
सिलीगुड़ी स्थित बीएसएफ सहायक प्रशिक्षण केंद्र बैकुंठपुर में 489 महिला नव आरक्षकों ने देश सेवा की शपथ ली। 44 सप्ताह के कठोर प्रशिक्षण के बाद ये महिला प्रहरी सीमा सुरक्षा बल की जिम्मेदारियों को निभाने के लिए तैयार हुईं।
- बैकुंठपुर में महिला रिक्रूट्स की भव्य पासिंग आउट परेड
- 44 सप्ताह के कठोर प्रशिक्षण के बाद देश सेवा को तैयार
- उत्कृष्ट प्रदर्शन पर 15 महिला आरक्षकों को सम्मान
- बीएसएफ की गौरवशाली परंपरा आगे बढ़ाएंगी महिला प्रहरी
सिलीगुड़ी। सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के सहायक प्रशिक्षण केंद्र, बैकुंठपुर में सोमवार को आयोजित शपथ ग्रहण एवं पासिंग आउट परेड समारोह में 489 महिला नव आरक्षकों ने राष्ट्र सेवा की शपथ लेकर बल की मुख्यधारा में कदम रखा। इस अवसर पर पूरे परिसर में देशभक्ति और अनुशासन का अद्भुत वातावरण देखने को मिला।
एसटीसी बीएसएफ बैकुंठपुर में आयोजित इस भव्य समारोह में आईजी करणी सिंह शेखावत ने नव आरक्षकों को देश सेवा की शपथ दिलाई। देश के विभिन्न राज्यों से चयनित इन महिला कांस्टेबल ट्रेनीज ने 44 सप्ताह के कठोर एवं अनुशासित प्रशिक्षण को सफलतापूर्वक पूर्ण कर यह उपलब्धि हासिल की।
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महिला रिक्रूट्स की पासिंग आउट परेड की कमान रिक्रूट महिला कांस्टेबल अंजलि कृष्णा टी ने संभाली। परेड के दौरान प्रशिक्षणार्थियों ने सटीक कदमताल, अनुशासन और आत्मविश्वास का उत्कृष्ट प्रदर्शन कर उपस्थित अतिथियों से सराहना बटोरी। मुख्य अतिथि आईजी शेखावत ने परेड की सलामी ली और नव आरक्षकों को प्रेरणादायी संबोधन दिया।
प्रशिक्षण के विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली 15 महिला नव आरक्षकों को प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। अपने संबोधन में आईजी शेखावत ने सीमा सुरक्षा बल की गौरवशाली परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि बीएसएफ ने पाकिस्तान और बांग्लादेश से लगी सीमाओं की सुरक्षा के साथ-साथ पंजाब और कश्मीर में अलगाववाद तथा देश के विभिन्न हिस्सों में नक्सलवाद के खिलाफ प्रभावी भूमिका निभाई है।
उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर सहित कई अभियानों में बीएसएफ के जवानों और महिला सैनिकों ने अदम्य साहस और पराक्रम का परिचय देते हुए देश की सुरक्षा सुनिश्चित की है। उन्होंने विश्वास जताया कि नव नियुक्त महिला प्रहरी भी इसी शौर्य, साहस और कर्तव्यनिष्ठा की परंपरा को आगे बढ़ाते हुए बल और देश का नाम रोशन करेंगी।
समारोह के अंत में नव आरक्षकों के परिवारजनों और अधिकारियों ने महिला सैनिकों के उज्ज्वल भविष्य की कामना की। यह समारोह न केवल महिला सशक्तिकरण का प्रतीक बना, बल्कि राष्ट्र की सुरक्षा में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी को भी दर्शाता नजर आया।








