
राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय मालदेवता रायपुर में अंतर संकाय सांस्कृतिक प्रतियोगिता की शुरुआत उत्साहपूर्ण माहौल में हुई, जिसमें प्रश्नोत्तरी, भाषण, कविता और पोस्टर प्रतियोगिताएं आयोजित की गईं। कार्यक्रम में छात्रों ने विभिन्न विषयों पर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया और निर्णायकों ने उनकी प्रस्तुतियों की सराहना की। यह आयोजन छात्रों में रचनात्मकता और स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देने का सशक्त मंच बना।
- देहरादून में छात्रों की रचनात्मकता का उत्सव, प्रतियोगिता शुरू
- प्रश्नोत्तरी से पोस्टर तक, मालदेवता कॉलेज में प्रतिभा का प्रदर्शन
- युवा प्रतिभाओं को मिला मंच, सांस्कृतिक आयोजन का आगाज
- भाषण और कविता से गूंजा महाविद्यालय, छात्रों ने दिखाया हुनर
देहरादून। देहरादून स्थित राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय मालदेवता रायपुर में 7 अप्रैल 2026 को अंतर संकाय सांस्कृतिक प्रतियोगिता का शुभारंभ बड़े उत्साह और उमंग के साथ किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्राचार्य प्रो. विनोद प्रकाश अग्रवाल ने की, जबकि विभिन्न महाविद्यालयों से आए अतिथियों और निर्णायक मंडल की उपस्थिति ने आयोजन को गरिमामय बना दिया। कार्यक्रम का शुभारंभ पारंपरिक तरीके से मां सरस्वती की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन और पुष्पांजलि अर्पित कर किया गया। इसके पश्चात सांस्कृतिक कार्यक्रम की संयोजक डॉ. अनीता चौहान ने अतिथियों का स्वागत करते हुए कार्यक्रम को आगे बढ़ाया।
प्रश्नोत्तरी से हुआ शानदार आगाज
प्रतियोगिता की शुरुआत प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता से हुई, जिसका संचालन प्रो. महेंद्र सिंह पंवार एवं उनकी टीम ने किया। यह प्रतियोगिता उत्तराखंड सामान्य ज्ञान पर आधारित थी, जिसमें कला, विज्ञान, वाणिज्य और गृहविज्ञान संकाय के छात्रों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। छात्रों का उत्साह और प्रतिस्पर्धा देखने लायक रही।
भाषण प्रतियोगिता में दिखा चिंतन
इसके बाद भाषण प्रतियोगिता आयोजित की गई, जिसका विषय “आज का युवा: जागरूक या प्रभावित” रखा गया। प्रतिभागियों ने समसामयिक मुद्दों पर गहन विचार प्रस्तुत किए, जिससे उनकी वैचारिक क्षमता और अभिव्यक्ति कौशल का परिचय मिला।
कविता और पोस्टर में झलकी रचनात्मकता
स्वरचित कविता पाठ प्रतियोगिता में प्रतिभागियों ने देवभूमि की प्राकृतिक सुंदरता, पहाड़ की बेटियों की भूमिका और पलायन जैसी समस्याओं को भावनात्मक और प्रभावी तरीके से प्रस्तुत किया। इसके पश्चात पोस्टर प्रतियोगिता का आयोजन किया गया, जिसका विषय “नशे को ना कहो, जिंदगी को हां कहो” था। प्रतिभागियों की रचनात्मक अभिव्यक्ति ने सभी को प्रभावित किया।
निर्णायकों और अतिथियों ने की सराहना
निर्णायक मंडल के संयोजक प्रो. डी. एस. मेहरा ने प्रतिभागियों की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार के आयोजन छात्रों की छिपी प्रतिभा को निखारने का सशक्त माध्यम हैं। इस अवसर पर श्री देव सुमन विश्वविद्यालय से आए प्रो. गुलशन कुमार ढींगरा सहित अन्य शिक्षाविदों ने भी कार्यक्रम की प्रशंसा करते हुए इसे प्रेरणादायक बताया।
आयोजन में टीम का योगदान
कार्यक्रम के सफल आयोजन में महाविद्यालय की सांस्कृतिक परिषद और शिक्षकों की महत्वपूर्ण भूमिका रही। विभिन्न प्रतियोगिताओं का संचालन अलग-अलग टीमों द्वारा किया गया, जिसमें शिक्षकों और विद्यार्थियों का समन्वय स्पष्ट रूप से दिखाई दिया। अंत में प्राचार्य प्रो. विनोद प्रकाश अग्रवाल ने सभी अतिथियों, निर्णायकों, प्राध्यापकों और छात्र-छात्राओं का आभार व्यक्त करते हुए आगामी प्रतियोगिताओं के लिए शुभकामनाएं दीं।
कार्यक्रम संयोजक डॉ. अनीता चौहान ने भी सभी प्रतिभागियों और सहयोगियों को धन्यवाद ज्ञापित किया। यह आयोजन न केवल छात्रों की प्रतिभा को मंच प्रदान करने वाला साबित हुआ, बल्कि महाविद्यालय में रचनात्मकता और स्वस्थ प्रतिस्पर्धा के माहौल को भी सुदृढ़ करने में सफल रहा।





