
दून बिजनेस पार्क और ट्रांसपोर्ट नगर के बीच पैदल पुल की मांग को लोक निर्माण विभाग ने बिना शासन को प्रस्ताव भेजे ही बंद कर दिया। दिल्ली–देहरादून हाईवे पर रोजाना सैकड़ों लोग जान जोखिम में डालकर सड़क पार कर रहे हैं, लेकिन प्रशासन ने इसे दीर्घकालिक बताकर शिकायत समाप्त कर दी।
- दिल्ली–देहरादून हाईवे पर जान जोखिम में डालकर सड़क पार करने को मजबूर लोग
- शिकायत बंद, लेकिन खतरा बरकरार: रोजाना सैकड़ों पैदल यात्री प्रभावित
- एनएचएआई के प्रस्ताव का हवाला देकर जनहित याचिका को किया गया समाप्त
- शासन को भेजे बिना ही बंद कर दी गई जीवनरक्षक पुल की मांग
(मनीष गुप्ता, देहरादून)
देहरादून। राजधानी देहरादून में जनहित से जुड़ा एक गंभीर मामला सामने आया है, जहां दून बिजनेस पार्क से ट्रांसपोर्ट नगर के बीच पैदल यात्रियों की सुरक्षा के लिए मांगे गए फुट ओवरब्रिज (पैदल सेतु) की शिकायत को बिना शासन को भेजे ही बंद कर दिया गया। यह निर्णय ऐसे समय लिया गया है, जब इस मार्ग पर रोजाना बड़ी संख्या में लोग दिल्ली–देहरादून राष्ट्रीय राजमार्ग पार करने को मजबूर हैं और हर दिन उनकी जान खतरे में रहती है।
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प्राप्त जानकारी के अनुसार यह शिकायत मुख्यमंत्री हेल्पलाइन पर दर्ज कराई गई थी, जिसमें ट्रांसपोर्ट नगर चौक क्षेत्र में बिजनेस पार्क के लिए एक सुरक्षित पैदल सेतु बनाए जाने की मांग की गई थी। शिकायतकर्ता ने स्पष्ट रूप से बताया था कि यह इलाका अत्यंत व्यस्त है और यहां तेज रफ्तार वाहनों के कारण पैदल सड़क पार करना जानलेवा साबित हो सकता है।
लोक निर्माण विभाग (राष्ट्रीय राजमार्ग) खंड, देहरादून की ओर से जारी जवाब में कहा गया कि संबंधित मार्ग पर एनएचएआई द्वारा आशारोड़ी से रिस्पना पुल तक एलिवेटेड रोड का निर्माण प्रस्तावित है। साथ ही यह भी उल्लेख किया गया कि पैदल सेतु निर्माण के लिए अलग से प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजा जाना होगा और स्वीकृति मिलने के बाद ही कार्य संभव होगा। इसके बावजूद विभाग ने यह कहते हुए शिकायत बंद करने की संस्तुति कर दी कि मामला मांग से संबंधित और दीर्घकालिक प्रकृति का है।
सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जब विभाग स्वयं स्वीकार कर रहा है कि पैदल सेतु निर्माण के लिए शासन की स्वीकृति आवश्यक है, तो फिर बिना प्रस्ताव भेजे ही शिकायत को बंद कैसे किया जा सकता है। जनहित से जुड़े इस मुद्दे को न तो आगे बढ़ाया गया और न ही शासन स्तर पर विचार के लिए भेजा गया, जिससे प्रशासन की संवेदनशीलता पर सवाल खड़े हो गए हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि दून बिजनेस पार्क, ट्रांसपोर्ट नगर और आसपास के क्षेत्रों से रोजाना कर्मचारी, मजदूर, छात्र और आम नागरिक इस सड़क को पार करते हैं। भारी वाहनों और तेज रफ्तार ट्रैफिक के बीच सड़क पार करना किसी जोखिम से कम नहीं है। अब तक कई हादसे हो चुके हैं और भविष्य में भी किसी बड़ी दुर्घटना से इनकार नहीं किया जा सकता।
नागरिकों और सामाजिक संगठनों का आरोप है कि प्रशासनिक लापरवाही के चलते एक जीवनरक्षक सुविधा को नजरअंदाज कर दिया गया है। उनका कहना है कि यदि समय रहते पैदल सेतु या सुरक्षित क्रॉसिंग की व्यवस्था नहीं की गई, तो यह लापरवाही किसी बड़े हादसे की जिम्मेदार बन सकती है।
यह मामला केवल एक शिकायत बंद होने का नहीं, बल्कि शहरी नियोजन, सड़क सुरक्षा और जनहित की प्राथमिकताओं का है। अब देखना यह होगा कि जनदबाव के बाद प्रशासन इस फैसले पर पुनर्विचार करता है या फिर दून की सड़कों पर पैदल यात्रियों की जान इसी तरह खतरे में बनी रहती है।





