
आगरा में एआई तकनीक का दुरुपयोग कर युवतियों और महिलाओं को ब्लैकमेल करने के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। मोर्फ्ड फोटो और डीपफेक वीडियो बनाकर बदनाम करने तथा वसूली की घटनाओं ने पुलिस की चिंता बढ़ा दी है। साइबर क्राइम सेल सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की निगरानी कर आरोपियों पर सख्त कार्रवाई कर रही है।
- दुश्मनी निकालने का नया हथियार बना एआई
- मोर्फ्ड फोटो और डीपफेक से बढ़ी ब्लैकमेलिंग
- साइबर सेल की निगरानी में संदिग्ध सोशल मीडिया अकाउंट
- युवतियों की फोटो से छेड़छाड़ के मामलों में तेजी
आगरा। आगरा में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) तकनीक का दुरुपयोग गंभीर साइबर अपराध के रूप में सामने आ रहा है। जहां एक ओर एआई से कामकाज आसान हुआ है, वहीं दूसरी ओर इसे दुश्मनी निकालने, ब्लैकमेलिंग करने और सामाजिक माहौल बिगाड़ने के लिए हथियार की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है। इन मामलों में सबसे अधिक शिकार युवतियां और महिलाएं बन रही हैं। डीसीपी साइबर क्राइम आदित्य कुमार के अनुसार एआई से फोटो और वीडियो एडिट कर उन्हें आपत्तिजनक बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल किया जा रहा है।
कई मामलों में परिचित लोग ही निजी रंजिश या संबंध बिगड़ने के बाद ऐसी हरकतें कर रहे हैं। पुलिस की सोशल मीडिया सेल लगातार संदिग्ध कंटेंट पर नजर रख रही है और विभिन्न प्लेटफॉर्म से सहयोग लेकर आरोपियों को चिह्नित कर कार्रवाई कर रही है। हाल के महीनों में सामने आए मामलों ने स्थिति की गंभीरता को उजागर किया है। एत्माद्दौला क्षेत्र में एक बीसीए छात्रा को पड़ोसी युवक ने एआई से फोटो एडिट कर ब्लैकमेल किया। कमलानगर में छात्रा की आपत्तिजनक तस्वीरें मोहल्ले में लिफाफों में डालकर फेंकी गईं। शाहगंज क्षेत्र में इंस्टाग्राम आईडी पर मोर्फ्ड फोटो पोस्ट कर बदनाम किया गया।
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एक अन्य मामले में छात्रा की पढ़ाई तक छूट गई। सदर क्षेत्र में युवती से ब्लैकमेलिंग कर दो लाख रुपये वसूले गए और गंभीर अपराध को अंजाम दिया गया। एआई के दुरुपयोग के मामले केवल महिलाओं तक सीमित नहीं हैं। सिकंदरा क्षेत्र में एक युवक ने एआई से फर्जी वीडियो बनाकर राजनीतिक हस्तियों को जोड़ते हुए आपत्तिजनक सामग्री पोस्ट की, जिस पर पुलिस ने कार्रवाई की। साइबर विशेषज्ञों का कहना है कि डीपफेक और मोर्फिंग तकनीक के कारण फोटो और वीडियो की सत्यता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
केंद्र सरकार ने भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को एआई जनित कंटेंट के नियमन और आपत्तिजनक सामग्री को सीमित समय में हटाने के निर्देश दिए हैं। पुलिस ने लोगों को सलाह दी है कि सोशल मीडिया पर निजी फोटो कम से कम साझा करें, प्रोफाइल को प्राइवेट रखें और अनजान लोगों को फ्रेंड लिस्ट में न जोड़ें। फोटो की गुणवत्ता कम रखकर पोस्ट करने से दुरुपयोग की संभावना घट सकती है। डिजिटल युग में तकनीक जहां सुविधा दे रही है, वहीं उसकी जिम्मेदाराना उपयोग की आवश्यकता भी उतनी ही बढ़ गई है। आगरा पुलिस ने स्पष्ट किया है कि एआई के माध्यम से ब्लैकमेलिंग या बदनामी करने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई जारी रहेगी।







