
उत्तराखंड भाजपा संगठन में बड़े बदलाव के संकेत मिल रहे हैं। पार्टी चुनाव के दौरान विवादित चेहरों को फ्रंट से दूर रखकर साफ छवि और लोकप्रिय नेताओं को आगे लाना चाहती है। लगातार तीसरी जीत के लक्ष्य के साथ संगठन युवाओं और नए नेतृत्व पर फोकस कर रहा है।
- चुनावी रणनीति में बदलाव, साफ छवि वाले नेताओं पर भाजपा का जोर
- उत्तराखंड भाजपा में संगठनात्मक फेरबदल की तैयारी तेज
- युवाओं को मिलेगा मौका, दूसरी पांत के नेता होंगे फ्रंट पर
- लगातार तीसरी जीत की तैयारी में भाजपा, संगठन को कर रही मजबूत
- राष्ट्रीय नेतृत्व के निर्देश पर राज्य संगठन में बदलाव की आहट
देहरादून। प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर बड़े बदलाव की आहट सुनाई देने लगी है। भारतीय जनता पार्टी के संगठनात्मक ढांचे में जल्द ही व्यापक फेरबदल हो सकता है। राष्ट्रीय स्तर पर नए कार्यकारी अध्यक्ष की नियुक्ति के बाद अब इसका असर राज्यों पर भी दिखने लगा है। उत्तराखंड भाजपा संगठन में भी परिवर्तन के संकेत तेज हो गए हैं, जिसे आगामी चुनावों की रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है। सूत्रों के अनुसार, भाजपा संगठन इस बार चुनावी मैदान में साफ-सुथरी छवि और लोकप्रिय चेहरों को आगे लाने की रणनीति पर काम कर रहा है।
पार्टी नेतृत्व का स्पष्ट संदेश है कि जिन नेताओं को लेकर आम जनता में नकारात्मक धारणा बनी है या जो हाल के वर्षों में विवादों में रहे हैं, उन्हें चुनाव के दौरान फ्रंटलाइन से दूर रखा जाए। नौ वर्षों से उत्तराखंड की सत्ता पर काबिज भाजपा अब लगातार तीसरी बार सरकार बनाने की तैयारी में जुट गई है। इसके लिए संगठनात्मक मजबूती को प्राथमिकता दी जा रही है। पार्टी ने हाल ही में अपने सभी सात मोर्चों के अध्यक्षों की नियुक्ति के साथ उनकी कार्यकारिणी भी घोषित कर दी है। संगठन का उद्देश्य है कि चुनाव के समय किसी भी मोर्चे पर कमजोरी न दिखे।
Government Advertisement...
पार्टी के भीतर ऐसे नेताओं की पहचान की जा रही है, जिनका नाम किसी न किसी विवाद से जुड़ा रहा है। राष्ट्रीय नेतृत्व नहीं चाहता कि चुनावी माहौल में ऐसे चेहरों की वजह से पार्टी की छवि को नुकसान पहुंचे। इसी कारण संगठनात्मक स्तर पर बदलाव की कवायद तेज कर दी गई है। बताया जा रहा है कि इस फेरबदल में युवाओं को विशेष प्राथमिकता दी जाएगी। जिस तरह राष्ट्रीय स्तर पर युवाओं को नेतृत्व में आगे बढ़ाया गया है, उसी तर्ज पर राज्य संगठन में भी युवा और ऊर्जावान नेताओं को जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है।
इससे न केवल पार्टी को नई ऊर्जा मिलेगी, बल्कि युवा और नव मतदाताओं को साधने में भी मदद मिलेगी। हाल के समय में भाजपा संगठन द्वारा किए गए कई बदलाव इस बात की पुष्टि करते हैं कि पार्टी भविष्य की राजनीति को ध्यान में रखकर नेतृत्व तैयार कर रही है। दूसरी पांत के नेताओं को आगे लाकर संगठन जहां एक ओर अनुभव और ऊर्जा का संतुलन बनाएगा, वहीं दूसरी ओर भविष्य के लिए एक मजबूत नेतृत्व पंक्ति भी तैयार करेगा।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह रणनीति भाजपा को आगामी चुनावों में बढ़त दिलाने में अहम भूमिका निभा सकती है। साफ छवि, युवाओं की भागीदारी और मजबूत संगठन—यही भाजपा की आगामी चुनावी रणनीति की पहचान बनती दिख रही है।





