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बोधगया की पावन धरती पर आचार्यकुल का अंतर्राष्ट्रीय महाधिवेशन ज्ञान, अध्यात्म और मानवतावादी शिक्षा के नए आयाम स्थापित करने जा रहा है। यह आयोजन गांधी–विनोबा दर्शन के आलोक में स्वस्थ समाज, मूल्यपरक शिक्षा और जिम्मेदार पत्रकारिता का वैश्विक विमर्श प्रस्तुत करेगा।
- बोधगया में गांधी–विनोबा दर्शन का वैश्विक पुनर्जागरण
- आचार्यकुल का तीन दिवसीय महायज्ञ और स्वस्थ समाज का संकल्प
- शिक्षा, पत्रकारिता और संस्कृति पर अंतर्राष्ट्रीय मंथन
- विनोबा भावे की परंपरा में ज्ञान और मानवता का संगम
सत्येन्द्र कुमार पाठक
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बोधगया की पावन धरती, जहाँ ढाई हजार वर्ष पूर्व ज्ञान का आलोक प्रस्फुटित हुआ था, वहीं अब भारत के महान दार्शनिक आचार्य विनोबा भावे द्वारा स्थापित आचार्यकुल अपने अंतर्राष्ट्रीय महाधिवेशन के माध्यम से ज्ञान, अध्यात्म और मानवतावादी शिक्षा के नए अध्याय लिखने जा रहा है। आगामी 16, 17 और 18 दिसंबर 2025 तक बोधि ट्री स्कूल, श्रीपुर में आयोजित यह तीन दिवसीय आयोजन एक वैचारिक यज्ञ के रूप में वैश्विक समन्वय और स्वस्थ समाज निर्माण के संकल्प को समर्पित होगा। आचार्यकुल के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं प्रख्यात शिक्षाविद् आचार्य डॉ. धर्मेंद्र ने इस महाधिवेशन की विस्तृत रूपरेखा जारी करते हुए इसे वर्तमान चुनौतियों के बीच गांधी और विनोबा के दर्शन का पुनर्जागरण बताया है। 150 से अधिक राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय प्रतिनिधियों की सहभागिता इस आयोजन की महत्ता को सिद्ध करती है, जो बिहार और आचार्यकुल के आध्यात्मिक-शैक्षणिक मूल्यों को वैश्विक मंच प्रदान करेगी।
आचार्यकुल के राष्ट्रीय प्रवक्ता सत्येन्द्र कुमार पाठक ने कहा कि यह सम्मेलन केवल एक अकादमिक आयोजन नहीं, बल्कि भूदान यज्ञ और सर्वोदय की उस महान परंपरा का समागम है, जिसने भारत के सामाजिक ताने-बाने को नई दिशा दी। उन्होंने कहा कि बोधगया में हो रहा यह समागम अमृत मंथन के समान है, जहाँ शिक्षा, साहित्य, कला, संस्कृति और पत्रकारिता के पुरोधा एक मंच पर आकर मानवता के उत्थान पर विचार करेंगे। देश-विदेश के प्रतिनिधि भारत की ज्ञान परंपरा और अध्यात्म को विश्व पटल पर पुनर्स्थापित करने का संकल्प लेंगे।
इस महाधिवेशन में देश के अनेक प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों के वर्तमान और पूर्व कुलपतियों की उपस्थिति विशेष आकर्षण का केंद्र होगी। ये शिक्षाविद् उच्च शिक्षा के नैतिक दायित्वों, मूल्यपरक शिक्षा और चारित्रिक निर्माण की आवश्यकता पर विमर्श करेंगे। सम्मेलन में प्रमुख रूप से बिहार विधान परिषद के सभापति श्री अवधेश नारायण सिंह, मगध विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. एस.पी. शाही, डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय रांची के पूर्व कुलपति डॉ. तपन कुमार शांडिल्य, वाई.बी.एन. विश्वविद्यालय रांची के कुलाधिपति डॉ. रामजी यादव, साईनाथ विश्वविद्यालय रांची के कुलपति डॉ. एस.पी. अग्रवाल, अर्का जैन विश्वविद्यालय जमशेदपुर के प्रतिकुलपति डॉ. आनंद तिवारी और विनोबा भावे विश्वविद्यालय हजारीबाग के डॉ. चंद्रभूषण शर्मा की सहभागिता प्रस्तावित है। ये सभी विद्वान सरस्वती विद्या मंदिर, धनबाद के संस्थापक प्राचार्य डॉ. वासुदेव प्रसाद के साथ मिलकर शिक्षा में मूल्यों के समावेश पर बल देंगे।
महाधिवेशन के तीनों दिन गहन वैचारिक मंथन को समर्पित होंगे। 16 दिसंबर को उद्घाटन दिवस पर प्रातः पंजीयन के उपरांत अंतरंग विमर्श आयोजित होगा। 11 बजे उद्घाटन सत्र में भावी कार्यक्रमों की आधारशिला रखी जाएगी। सायंकाल काव्य संध्या और सांस्कृतिक कार्यक्रम के माध्यम से भारतीय कला और साहित्य की समृद्ध परंपरा का सजीव प्रदर्शन होगा। 17 दिसंबर को तकनीकी सत्रों में स्वस्थ समाज रचना एवं पत्रकारिता तथा स्वस्थ समाज और साहित्यकार जैसे विषयों पर गंभीर विमर्श होगा। इसी दिन आचार्यकुल की स्थापना के 60 वर्षों की यात्रा का सिंहावलोकन और आगामी दीर्घकालिक योजनाओं पर मंथन किया जाएगा।
समापन दिवस पर विशेष सत्र ‘अभिमत’ के माध्यम से सभी प्रतिनिधियों के विचारों और निष्कर्षों को संकलित किया जाएगा। इसके बाद समापन सत्र में समग्र प्रतिवेदन प्रस्तुत कर भविष्य के राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलनों की रूपरेखा को अंतिम रूप दिया जाएगा। पत्रकारिता प्रकोष्ठ के प्रभारी कुमुद रंजन सिंह ने बताया कि 17 दिसंबर का विशेष सत्र पत्रकारिता को उसके सामाजिक धर्म की याद दिलाएगा और मीडिया, साहित्यकारों तथा कलाकारों की सामूहिक भूमिका पर चर्चा करेगा। कला संस्कृति प्रकोष्ठ की राष्ट्रीय प्रभारी डॉ. उषाकिरण श्रीवास्तव के समन्वय में इस अवसर पर सभी गणमान्य प्रतिनिधियों, आचार्यों और मीडिया कर्मियों को उनके आजीवन योगदान के लिए ‘कर्मवीर सम्मान’ से अलंकृत किया जाएगा। आचार्यकुल का यह तीन दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय महाधिवेशन निश्चय ही केवल एक सम्मेलन नहीं, बल्कि मानवीय मूल्यों की पुनर्स्थापना और भारत को विश्वगुरु के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक सुदृढ़ वैचारिक प्रयास है।
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सत्येन्द्र कुमार पाठक
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