
मुख्य बातें
- मुख्यमंत्री धामी ने सहकारिता मेले का किया उद्घाटन
- कहा, सहकारिता भारत की संस्कृति और जीवन पद्धति का प्रतीक
- राज्य में 671 सहकारी समितियों का कंप्यूटरीकरण पूरा
- 5511 समितियों में से 3838 समितियों के अभिलेख ऑनलाइन
- 31 लाख लोग सहकारिता से जुड़े, लक्ष्य 50 लाख लोगों को जोड़ने का
- महिला समूहों ने किया 35 लाख का व्यापार
- श्रीनगर को 15 घंटे पानी आपूर्ति की स्वीकृति जल्द
श्रीनगर गढ़वाल | मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सोमवार को श्रीनगर स्थित आवास विकास मैदान में आयोजित नौ दिवसीय सहकारिता मेले में मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की। उन्होंने कहा —
“सहकारिता भारत की संस्कृति और जीवन पद्धति का प्रतीक है। यह मेला सहकारिता की भावना को और प्रगाढ़ करेगा। समाज को जोड़ने और आत्मनिर्भरता की दिशा में अग्रसर करने का यह सशक्त माध्यम है।”
मुख्यमंत्री ने कहा कि इस मेले से महिलाओं और स्वयं सहायता समूहों को अपने उत्पादों के प्रदर्शन और विपणन के लिए एक व्यापक मंच मिलेगा। उन्होंने लोगों से स्वदेशी उत्पादों को अपनाने की अपील की। मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य में सहकारिता क्षेत्र को मजबूत करने के लिए ठोस कदम उठाए जा रहे हैं। अब तक 671 सहकारी समितियों का कंप्यूटरीकरण पूरा हो चुका है। राज्य के 13 जिलों की 5511 समितियों में से 3838 समितियों के अभिलेख राष्ट्रीय सहकारी पोर्टल पर अपलोड कर ऑनलाइन प्रक्रिया में लाया गया है।
कृषि और पारदर्शिता पर भी बोले धामी
धामी ने बताया कि सरकार ने मंडुवा की खरीद दर में गत वर्ष की तुलना में 5.50 रुपये प्रति किलो की वृद्धि की है, अब किसानों को ₹48.86 प्रति किलो का न्यूनतम समर्थन मूल्य मिल रहा है। उन्होंने कहा कि नकल माफिया पर अंकुश लगाने के लिए देश का सबसे सख्त नकल विरोधी कानून लागू किया गया है, जिसके तहत 100 से अधिक नकल माफिया जेल भेजे जा चुके हैं।
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हाल ही में हरिद्वार नकल प्रकरण पर त्वरित संज्ञान लेकर सीबीआई जांच की संस्तुति की गई और परीक्षा को निरस्त करने का निर्णय भी लिया गया। कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री धामी ने महिला स्वयं सहायता समूहों को चार से पांच लाख रुपये के चेक प्रदान किए। उन्होंने गुच्छी मशरूम उत्पादन तकनीक के लिए नवीन पटवाल को सम्मानित किया और स्थानीय उत्पादों के प्रति लोगों को जागरूक करने की अपील की।
श्रीनगर में पेयजल और सीवर परियोजनाओं को मिलेगी स्वीकृति
कैबिनेट मंत्री डॉ. धन सिंह रावत की मांग पर मुख्यमंत्री ने कहा कि श्रीनगर में 15 घंटे पानी की आपूर्ति के लिए पुरानी पेयजल लाइनों को बदलने तथा पूरे नगर निगम क्षेत्र में सीवर लाइन बिछाने की डीपीआर को प्राप्त होते ही तत्काल स्वीकृति दी जाएगी। कैबिनेट मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने बताया कि इस समय राज्य में 31 लाख लोग सहकारिता से जुड़े हुए हैं, और सरकार का लक्ष्य इसे 50 लाख लोगों तक पहुंचाने का है। उन्होंने कहा —
“सहकारिता के माध्यम से प्रदेशभर के 16 लाख किसानों को बिना ब्याज के ऋण वितरित किया गया है। इस वर्ष श्रीनगर में आयोजित सहकारिता मेले में महिला समूहों ने लगभग 35 लाख का व्यापार किया है, जबकि मेले में कुल एक करोड़ रुपये का कारोबार हुआ है।”
उन्होंने बताया कि राज्य की कोऑपरेटिव सोसाइटी 30 करोड़ रुपये के लाभ में है। अब तक 1.80 लाख दीदियां ‘लखपति दीदी’ बन चुकी हैं और लक्ष्य है कि इस संख्या को चार लाख तक पहुंचाया जाए। कार्यक्रम स्थल पर मुख्यमंत्री के पहुंचने पर स्थानीय परंपरा के अनुसार ढोल-नगाड़ों और मार्शल स्कूल के बैंड के साथ स्वागत किया गया। सीएम ने विभिन्न विभागों और समूहों द्वारा लगाए गए स्थानीय उत्पादों के स्टॉलों का निरीक्षण किया। उन्होंने काश्तकारों और महिला समूहों से संवाद कर उनके उत्पादों को बाजार से जोड़ने के प्रयासों की सराहना की।
कार्यक्रम में विधायक पौड़ी राजकुमार पोरी, जिला पंचायत अध्यक्षा रचना बुटोला, मेयर आरती भंडारी, और भाजपा जिलाध्यक्ष कमल किशोर रावत सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे। श्रीनगर का यह नौ दिवसीय सहकारिता मेला न केवल स्थानीय उत्पादों और महिला समूहों के लिए अवसर का मंच बन रहा है, बल्कि उत्तराखंड में सहकारिता आंदोलन को एक नई ऊर्जा और दिशा भी प्रदान कर रहा है। मुख्यमंत्री धामी का संदेश स्पष्ट है — “सहकारिता ही आत्मनिर्भर भारत का सशक्त माध्यम है।”





