दास और उनकी पत्नी सल्लो देवी ने आरोप लगाया है कि गांव के कुछ लोग उनके साथ लगातार अभद्रता कर रहे हैं और उन्हें गांव के सार्वजनिक नल से पीने का पानी तक नहीं लेने दिया जा रहा है। अपनी पीड़ा और अपमान से टूटे इस बुजुर्ग दंपती ने न्याय की आस में तहसील मुख्यालय पहुंचकर कार्यालय की सीढ़ियों पर बैठकर प्रशासन से गुहार लगाई।
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सोमवार को तहसील कार्यालय परिसर में यह दृश्य उस समय सामने आया, जब उप जिलाधिकारी प्रेमलाल की नजर कार्यालय की सीढ़ियों पर बैठे बुजुर्ग दंपती पर पड़ी। उप जिलाधिकारी ने स्वयं आगे बढ़कर उनकी समस्या जानी, जिस पर दंपती ने बताया कि गांव के कुछ ग्रामीण उन्हें लंबे समय से मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित कर रहे हैं। उनका आरोप है कि आए दिन उनके साथ गाली-गलौज, मारपीट और जान से मारने की धमकियां दी जाती हैं, जिससे वे भय और असुरक्षा के माहौल में जीने को मजबूर हैं।
दंपती ने यह भी बताया कि ग्रामीणों ने सार्वजनिक नल से पानी पीने और भरने पर पाबंदी लगा दी है, जिससे उनकी दैनिक जरूरतें पूरी करना भी मुश्किल हो गया है। एक दिव्यांग और बुजुर्ग दंपती के लिए पानी जैसी मूलभूत आवश्यकता से वंचित किया जाना न केवल अमानवीय है, बल्कि कानून और संविधान द्वारा प्रदत्त अधिकारों का भी खुला उल्लंघन है।
शिकायत को गंभीरता से लेते हुए उप जिलाधिकारी प्रेमलाल ने तत्काल नायब तहसीलदार राजेंद्र लाल को मौके पर भेजने के निर्देश दिए। प्रशासन की ओर से कहा गया है कि पूरे मामले की जांच कराई जाएगी और जांच के बाद दोषियों के विरुद्ध नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी। उप जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि किसी भी व्यक्ति को सार्वजनिक संसाधनों के उपयोग से रोकना कानूनन अपराध है और विशेषकर दिव्यांग नागरिकों के साथ इस तरह का व्यवहार किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
यह मामला ग्रामीण समाज में फैली असंवेदनशीलता और प्रशासनिक हस्तक्षेप की आवश्यकता को उजागर करता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते इस तरह के मामलों में सख्त कार्रवाई नहीं की गई, तो समाज के कमजोर और असहाय वर्गों के लिए जीवन और भी कठिन हो जाएगा। अब देखना यह है कि प्रशासन की जांच के बाद दोषियों पर क्या कार्रवाई होती है और क्या इस दिव्यांग दंपती को वास्तव में न्याय मिल पाता है।





