
डाक विभाग की लापरवाही के कारण कोटा से जोधपुर भेजी गई रजिस्टर्ड डाक बिना कारण लौटाई गई, जिससे प्रेषक को आर्थिक और प्राप्तकर्ता को मानसिक नुकसान हुआ। यह घटना डाक सेवा की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करती है।
- रजिस्टर्ड डाक लौटाने से जनता को हुआ नुकसान
- डाक सेवा की कार्यकुशलता पर उठे सवाल
- समय पर डाक नहीं पहुँचना बना समस्या
- डाक विभाग की मनमानी से मानसिक तनाव
जोधपुर। डाक सेवा एक अति आवश्यक सेवा है, जिस पर जनता-जनार्दन का पूरा भरोसा है, लेकिन डाक विभाग की कार्यकुशलता ने जनता को परेशानी में डाल दिया है। कोटा से डॉ. कृष्णा कुमारी ने सुनील कुमार माथुर, 33 वर्धमान नगर, शोभावतों की ढाणी, खेमे का कुआँ, पाल रोड, जोधपुर, राजस्थान को रजिस्टर्ड डाक से पुस्तकें भेजी, लेकिन डाक विभाग ने सुनील कुमार माथुर को उनके पते पर डाक न पहुँचाकर वापस रिटर्न कर दी।
जब डॉ. कृष्णा कुमारी ने माथुर से व्हाट्सएप नंबर पर संपर्क किया, तो हकीकत का पता चला। बिना वजह डॉ. कृष्णा कुमारी को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा, वहीं माथुर को पुस्तकें न मिलने से मानसिक तनाव झेलना पड़ा। डाक को निर्धारित समय पर व निर्धारित पते पर पहुँचाना डाक विभाग का दायित्व है, फिर भी मनमाने तरीके से डाक लौटाना न्यायसंगत नहीं है।








