
बोर्ड परीक्षाओं के दबाव में विद्यार्थी देर रात तक पढ़ाई कर अपने स्वास्थ्य को नजरअंदाज कर रहे हैं। नींद की कमी और तनाव के चलते कई छात्र मानसिक परेशानी के साथ मन कक्ष पहुंच रहे हैं। डॉक्टरों ने विद्यार्थियों को पर्याप्त नींद, संतुलित पढ़ाई और स्वस्थ दिनचर्या अपनाने की सलाह दी है।
- बोर्ड परीक्षा नजदीक, तनाव से जूझ रहे विद्यार्थी
- नींद की कमी से बढ़ रही मानसिक परेशानियां
- मेडिकल कॉलेज के मन कक्ष में बढ़ी छात्रों की संख्या
- देर रात पढ़ाई से बिगड़ रहा विद्यार्थियों का स्वास्थ्य
- विशेषज्ञों की सलाह: संतुलित दिनचर्या से ही मिलेगा बेहतर परिणाम
रुद्रपुर (ऊधम सिंह नगर)। बोर्ड परीक्षाओं के नजदीक आते ही विद्यार्थियों में बेहतर अंक लाने की होड़ तेज हो गई है, लेकिन इस दौड़ में कई छात्र-छात्राएं अपने स्वास्थ्य के प्रति लापरवाह होते जा रहे हैं। देर रात तक जागकर पढ़ाई करना, अनियमित दिनचर्या और अत्यधिक तनाव के कारण विद्यार्थियों में नींद न आने, घबराहट, चिंता और चिड़चिड़ापन जैसी समस्याएं बढ़ रही हैं। इसका सीधा असर उनके मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ रहा है। राजकीय मेडिकल कॉलेज, रुद्रपुर के मन कक्ष (मानसिक स्वास्थ्य इकाई) में इन दिनों बड़ी संख्या में विद्यार्थी परामर्श के लिए पहुंच रहे हैं।
डॉक्टरों के अनुसार, परीक्षा का दबाव विद्यार्थियों को मानसिक रूप से थका रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि देर रात तक जागकर पढ़ाई करने के बजाय पर्याप्त नींद लेना अधिक जरूरी है, क्योंकि स्वस्थ दिमाग ही बेहतर प्रदर्शन कर सकता है। जिले में इस वर्ष उत्तराखंड बोर्ड की हाईस्कूल और इंटरमीडिएट परीक्षाओं में कुल 39,924 परीक्षार्थी पंजीकृत हैं। ये परीक्षाएं 21 फरवरी से 20 मार्च तक जिले के 110 परीक्षा केंद्रों पर आयोजित की जाएंगी।
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जैसे-जैसे परीक्षा की तिथि नजदीक आ रही है, विद्यार्थियों में तनाव, नींद की कमी और मानसिक बेचैनी की शिकायतें बढ़ती जा रही हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि कई विद्यार्थी परीक्षा के अंतिम दिनों में जरूरत से ज्यादा पढ़ाई करने की कोशिश करते हैं। इससे उनका मस्तिष्क अत्यधिक थक जाता है और पहले से याद किया गया पाठ्यक्रम भी उलझने लगता है। परिणामस्वरूप पढ़ाई का दबाव और अधिक बढ़ जाता है।
डॉक्टर की राय
मेडिकल कॉलेज के मनोचिकित्सक डॉ. ईके डल्ला के अनुसार, इस समय प्रतिदिन दो से चार विद्यार्थी केवल नींद न आने और परीक्षा के तनाव की शिकायत लेकर मन कक्ष में आ रहे हैं। विद्यार्थियों का कहना है कि जब वे रात में सोने की कोशिश करते हैं, तो दिनभर पढ़ा हुआ विषय उनके दिमाग में घूमता रहता है, जिससे नींद नहीं आती।
वास्तविक मामले
मामला 1 : शहर के जगतपुरा निवासी एक हाईस्कूल छात्र पहली बार बोर्ड परीक्षा देने जा रहा है। परीक्षा और पढ़ाई की चिंता के कारण उसे कई दिनों से नींद नहीं आ रही थी। डॉक्टर से परामर्श और काउंसलिंग के बाद उसकी स्थिति में सुधार हुआ है।
मामला 2 : सुभाषनगर निवासी इंटरमीडिएट की एक छात्रा देर रात तक पढ़ाई करती थी, जिससे उसकी नींद पूरी नहीं हो पा रही थी और उसे घबराहट होने लगी थी। डॉक्टर की काउंसलिंग के बाद अब वह समय-सारिणी के अनुसार पढ़ाई कर रही है और स्वयं को पहले से बेहतर महसूस कर रही है।
सावधानी और संतुलन जरूरी
डॉक्टरों का कहना है कि बोर्ड परीक्षाएं जीवन का एक महत्वपूर्ण पड़ाव जरूर हैं, लेकिन इन्हें जीवन का अंतिम लक्ष्य नहीं माना जाना चाहिए। संतुलित पढ़ाई, नियमित दिनचर्या और पर्याप्त नींद से ही विद्यार्थी मानसिक रूप से मजबूत रहकर बेहतर परिणाम हासिल कर सकते हैं।





