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तारों के संग रहकर, तुम एकता का पाठ पढ़ाते हो। तारों के संग रहकर तुम संयुक्त परिवार का महत्व बताते हो। चंदा मामा तुम कितने प्यारे हो। अंधेरे में अपनी राह कैसे खोजें, यह तुम हमें बतलाते हो।
सुनील कुमार माथुर
33 वर्धमान नगर, शोभावतों की ढाणी,
खेमे का कुआँ, पाल रोड, जोधपुर, राजस्थान
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चंदा मामा तुम कितने प्यारे हो,
तारों के संग रहकर रात्रि में
तुम राहगीरों को
सही मार्ग दिखाते हो।
उनके आवागमन को तुम
सरल और सहज बनाते हो।
चंदा मामा तुम कितने प्यारे हो।
तारों के संग रहकर
तुम एकता का पाठ पढ़ाते हो।
तारों के संग रहकर तुम
संयुक्त परिवार का महत्व बताते हो।
चंदा मामा तुम कितने प्यारे हो।
अंधेरे में अपनी राह कैसे खोजें,
यह तुम हमें बतलाते हो।
युवा शक्ति को तुम हर रोज
नई दशा और दिशा दिखाते हो।
चंदा मामा तुम कितने प्यारे हो।
तारों के संग रहकर तुम
सदा एकता का पाठ पढ़ाते हो।









