
सुनील कुमार माथुर
सदस्य, अणुव्रत लेखक मंच (स्वतंत्र लेखक व पत्रकार), जोधपुर, राजस्थान
खूबसूरत पौधा प्रेम और स्नेह का होता है, जो जमीन पर नहीं बल्कि लोगों के दिलों में उगा करता है। यही वजह है कि जहां ऐसा पौधा होता है, वहां अपनापन होता है। इसलिए जब भी किसी से बातचीत करें, प्रेमपूर्वक करें। बातचीत सही और स्पष्ट होनी चाहिए; उसमें किसी भी प्रकार के स्वार्थ की बू नहीं आनी चाहिए। प्रायः देखा गया है कि लोग दूसरों को खुश करने के लिए गलत और नियम-विरुद्ध कार्य भी कर लेते हैं। इतना ही नहीं, जब उन्हें सत्य से अवगत कराया जाता है, तब वे ऐसी सफाई देते हैं मानो उन्होंने जो किया वही सही है और बाकी सब गलत हैं। जहां ऐसा होता है, वहां ऐसे खूबसूरत पौधे सूखकर कुमला जाते हैं।
कहते हैं कि जिस समय व्यक्ति प्रार्थना करता है, उस समय उसका मंदिर में होना आवश्यक नहीं है; लेकिन जब वह प्रार्थना कर रहा हो, तब उसके मन में ईश्वर का होना आवश्यक है। मगर इंसान बात-बात पर झूठ बोलकर अपनी ही प्रतिष्ठा को धूमिल कर रहा है, जो उचित नहीं है। आदर्श जीवन जीने के लिए हमें कभी भी झूठ का सहारा नहीं लेना चाहिए। अपनी प्रतिष्ठा को बनाए रखने के लिए सदैव सत्य का ही सहारा लें। अपना जीवन अनमोल है। इसे खुली किताब न बनाएं, क्योंकि आज के युग में लोगों को पढ़ने में मजा नहीं आता; अपितु किताबों के पन्ने फाड़ने में आनंद आता है। इसलिए किसी को भी बिना मांगे अपनी राय न दें और न ही आसानी से विश्वास करें, क्योंकि जीवन में सर्वाधिक धोखा वही लोग देते हैं जिन्हें हम अपना समझते हैं।
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उसी व्यक्ति का साथ कीजिए जो आपकी पीड़ा को समझता है और दुःख की घड़ी में साथ देता है। वरना इस दुनिया में हीरा परखने वाले अनेक लोग मिल जाएंगे, परंतु पीड़ा परखने वाले बहुत कम होते हैं। इसलिए सोच-समझकर ही लोगों पर विश्वास कीजिए और अपने मन की बात साझा करें। आज का इंसान तनावपूर्ण जीवन जी रहा है। यहां तक कि स्कूली बच्चों में भी अनेक प्रकार का तनाव देखने को मिल रहा है, जिसके कारण वे आत्महत्या तक कर रहे हैं, जो किसी भी समस्या का समाधान नहीं है।
तनावमुक्त जीवन जीने के लिए रचनात्मक कार्य करें। श्रेष्ठ साहित्य का सृजन करें और श्रेष्ठ साहित्यकारों की संगत करें। कथा, भजन-कीर्तन सुनें; मधुर आवाज में अपनी पसंद का गीत सुनें, गुनगुनाते रहें। इससे मनोरंजन के साथ-साथ चेहरे पर मुस्कराहट आएगी, मन प्रसन्न होगा। एकाकीपन, चिंता, चिड़चिड़ापन, क्रोध, भय और अकेलापन दूर होगा तथा आपकी जीवनशैली बदल जाएगी। तनावमुक्त जीवन जीने का यह एक सरल और आसान उपाय है। बस आवश्यकता है इसे जीवन में आत्मसात करने की। हंसते रहो, हंसाते रहो—यही जीवन का मूल मंत्र है।







