कविता : श्रद्धांजलि… राष्ट्र के प्रति देश प्रेम, लाल तुम धरती के, तुम हो गर्व मेरे माथ...
साहित्य लहर
कविता : इंकलाब जिंदाबाद… स्वतंत्रता सबके गले का हार हो, देश की हर नारी गंगा की धार...
कविता जीवन का आदिम संगीत है… कबीर को सामाजिक चेतना का कवि कहा जाता है। हिंदी में...
गीत : गरीबी… भविष्य के भरोसे रात गुजर जाती है, जिंदगी एक बार फिर से मुकर जाती...
कविता : जिंदगी एक रंगमंच… कब क्या हो जाए जीवन में यह कोई नहीं कह सकता रब की...
कविता : चढ़ावा… वो जो बेटे को ऊंची अफ़सर की कुर्सी पर बैठने के जागते हुए सपने देखता...
कविता : स्त्री को मैं नमन करता हूँ… स्त्री माता होती है, स्त्री बहन होती है, स्त्री जगत...
कविता : मैंने देखा है… बच्चे खेलते नंगे धूल में संघर्ष ही देखते थे फूल में खेल खेल...
कविता : डगरिया… कवि रसखान की एक सवैया गोकुल आएंगे जब सांवरिया ब्रज में बजे कोई बंसुरिया कोयल सबको...
पुस्तक समीक्षा : सबरस समाहित अद्वितीय कृति है ‘निहारिका’… इस पुस्तक में आम आदमी की छटपटाहट की...














