
भारत बौद्धिक राष्ट्रीय परीक्षा 2026 का आयोजन राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय मालदेवता रायपुर में किया गया। भारतीय ज्ञान परंपरा पर आधारित इस परीक्षा में 128 छात्र-छात्राओं ने प्रतिभाग किया। परीक्षा शांतिपूर्ण और निष्पक्ष ढंग से संपन्न हुई।
- अखिल भारतीय विद्या भारती उच्च शिक्षा संस्थान ने किया आयोजन
- आधुनिक समस्याओं के समाधान पर केंद्रित रही बौद्धिक परीक्षा
- परीक्षा संचालन के लिए गठित की गई समिति और मूल्यांकन दल
- नोडल व पर्यवेक्षक छात्रों की सहभागिता से रहे संतुष्ट
देहरादून। भारतीय ज्ञान परंपरा पर आधारित आधुनिक समस्याओं के समाधान के उद्देश्य से आयोजित भारत बौद्धिक राष्ट्रीय परीक्षा 2026 का सफल आयोजन राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय मालदेवता, रायपुर में किया गया। इस राष्ट्रव्यापी बौद्धिक परीक्षा में महाविद्यालय के 128 छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक प्रतिभाग किया। यह परीक्षा अखिल भारतीय विद्या भारती उच्च शिक्षा संस्थान द्वारा आयोजित की गई, जिसका उद्देश्य युवाओं को भारतीय ज्ञान परंपरा से जोड़ते हुए बौद्धिक चिंतन और राष्ट्रबोध को प्रोत्साहित करना है।
परीक्षा के लिए महाविद्यालय में कुल 247 छात्र-छात्राओं ने पंजीकरण कराया था, जिनमें से 128 विद्यार्थियों ने परीक्षा में सहभागिता की। परीक्षा की निष्पक्षता और सुचिता बनाए रखने के लिए चाक-चौबंद व्यवस्थाएं की गई थीं। परीक्षा नोडल अधिकारी डॉ. अनीता चौहान, केंद्राध्यक्ष एवं महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. जी.सी. डंगवाल तथा विद्या भारती की ओर से नियुक्त पर्यवेक्षक शिशुपाल सिंह रावत के नेतृत्व में परीक्षा का सफल संचालन किया गया। परीक्षा प्रबंधन को सुदृढ़ बनाने के लिए परीक्षा समिति और मूल्यांकन समितियों का गठन किया गया था।
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परीक्षा समिति में प्रो. एम.एस. पवार, डॉ. नरेश चौहान, डॉ. डिंपल भट्ट, डॉ. एम.पी. तिवारी, डॉ. सुमन गुसाईं, डॉ. लीना रावत, जयंत चौहान एवं गुंजन रावत का महत्वपूर्ण योगदान रहा। परीक्षा सुबह 10 बजे से दोपहर 12 बजे तक आयोजित की गई। परीक्षा में कुल 80 बहुविकल्पीय प्रश्नों के साथ एक दीर्घ उत्तरीय प्रश्न शामिल था, जिसमें छात्रों को भारतीय ज्ञान परंपरा और समकालीन चुनौतियों से जुड़े विषयों पर अपने विचार प्रस्तुत करने थे। परीक्षा शांतिपूर्ण वातावरण में संपन्न हुई और छात्रों की सक्रिय भागीदारी से नोडल अधिकारी एवं पर्यवेक्षक संतुष्ट नजर आए।
इस संबंध में जानकारी महाविद्यालय की मीडिया समिति के सदस्य डॉ. सुमन सिंह गुसाईं द्वारा दी गई। उन्होंने बताया कि इस प्रकार की परीक्षाएं विद्यार्थियों में बौद्धिक चेतना, सांस्कृतिक बोध और राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारी की भावना को मजबूत करने में सहायक सिद्ध होती हैं।






