
देहरादून का संडे मार्केट आईएसबीटी क्षेत्र में स्थानांतरित होने के बाद भी अव्यवस्था और भारी भीड़ का केंद्र बना हुआ है। तीसरे रविवार को भी हालात ऐसे रहे कि पैदल चलने तक की जगह नहीं बची और दिनभर जाम लगा रहा।
- रेंजर्स ग्राउंड से शिफ्टिंग के बाद भी नहीं सुधरी संडे मार्केट की हालत
- भीड़ प्रबंधन फेल, पुलिस व्यवस्था भी जाम के आगे बेबस
- एचआईजी सोसाइटी की चेतावनी अनसुनी, बढ़ी स्थानीय लोगों की परेशानी
- संडे मार्केट ने रविवार को भी जाम में झोंका शहर
देहरादून। यातायात सुधार के उद्देश्य से रेंजर्स ग्राउंड से आईएसबीटी के समीप स्थानांतरित किया गया संडे मार्केट अब शहर के लिए गंभीर समस्या बनता जा रहा है। रविवार को बाजार के तीसरे आयोजन में ही हालात पूरी तरह बेकाबू नजर आए। खरीदारी के लिए उमड़ी भारी भीड़ ने न केवल यातायात व्यवस्था को ठप कर दिया, बल्कि पैदल चलना तक मुश्किल हो गया। आईएसबीटी क्षेत्र, जहां आमतौर पर रविवार को वाहनों का दबाव अपेक्षाकृत कम रहता है, संडे मार्केट के कारण दिनभर जाम से जूझता रहा।
हरिद्वार बाइपास से लेकर आसपास की सड़कों पर वाहनों की लंबी कतारें लगी रहीं। सड़कें इतनी खचाखच भरी रहीं कि वाहन रेंगते हुए चलते नजर आए और पैदल यात्रियों को भी रास्ता तलाशना पड़ा। भीड़ नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने ग्लिट्ज मॉल परिसर में पार्किंग की व्यवस्था कराई थी। इसके अलावा तय योजना के अनुसार क्षमता पूरी होने पर बिग बाजार मॉल में दोपहिया वाहनों की पार्किंग निर्धारित की गई थी।
अवैध पार्किंग पर 800 से 1200 रुपये तक जुर्माने और टोइंग की चेतावनी भी दी गई थी। इसके बावजूद भीड़ प्रबंधन पूरी तरह विफल साबित हुआ। स्थिति को और गंभीर बनाते हुए कई व्यापारियों ने सड़क किनारे ही अस्थायी दुकानें सजा लीं, जिससे सड़क की चौड़ाई और कम हो गई। मौके पर न तो किसी वरिष्ठ अधिकारी की सक्रिय मौजूदगी दिखी और न ही अव्यवस्था सुधारने के लिए कोई ठोस हस्तक्षेप किया गया। इसका खामियाजा स्थानीय निवासियों और राहगीरों को भुगतना पड़ा।
गौरतलब है कि जिला प्रशासन ने संडे मार्केट को एमडीडीए की एचआईजी सोसाइटी के सामने मेट्रो रेल कारपोरेशन को आवंटित भूखंड पर स्थानांतरित किया है। इस फैसले का एचआईजी सोसाइटी ने पहले ही विरोध किया था। सोसाइटी के अध्यक्ष एवं पूर्व विधायक देशराज कर्णवाल ने अधिकारियों को पत्र लिखकर संभावित अव्यवस्था और यातायात संकट की चेतावनी दी थी, लेकिन इसे नजरअंदाज कर दिया गया।
स्थानीय लोगों का कहना है कि संडे मार्केट से उन्हें न केवल जाम बल्कि शोर, गंदगी और सुरक्षा संबंधी समस्याओं का भी सामना करना पड़ रहा है। बाजार की लोकप्रियता को देखते हुए भविष्य में भीड़ और बढ़ने की आशंका है, लेकिन अभी तक स्थायी समाधान की दिशा में कोई ठोस कदम नजर नहीं आ रहे हैं। कुल मिलाकर, संडे मार्केट की शिफ्टिंग से यातायात सुधार का जो दावा किया गया था, वह जमीनी हकीकत में उल्टा साबित हो रहा है। यदि समय रहते भीड़ प्रबंधन, पार्किंग और बाजार की सीमा तय नहीं की गई, तो यह समस्या आने वाले दिनों में और विकराल रूप ले सकती है।





