
देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि देश की राजनीति अब पुराने ढर्रे पर नहीं चलती, जनता स्पष्ट रूप से काम और नतीजों के आधार पर नेताओं को परख रही है। उन्होंने कहा कि “अब काम का कल्चर है, जो काम करेगा, जनता उसी को आगे बढ़ाएगी। बिहार चुनाव इसका बड़ा प्रमाण है।” धामी शनिवार को डालनवाला स्थित दून इंटरनेशनल स्कूल में आयोजित लिटरेचर फेस्टिवल में बोल रहे थे, जहां उन्होंने राजनीति, साहित्य, समाज और नेतृत्व की बदलती भूमिका पर अपने विचार साझा किए।
सीएम ने कहा कि राजनीति समाज का महत्वपूर्ण हिस्सा है और इसमें अच्छी सोच वाले लोगों का आना जरूरी है। उन्होंने विशेष रूप से कहा कि राज्य की बेटियों को हर क्षेत्र में नेतृत्व करना चाहिए—सिर्फ राजनीति में ही नहीं, बल्कि शिक्षा, संस्कृति, विज्ञान और व्यवसाय जैसे क्षेत्रों में भी। फेस्टिवल की शुरुआत ‘वूमेन इन पावर–लीडिंग द चार्ज’ सत्र से हुई, जहां मुख्यमंत्री ने वेनू अग्रहरी की पुस्तक लीडिंग लेडीज ऑफ इंडिया का विमोचन भी किया।
धामी ने कहा कि उत्तराखंड की पहचान उसकी संस्कृति और साहित्य से है। उन्होंने कहा कि सामाजिक और सांस्कृतिक उत्थान में साहित्य हमेशा से केंद्र में रहा है, और युवाओं को इन क्षेत्रों को समझना चाहिए। उन्होंने राज्य में स्वच्छ राजनीतिक वातावरण और सरल, संवेदनशील नेतृत्व की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि प्रतिनिधित्व उसी व्यक्ति को मिलना चाहिए जिसकी सोच जनता जैसी हो और आचरण में सहजता हो।
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देहरादून को ‘सिटी ऑफ स्कूल्स’ कहे जाने पर मुख्यमंत्री ने कहा कि शहर को शिक्षा हब के रूप में विकसित करने के लिए सरकार लगातार प्रयास कर रही है और आने वाले समय में देहरादून को शिक्षा क्षेत्र में और भी मजबूत पहचान दी जाएगी। कार्यक्रम का संचालन भाजपा महिला मोर्चा की दिल्ली महासचिव प्रियल भारद्वाज द्वारा किया गया।
मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि राष्ट्र निर्माण में युवाओं की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है। जेन-जी को राजनीति, नीतियों और सार्वजनिक जीवन में रुचि लेना चाहिए, क्योंकि देश का भविष्य उनकी समझ और भागीदारी पर निर्भर करता है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की मातृशक्ति राज्य की असली ताकत है—उनके बनाए उत्पाद आज वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बना रहे हैं। महिलाओं की यही उन्नति समाज और राज्य के समग्र विकास की नींव है।





