
अंकिता भंडारी हत्याकांड में कथित वीआईपी की भूमिका और साक्ष्य छिपाने के आरोपों की जांच अब केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) करेगी। आईजी गढ़वाल ने स्पष्ट किया कि शासन ने केस से जुड़ी फाइल CBI को भेजने की प्रक्रिया शुरू कर दी है और हर संदेह का समाधान होगा।
- शासन स्तर से CBI को भेजी जा रही है केस फाइल
- डॉ. अनिल प्रकाश जोशी की तहरीर पर दर्ज हुई नई FIR
- साक्ष्य छिपाने के आरोपों की भी होगी जांच
- IG राजीव स्वरूप की जनता से अपील– अफवाहों से बचें
देहरादून | अंकिता भंडारी हत्याकांड में लंबे समय से उठ रहे वीआईपी कनेक्शन और साक्ष्य छिपाने के आरोपों की जांच अब केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) करेगी। राज्य सरकार ने इस संबंध में औपचारिक प्रक्रिया शुरू कर दी है और प्रकरण से जुड़ी सभी फाइलें केंद्रीय एजेंसी को सौंपने की तैयारी की जा रही है।
यह जानकारी पुलिस महानिरीक्षक (गढ़वाल परिक्षेत्र) राजीव स्वरूप ने शनिवार को आयोजित प्रेस वार्ता में दी। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री के निर्देश पर शासन स्तर से CBI को केस फाइल भेजने की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी गई है। IG ने स्पष्ट किया कि राज्य पुलिस ने अंकिता हत्याकांड की जांच शुरू से ही पूरी गंभीरता, पारदर्शिता और जिम्मेदारी के साथ की थी।
उन्होंने बताया कि मामले की जांच के लिए वरिष्ठ महिला आईपीएस अधिकारी के नेतृत्व में विशेष जांच टीम (SIT) गठित की गई थी, जिसने ठोस साक्ष्य जुटाते हुए तीनों मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार किया। मजबूत विवेचना के आधार पर अदालत ने तीनों दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई और उन्हें आज तक जमानत नहीं मिल सकी।
आईजी राजीव स्वरूप ने कहा कि सरकार इस प्रकरण में किसी भी तरह का संदेह या भ्रम नहीं छोड़ना चाहती। इसी उद्देश्य से अब VIP कनेक्शन और साक्ष्य नष्ट करने जैसे आरोपों की जांच एक स्वतंत्र केंद्रीय एजेंसी से कराई जा रही है, ताकि न्याय की प्रक्रिया पर किसी तरह का प्रश्नचिह्न न रहे।
इससे पहले पद्मभूषण डॉ. अनिल प्रकाश जोशी की तहरीर पर देहरादून के बसंत विहार थाने में एक नई प्राथमिकी दर्ज की गई थी। इस FIR में दो प्रमुख बिंदुओं पर जांच केंद्रित की गई है—पहला, कथित VIP व्यक्ति या व्यक्तियों की पहचान और भूमिका, तथा दूसरा, जांच के दौरान साक्ष्य छिपाने या नष्ट करने के आरोप।
डॉ. जोशी ने अपनी शिकायत में उल्लेख किया था कि भले ही हत्याकांड में दोषियों को सजा हो चुकी है, लेकिन सोशल मीडिया और सार्वजनिक मंचों पर लगातार यह आरोप लगाए जा रहे हैं कि कुछ महत्वपूर्ण तथ्यों को दबाया गया। ऐसे में पूर्ण न्याय सुनिश्चित करने के लिए एक स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच आवश्यक है।
आईजी गढ़वाल ने जनता से अपील की कि वे सोशल मीडिया पर फैल रही अफवाहों पर भरोसा न करें। यदि किसी के पास इस प्रकरण से संबंधित कोई ठोस या गुप्त साक्ष्य है, तो वह सीधे जांच एजेंसी को उपलब्ध कराए। उन्होंने भरोसा दिलाया कि CBI जांच के बाद अंकिता भंडारी केस से जुड़े हर संदेह और सवाल का स्पष्ट उत्तर सामने आएगा।





