
कालाढूंगी। कालाढूंगी स्थित वन निगम डिपो से सागौन की लकड़ी की निकासी में हुए बड़े घपले ने पूरे वन विभाग को हिला दिया है। रविवार को मिली मुखबिर की सूचना के आधार पर विभाग ने एक ट्रक को रोका, जो तय रवन्ने से कहीं अधिक लकड़ी लादकर डिपो गेट से बाहर निकल रहा था। जब विभागीय टीम ने उस ट्रक की जांच की, तो करीब आठ लाख रुपये मूल्य की अतिरिक्त सागौन लकड़ी बरामद हुई। इस घटना ने वन निगम की कार्यप्रणाली, डिपो की सुरक्षा व्यवस्था और अधिकारियों की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
घटना की शुरुआत तब हुई जब वन विभाग को यह जानकारी मिली कि डिपो से निर्धारित मात्रा से कहीं अधिक सागौन बाहर ले जाया जा रहा है। सूचना की पुष्टि करने के लिए विभाग हरकत में आया और नयागांव बैरियर पर एक ट्रक को रोका गया। जांच के दौरान पाया गया कि ट्रक में रवन्ने से बहुत अधिक लकड़ी मौजूद है। संदेह गहराने पर ट्रक को कालाढूंगी रेंज परिसर ले जाकर लकड़ी की नाप–जोख की गई। जांच में स्पष्ट हुआ कि जहाँ रवन्ने में 17 घनमीटर लकड़ी दर्ज थी, वहीं ट्रक में 22 घनमीटर सागौन भरा हुआ था। यह अंतर न केवल गलत दस्तावेज़ीकरण की ओर इशारा करता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि लकड़ी लोडिंग और चेकिंग के कई स्तरों पर गड़बड़ी हुई है।
वन विभाग की टीम ने ट्रक में 38 अतिरिक्त गिल्टे बरामद किए, जिनकी कीमत लगभग आठ लाख रुपये बताई जा रही है। विभाग ने ट्रक को सीज कर लिया है और पूरे मामले की गहन जांच शुरू कर दी है। डीएफओ रामनगर ध्रुव सिंह मर्तोलिया ने कहा कि रवन्ने से अधिक लकड़ी ले जाने का प्रयास स्पष्ट रूप से चोरी का मामला है, और इस तरह की गतिविधियों में शामिल किसी भी व्यक्ति को नहीं छोड़ा जाएगा। उन्होंने सूचना देने वाले मुखबिर को पाँच हजार रुपये का इनाम भी घोषित किया है, जबकि उसकी पहचान गुप्त रखी जाएगी।
यह मामला इसलिए और गंभीर हो जाता है क्योंकि लकड़ी लोडिंग की प्रक्रिया में कई अधिकारी मौजूद रहते हैं—डिपो अधिकारी, स्केलर और ठेकेदार। इसके अलावा, डिपो गेट पर लकड़ी की अंतिम जाँच की जाती है। ऐसे में सवाल उठता है कि इतनी बड़ी मात्रा में अतिरिक्त लकड़ी आखिर कैसे लोड की गई? क्या यह निगरानी में चूक थी, या फिर यह किसी अंदरूनी मिलीभगत का हिस्सा था? यह भी संभव है कि यह घपला लंबे समय से चल रहा हो और रविवार को पकड़ी गई खेप केवल उसका एक हिस्सा हो।
वन निगम की प्रभागीय विक्रय प्रबंधक सावित्री गिरी ने स्पष्ट किया है कि मामले की नापजोख की जाएगी, और यदि रवन्ने से अधिक लकड़ी की पुष्टि होती है, तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि विभाग किसी भी तरह की हेराफेरी को बर्दाश्त नहीं करेगा। डिपो में पकड़ा गया यह घपला एक बड़ी लापरवाही—या संभवतः संगठित भ्रष्टाचार—की ओर संकेत करता है। यह घटना वन विभाग और वन निगम में पारदर्शिता, निगरानी और जवाबदेही को बेहतर करने की आवश्यकता को मजबूती से सामने लाती है।





