
देहरादून में तेज रफ्तार और अनियंत्रित वाहनों की टक्कर से स्ट्रीट लाइट के पोल लगातार क्षतिग्रस्त हो रहे हैं, जिससे सड़कें अंधेरे में डूब रही हैं। इससे दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ने के साथ नगर निगम को भी लाखों रुपये का आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। स्थिति सुधारने के लिए निगम ने 4000 नए पोल और 5000 स्ट्रीट लाइटें लगाने की योजना बनाई है।
- तेज रफ्तार पर नहीं लगाम, हर महीने टूट रहे स्ट्रीट लाइट पोल
- सड़क पर रफ्तार, शहर पर अंधेरा: दून में बढ़ती परेशानी
- स्ट्रीट लाइट टूटने से बढ़ा दुर्घटनाओं का खतरा
- 4000 पोल और 5000 लाइटें लगाने की तैयारी में नगर निगम
देहरादून। राजधानी देहरादून की सड़कों पर तेज रफ्तार वाहनों का कहर अब शहर की स्ट्रीट लाइट व्यवस्था पर भी साफ दिखाई देने लगा है। आए दिन वाहन सड़क किनारे या डिवाइडर पर लगे स्ट्रीट लाइट के पोल से टकरा रहे हैं, जिससे न केवल रोशनी बाधित हो रही है बल्कि पूरे इलाके अंधेरे में डूब रहे हैं। इससे रात के समय दुर्घटनाओं की आशंका कई गुना बढ़ गई है। राजपुर रोड, सहस्रधारा रोड, जीएमएस रोड और हरिद्वार बाईपास जैसे व्यस्त मार्गों पर इस तरह की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं।
रात के समय तेज गति से दौड़ते वाहन जरा सी चूक में अनियंत्रित होकर स्ट्रीट लाइट के पोल से टकरा जाते हैं। टक्कर के बाद पोल टूट जाते हैं या झुक जाते हैं, जिससे उससे जुड़ी कई लाइटें एक साथ बंद हो जाती हैं। नगर निगम के स्ट्रीट लाइट प्रभारी रंजीत राणा ने बताया कि हाल ही में सहस्रधारा रोड स्थित मयूर विहार के पास एक तेज रफ्तार थार वाहन ने डिवाइडर पर लगे पोल को टक्कर मार दी, जिससे कई लाइटें बंद हो गईं। सूचना मिलने पर निगम की टीम मौके पर पहुंची तो वाहन सवार युवकों ने कर्मचारियों से अभद्रता भी की।
Government Advertisement...
बाद में पुलिस को बुलाकर नुकसान की भरपाई कराई गई। इसी प्रकार लालपुल से कारगी मार्ग पर उद्योग निदेशालय के पास एक ट्रक की टक्कर से कई स्ट्रीट लाइटें क्षतिग्रस्त हो गईं। ऐसे मामलों के कारण नगर निगम के बजट पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है। अधिकारियों के अनुसार हर महीने पोल, लाइट, स्विच और तारों की मरम्मत व बदलाव पर हजारों से लेकर लाखों रुपये तक खर्च करने पड़ रहे हैं। शहर की रोशनी व्यवस्था को मजबूत करने के लिए नगर निगम ने 4000 नए बिजली के पोल और 5000 नई स्ट्रीट लाइटें लगाने की योजना तैयार की है।
इसके लिए जल्द ही टेंडर प्रक्रिया शुरू की जाएगी। नई टेंडर नीति के कारण प्रक्रिया में देरी हुई, लेकिन इसी माह इसे पूरा करने की उम्मीद है। तेजी से कार्य पूरा करने के लिए पूरे शहर को चार जोन में बांटा गया है और चार माह के भीतर सभी कार्य पूरे करने की शर्त रखी गई है। खासतौर पर 32 नए वार्डों पर विशेष फोकस रहेगा, जहां बीते वर्षों में तेजी से नई कॉलोनियां विकसित हुई हैं और रोशनी की सबसे अधिक जरूरत है।
नगर निगम अधिकारियों का कहना है कि जब तक वाहन चालकों की तेज रफ्तार और लापरवाही पर लगाम नहीं लगेगी, तब तक स्ट्रीट लाइटों को नुकसान और शहर की अंधेरी सड़कों की समस्या पूरी तरह खत्म होना मुश्किल है।





