
आगरा में साइबर ठगों ने एक व्यक्ति के फ्रीज बैंक खाते से ही 5 लाख रुपये ट्रांसफर कर दिए, जिससे बैंकिंग सिस्टम पर सवाल उठ गए हैं। पीड़ित ने पहले ही ठगी की आशंका पर खाता फ्रीज कराया था, लेकिन प्रक्रिया के दौरान ही धोखाधड़ी हो गई। मामले में साइबर थाने में शिकायत दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है।
- साइबर ठगों ने RTGS से उड़ाई रकम
- बैंक की सलाह पर बदला नंबर, फिर भी हुआ फ्रॉड
- पीड़ित ने साइबर थाने में दर्ज कराई शिकायत
- फर्जी कॉल से शुरू हुआ 5 लाख की ठगी का मामला
आगरा: उत्तर प्रदेश के आगरा में साइबर अपराध का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां ठगों ने एक व्यक्ति के फ्रीज किए गए बैंक खाते से ही पांच लाख रुपये उड़ा लिए। इस घटना ने बैंकिंग प्रणाली की सुरक्षा और कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मामला पंजाब नेशनल बैंक की फतेहाबाद रोड शाखा से जुड़ा है। ताजगंज निवासी उमेश दत्त गुप्ता के अनुसार, उन्हें पिछले कुछ दिनों से बैंक के नाम पर फर्जी कॉल्स आ रही थीं, जिनमें उनके खाते से पैसे निकालने की कोशिश की जा रही थी।
स्थिति को भांपते हुए उन्होंने 4 जनवरी को बैंक के ग्राहक सेवा नंबर पर संपर्क कर अपना खाता फ्रीज करा दिया था। इसके बाद 13 जनवरी को वह बैंक शाखा पहुंचे और शाखा प्रबंधक को पूरी जानकारी दी। बैंक अधिकारियों की सलाह पर उन्होंने मोबाइल नंबर अपडेट कराने और डेबिट फ्रीज हटाने के लिए आवेदन किया। उन्हें आश्वस्त किया गया कि खाते की राशि सुरक्षित रहेगी और आवश्यक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही बदलाव लागू होंगे।
हालांकि, अगले ही दिन 14 जनवरी को शाम करीब 5:11 बजे उनके खाते से आरटीजीएस के माध्यम से पांच लाख रुपये दूसरे खातों में ट्रांसफर कर दिए गए। यह घटना उस समय हुई, जब उनका मोबाइल नंबर अपडेट भी नहीं हुआ था और खाता पहले से फ्रीज था। घटना की जानकारी मिलते ही पीड़ित ने तुरंत साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज कराई और बैंक सेवाओं को पूरी तरह ब्लॉक कराया। इसके बाद उन्होंने साइबर क्राइम थाने में भी प्राथमिकी दर्ज कराई।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, मामले की जांच शुरू कर दी गई है और लेन-देन से जुड़े खातों का पता लगाया जा रहा है। साथ ही बैंक कर्मचारियों से भी पूछताछ की जाएगी, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि सुरक्षा में चूक कहां हुई। इस घटना ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि जब खाता पहले से फ्रीज था, तो इतनी बड़ी रकम का ट्रांसफर कैसे संभव हुआ। फिलहाल जांच के बाद ही पूरे मामले की सच्चाई सामने आ पाएगी, लेकिन यह घटना आम लोगों के लिए एक बड़ी चेतावनी भी है कि साइबर ठगी के मामलों में सतर्कता के साथ-साथ बैंकिंग प्रक्रियाओं की निगरानी भी बेहद जरूरी है।







