
कवियित्री: डॉ. मधु मिश्रा
प्रकाशन: द लिटिल बुटीक हब, कोलकाता – 700077
पृष्ठ: 52 (कवर पृष्ठ अतिरिक्त)
मूल्य: 249 रुपए
संपर्क सूत्र: रवि पार्क टाउनशिप, बेदी बंदर रोड, एस्सार स्कूल के पास, जामनगर, गुजरात
मोबाइल नंबर: 8200347633
समीक्षक: सुनील कुमार माथुर, जोधपुर
कवियित्री डॉ. मधु मिश्रा द्वारा लिखित काव्य संग्रह मधु सृजन की सभी कविताएँ ज्ञानवर्धक, प्रेरणादायक और चिंतन-मनन योग्य हैं। उन्होंने इस छोटी-सी पुस्तक में गागर में सागर भरने का प्रयास किया है, जो सराहनीय और वंदनीय है। उनकी हर कविता एक कटु सत्य है, जिसे डॉ. मधु मिश्रा ने अपनी लेखनी के माध्यम से जन-जन तक पहुँचाने का प्रयास किया है।
52 पृष्ठीय इस काव्य संग्रह में कविताएँ हैं: सरस्वती वंदना, आपकी अपनी पुस्तक, मां, वाह रे मानव, मेरे पापा, भूख और गरीबी, बाबू जी का प्रेम, मोबाइल की साख, अखबार की कहानी, प्रकृति की व्यथा आदि। इस संग्रह में कुल 29 कविताएँ शामिल हैं। लघु कविताएँ होने के कारण पाठक इसे एक ही बार में पढ़ने को लालायित रहते हैं। कविताओं की सरल भाषा शैली और दमदार भाव इन्हें तुरंत पढ़ने पर विवश करती है।
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कविताएँ मन के भावों की अभिव्यक्ति होती हैं। डॉ. मधु मिश्रा ने अपने काव्य संग्रह में विविध विषयों पर आधारित कविताओं को शामिल किया है, जिससे उनका श्रम सार्थक सिद्ध हुआ है। उनकी कविताएँ और अन्य रचनाएँ पत्र-पत्रिकाओं में समय-समय पर प्रकाशित होती रहती हैं। लेखन और साहित्य सृजन के अतिरिक्त डॉ. मिश्रा मंचों पर कार्यक्रमों का संचालन भी बखूबी करती हैं और अनेक पुरस्कारों से सम्मानित हो चुकी हैं।
उनका मानना है कि जब मन के भाव किसी के समक्ष प्रस्तुत करने में असमर्थ होते हैं, तब कलम स्वतः ही चल पड़ती है और कुछ पंक्तियाँ पाठकों के हृदय पर अमिट छाप छोड़ देती हैं। यह पुस्तक साहित्य प्रेमियों के साथ-साथ आम जन के लिए भी उपयोगी सिद्ध होगी। पुस्तक की छपाई, गेटअप और मेकअप उत्कृष्ट हैं, और कागज़ की गुणवत्ता भी उत्तम है।
सुनील कुमार माथुर
सदस्य, अणुव्रत लेखक मंच (स्वतंत्र लेखक एवं पत्रकार) 33, वर्धमान नगर, शोभावतों की ढाणी, खेमे का कुंआ, पालरोड, जोधपुर, राजस्थान









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