
नगर निगम कर्मचारी महासंघ चुनाव आज सुबह 9 से दोपहर 3 बजे तक पार्षद कक्ष में होगा, 163 कर्मचारी वोट देंगे। अध्यक्ष पद पर सतेंद्र कुमार व राजेश पांडेय, सचिव पर योगेश कुमार आनंद व अनिल कुमार के बीच कांटे की टक्कर। 2016 के बाद पहला चुनाव, मतगणना तुरंत शाम तक परिणाम घोषित, चुनाव प्रभारी उपायुक्त संतोष पांडेय।
- सुबह 9 से दोपहर 3 तक मतदान
- 163 कर्मचारियों पर नजरें
- सतेंद्र बनाम राजेश अध्यक्ष पद पर
- योगेश आनंद व अनिल सचिव के दावेदार
देहरादून। देहरादून नगर निगम कर्मचारी महासंघ में लंबे समय से चला आ रहा इंतजार आज समाप्त हो जाएगा, जब नौ साल बाद संगठन का चुनाव आयोजित होगा। 2016 में अंतिम बार हुए इस चुनाव में इस बार 163 पंजीकृत कर्मचारियों की निगाहें परिणाम पर टिकी हैं। मतदान प्रक्रिया सुबह नौ बजे शुरू होकर दोपहर तीन बजे तक चलेगी, उसके ठीक बाद पार्षद कक्ष में ही मतगणना आरंभ हो जाएगी और शाम तक नया नेतृत्व स्पष्ट हो जाएगा। नगर निगम प्रशासन ने सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं, जिसमें चुनाव प्रभारी उप नगर आयुक्त संतोष कुमार पांडेय ने पारदर्शिता सुनिश्चित करने का भरोसा दिलाया है।
यह चुनाव कर्मचारियों के हितों, वेतन भत्तों और सेवा शर्तों को मजबूत करने के लिए निर्णायक साबित होगा। चुनाव का सबसे रोचक मोड़ अध्यक्ष पद पर है, जहां सतेंद्र कुमार और राजेश पांडेय के बीच सीधी टक्कर देखने को मिलेगी। वहीं सचिव पद के दावेदार योगेश कुमार आनंद और अनिल कुमार भी जोर-शोर से प्रचार कर रहे हैं। पिछले कई दिनों से नगर निगम परिसर में मतदाताओं को लुभाने का दौर चला, जिसमें विभिन्न मुद्दों पर बहस और वादे प्रमुख रहे।
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उम्मीदवारों ने कर्मचारियों की लंबित मांगों जैसे प्रमोशन, पेंशन और कार्यस्थल सुविधाओं पर फोकस किया, जिससे चुनावी माहौल गर्म रहा। महासंघ का नया नेतृत्व निगम प्रशासन से बेहतर समन्वय स्थापित करने और यूनियन की एकजुटता मजबूत करने का दावा कर रहा है। यह चुनाव न केवल संगठनात्मक स्तर पर महत्वपूर्ण है, बल्कि देहरादून नगर निगम के कर्मचारियों के भविष्य को आकार देगा। पिछले कार्यकाल में कई चुनौतियां रही, जिन्हें नया नेतृत्व संबोधित करने का वचन दे रहा है।
मतदाताओं की सक्रिय भागीदारी से स्वस्थ लोकतंत्र की मिसाल कायम होगी, और परिणाम आने के बाद नई समिति गठन से यूनियन की गतिविधियां तेज होंगी। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसी संस्थागत चुनाव पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाते हैं, जो अंततः शहर की सेवा व्यवस्था को मजबूत करेंगे।





