
बांग्लादेश के आम चुनाव में बीएनपी गठबंधन ने बहुमत हासिल करते हुए सत्ता में वापसी की, जबकि बांग्लादेश जातीय पार्टी (BJP) को एक सीट पर जीत मिली। पार्टी प्रमुख अंदलीव रहमान पार्थो ने भोला-1 सीट से करीब 30 हजार वोटों से जीत दर्ज की। भारत की भारतीय जनता पार्टी से नाम मिलते-जुलते होने के कारण सोशल मीडिया पर भ्रम की स्थिति भी बनी रही।
- भारत की बीजेपी नहीं, बांग्लादेश जातीय पार्टी ने दर्ज की जीत
- भोला-1 से 30 हजार वोटों से जीते अंदलीव रहमान पार्थो
- बीएनपी की प्रचंड जीत, दो दशक बाद सत्ता में वापसी
- सोशल मीडिया पर BJP नाम को लेकर फैला भ्रम
नई दिल्ली/बांग्लादेश। बांग्लादेश के हालिया आम चुनाव में एक दिलचस्प राजनीतिक स्थिति सामने आई, जब ‘बीजेपी’ नाम के चलते सोशल मीडिया पर भ्रम फैल गया। हालांकि स्पष्ट करना जरूरी है कि यहां जीत दर्ज करने वाली पार्टी भारत की भारतीय जनता पार्टी नहीं, बल्कि बांग्लादेश की बांग्लादेश जातীয় पार्टी (Bangladesh Jatiya Party) है, जिसका संक्षिप्त नाम भी BJP है। चुनाव में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 209 सीटें जीतकर दो दशकों बाद सत्ता में वापसी की है।
पार्टी प्रमुख तारिक रहमान के देश के अगले प्रधानमंत्री बनने की संभावना जताई जा रही है। सहयोगी दलों के साथ मिलकर गठबंधन की कुल सीटें 212 तक पहुंच गई हैं। इस चुनाव में बांग्लादेश जातीय पार्टी को एक सीट पर सफलता मिली। पार्टी प्रमुख और वरिष्ठ वकील अंदलीव रहमान पार्थो ने बारिसल मंडल की भोला-1 (सदर) सीट से लगभग 30 हजार वोटों के अंतर से जीत दर्ज की। आधिकारिक परिणामों के अनुसार पार्थो को 1,05,543 वोट मिले, जबकि जमात-ए-इस्लामी के उम्मीदवार नजरुल इस्लाम को 75,337 वोट प्राप्त हुए।
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यह पार्थो की इस सीट से दूसरी जीत है। वे 2008 में पहली बार सांसद बने थे और उस समय देश के सबसे युवा विपक्षी नेता के रूप में चर्चा में आए थे। 20 अप्रैल 1974 को जन्मे पार्थो ढाका के धानमंडी क्षेत्र में पले-बढ़े और कानून की पढ़ाई के लिए लंदन गए। उनके पिता नाज़िउर रहमान मंज़ूर 1971 के मुक्ति संग्राम के स्वतंत्रता सेनानी रहे और बाद में मंत्री तथा ढाका के मेयर भी बने। उन्होंने 2001 में बांग्लादेश जातीय पार्टी की स्थापना की थी। 2008 में पिता के निधन के बाद पार्थो ने पार्टी की कमान संभाली।
चुनाव प्रचार के दौरान पार्थो ने अपने निर्वाचन क्षेत्र को ‘तिलोत्तमा’ यानी एक आधुनिक और विकसित शहर बनाने का वादा किया। उन्होंने भोला-बरिशाल पुल निर्माण, मेडिकल कॉलेज की स्थापना और घर-घर गैस कनेक्शन उपलब्ध कराने जैसी योजनाओं को प्रमुखता से उठाया। सोशल मीडिया पर BJP नाम को लेकर भ्रम की स्थिति बनी रही, जहां कई लोगों ने इसे भारत की सत्तारूढ़ पार्टी से जोड़ दिया। हालांकि राजनीतिक रूप से दोनों पार्टियां अलग हैं और उनका संगठनात्मक या वैचारिक संबंध नहीं है।
कुल मिलाकर, बांग्लादेश की राजनीति में यह चुनाव सत्ता परिवर्तन और नए राजनीतिक समीकरणों का संकेत देता है, जिसमें बीएनपी गठबंधन की वापसी के साथ छोटे सहयोगी दलों की भूमिका भी अहम बनी हुई है।







