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UPCL ने स्पष्ट किया कि बिजली दरों में 16% वृद्धि की खबरें भ्रामक हैं और यह वास्तविक टैरिफ़ वृद्धि नहीं, बल्कि पुराने वर्षों के True-up समायोजन का तकनीकी अंतर है। निगम ने कहा कि नई टैरिफ़ वृद्धि के रूप में केवल 2.64% प्रस्तावित है, जिसका अंतिम निर्णय UERC ही करेगा।
- UPCL ने दी सफाई: बिजली दरों पर मीडिया रिपोर्टें भ्रामक
- 16% नहीं बढ़ रहीं बिजली दरें, True-up प्रक्रिया का तकनीकी अंतर
- नई टैरिफ़ वृद्धि केवल 2.64% प्रस्तावित, अंतिम फैसला आयोग का
- उपभोक्ता हित सर्वोपरि: UPCL ने बताया कैसे तय होती हैं बिजली दरें
उत्तराखंड पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (UPCL) ने बिजली दरों में भारी वृद्धि से संबंधित कुछ समाचारों को भ्रामक बताते हुए साफ कर दिया है कि हाल ही में मीडिया में प्रकाशित “लगभग 16% बिजली दर बढ़ोतरी” का दावा वास्तविक नहीं है। निगम का कहना है कि यह आकड़ा किसी नई वृद्धि का हिस्सा नहीं, बल्कि पिछले वित्त वर्षों के True-up समायोजन से जुड़ा एक तकनीकी वित्तीय अंतर है, जिसे दर बढ़ोतरी के रूप में प्रचारित करना उचित नहीं है। UPCL ने उपभोक्ताओं और जनप्रतिनिधियों के सामने पूरे मामले को विस्तार से रखा ताकि अनावश्यक भ्रम दूर हो सके।
निगम के अनुसार, बिजली दरें न तो UPCL स्वयं बढ़ाता है और न ही मूल्य निर्धारण उसके अधिकार क्षेत्र में है। राज्य में विद्युत दरों का अंतिम निर्णय उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग (UERC) ही विस्तृत वित्तीय विश्लेषण, उपभोक्ता हितों की समीक्षा और जनसुनवाई के बाद करता है। UPCL की भूमिका केवल आवश्यक तकनीकी डेटा और ARR संबंधी सूचनाएँ आयोग को उपलब्ध कराने तक सीमित है।
मीडिया में जिस 16% वृद्धि का उल्लेख किया गया है, वह दरों का नियमित वार्षिक प्रस्ताव नहीं है। वर्ष 2024–25 के लिए आयोग ने जो अनुमानित ARR स्वीकृत किया था, वास्तविक ARR उससे अधिक निकला। इस अंतर को पूरा करने के लिए लगभग 13.59% True-up समायोजन की जरूरत उत्पन्न हुई है। UPCL के अनुसार, यदि निगम को अपने वैधानिक दावे समय पर प्राप्त हो जाते, तो यह अंतर उत्पन्न ही नहीं होता और किसी बड़े प्रतिशत की वृद्धि का भ्रम पैदा नहीं होता।
इसके विपरीत, UPCL ने वर्ष 2026–27 के लिए जो वास्तविक टैरिफ़ वृद्धि प्रस्तावित की है, वह मात्र 2.64% है। यह प्रस्ताव उपभोक्ता हितों को ध्यान में रखते हुए बनाया गया है और इसे 10 दिसंबर 2025 तक आयोग के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा। इसके बाद आयोग—
- उपभोक्ता संगठनों, हितधारकों और आम लोगों से आपत्तियाँ व सुझाव मांगेगा,
- प्रदेशभर में जनसुनवाई आयोजित करेगा,
- तकनीकी व वित्तीय तथ्यों का परीक्षण करेगा,
- और अंततः उपभोक्ता हितों को सर्वोपरि रखते हुए अंतिम टैरिफ़ आदेश जारी करेगा।
UPCL ने यह भी याद दिलाया कि आयोग ने हमेशा उपभोक्ता हितों को प्राथमिकता दी है। उदाहरण के लिए—
- 2025–26 में UPCL ने 12.01% वृद्धि का प्रस्ताव दिया था, जबकि आयोग ने केवल 5.62% मंजूर की।
- 2024–25 में 27.06% वृद्धि प्रस्तावित थी, पर आयोग ने सिर्फ 7.66% स्वीकृत की।
यह दर्शाता है कि अंतिम निर्णय हमेशा नियामकीय संतुलन और उपभोक्ता सुरक्षा को ध्यान में रखकर ही होता है। इसके साथ ही UPCL ने प्रदेश में बिजली आपूर्ति को सुदृढ़ और आधुनिक बनाने के लिए चल रहे व्यापक कार्यों का भी उल्लेख किया—उपकेंद्रों का विस्तार, ट्रांसफॉर्मर क्षमता वृद्धि, पुरानी लाइनों का उन्नयन, भूमिगत केबलिंग, स्मार्ट मीटरिंग, फॉल्ट प्रबंधन व्यवस्था और डिजिटल बिलिंग जैसी पहलें प्रदेश में आपूर्ति की विश्वसनीयता को लगातार मजबूत कर रही हैं। इन सुधारों के परिणामस्वरूप लाइन लॉस में कमी और सेवा गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया गया है।
UPCL ने स्पष्ट संदेश दिया है कि निगम का उद्देश्य किसी भी प्रकार से उपभोक्ताओं पर बोझ डालना नहीं है। राज्य के उद्योगों, किसानों, व्यापारियों और घरेलू उपभोक्ताओं को किफायती, विश्वसनीय और गुणवत्तापूर्ण बिजली उपलब्ध कराना ही UPCL की सर्वोच्च प्राथमिकता है। टैरिफ़ से जुड़ा अंतिम निर्णय केवल आयोग द्वारा सार्वजनिक प्रक्रिया और उपभोक्ता सहभागिता के बाद ही लिया जाएगा। निगम ने उपभोक्ताओं से अपील की है कि वे भ्रामक खबरों से भ्रमित न हों और किसी भी आधिकारिक जानकारी के लिए UPCL तथा UERC की अधिसूचनाओं पर ही भरोसा करें।





