
सर्द और शुष्क हवाओं के चलते ऊधम सिंह नगर जिले में अस्थमा रोगियों की परेशानी लगातार बढ़ रही है और अस्पतालों में सांस संबंधी शिकायतें लेकर मरीज पहुंच रहे हैं। चिकित्सकों का कहना है कि लगातार खांसी, सांस फूलना और सीने में जकड़न को नजरअंदाज करना खतरनाक हो सकता है।
- सर्दियों में शुष्क हवा और प्रदूषण से अस्थमा के मरीजों पर बढ़ता खतरा
- ठंड के मौसम में बढ़ रहे सांस संबंधी रोग, अस्पतालों में मरीजों की संख्या बढ़ी
- डॉक्टरों की चेतावनी—सांस फूलने को न समझें सामान्य समस्या
- अस्थमा मरीजों के लिए सर्दी का मौसम क्यों बन जाता है चुनौती
ऊधम सिंह नगर। सर्दियों के आगमन के साथ ही अस्थमा से पीड़ित लोगों की मुश्किलें बढ़ने लगी हैं। काशीपुर सहित जिले के विभिन्न क्षेत्रों में ठंडी और शुष्क हवाओं के कारण सांस संबंधी बीमारियों के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। चिकित्सकों के अनुसार, सर्द मौसम में अस्थमा रोगियों को विशेष सतर्कता बरतने की आवश्यकता होती है, क्योंकि यह समय उनके लिए सबसे अधिक चुनौतीपूर्ण साबित होता है। चिकित्सा विशेषज्ञों का कहना है कि ठंडी हवा में सांस लेने से श्वसन नलियां संकुचित हो जाती हैं, जिससे सांस लेने में परेशानी बढ़ जाती है।
इसके साथ ही सर्दियों में लोग अधिक समय तक बंद कमरों में रहते हैं और हीटर का उपयोग करते हैं, जिससे हवा और अधिक शुष्क हो जाती है। यह स्थिति अस्थमा के मरीजों के लिए जोखिमपूर्ण हो सकती है। एलडी भट्ट उप जिला चिकित्सालय के डॉ. अमरजीत साहनी और सरकारी अस्पताल के पूर्व डॉट्स प्रभारी डॉ. राजीव गुप्ता के अनुसार, अस्थमा एक दीर्घकालिक रोग है, जो पूरी तरह ठीक नहीं होता, बल्कि सावधानी और नियमित उपचार से नियंत्रित किया जाता है। उन्होंने बताया कि शुष्क और सर्द हवा श्वास नलियों में संक्रमण और सूजन को बढ़ा देती है।
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यदि वातावरण में प्रदूषण के तत्व भी मौजूद हों तो अस्थमा का खतरा और अधिक बढ़ जाता है। डॉक्टरों के मुताबिक, वर्तमान में प्रतिदिन 10 से 12 मरीज सांस फूलने, लगातार खांसी और सीने में जकड़न की शिकायत लेकर अस्पताल पहुंच रहे हैं। पिछले कुछ वर्षों में वायु प्रदूषण बढ़ने के साथ-साथ अस्थमा रोगियों की संख्या में भी इजाफा देखा गया है। चिकित्सकों ने स्पष्ट किया कि सर्दियों में सांस फूलने को सामान्य सर्दी-खांसी समझकर नजरअंदाज करना गंभीर परिणाम दे सकता है। डॉ. राजीव गुप्ता ने बताया कि अस्थमा के लक्षण हर मरीज में अलग-अलग हो सकते हैं। किसी को बार-बार खांसी आती है, तो किसी को सांस लेने में परेशानी होती है।
ऐसे में समय पर चिकित्सकीय सलाह लेना बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि अस्थमा से पीड़ित लोगों को धूल, धुएं और प्रदूषण से यथासंभव दूर रहना चाहिए। चिकित्सकों ने यह भी सलाह दी कि अस्थमा मरीज अपने बिस्तर और तकियों को साफ रखें, घर का बना पौष्टिक और गरम भोजन करें तथा ऐसे खाद्य पदार्थों से परहेज करें जिनसे बलगम बढ़ता हो। बाहर निकलते समय इनहेलर हमेशा साथ रखें और ठंडी हवा से बचाव के लिए मुंह व नाक को ढककर रखें।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि जागरूकता और सावधानी से अस्थमा के दौरे को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है। सर्दियों में थोड़ी सी लापरवाही भी अस्थमा रोगियों के लिए गंभीर स्वास्थ्य संकट का कारण बन सकती है, इसलिए सतर्कता ही सबसे बड़ा बचाव है।





