
ऋषि अगस्त्य मुनि महाराज की दिवारा यात्रा के दौरान गद्दीस्थल के प्रवेश द्वार पर लगे गेट से डोली रुक गई। आक्रोशित भक्तों ने गेट तोड़कर मार्ग प्रशस्त किया, जिसके बाद प्रशासन ने 52 लोगों पर एफआईआर दर्ज की।
- 15 वर्षों बाद निकली दिवारा यात्रा में दूसरे दिन भी गहमागहमी
- गेट नहीं हटने से हाईवे पर पांच घंटे लगा जाम
- जाम में फंसी एम्बुलेंस, यातायात व्यवस्था चरमराई
- बिजली-पानी ठप, अगस्त्यमुनि नगर में जनजीवन प्रभावित
रुद्रप्रयाग। मकर संक्रांति के अवसर पर 15 वर्षों बाद निकली ऋषि अगस्त्य मुनि महाराज की दिवारा यात्रा दूसरे दिन भी विवादों और अव्यवस्था की भेंट चढ़ गई। बृहस्पतिवार को जब डोली दोबारा क्षेत्र भ्रमण के बाद अगस्त्यमुनि मैदान (सैण) स्थित गद्दीस्थल पहुंची, तो वहां लगाए गए गेट के कारण उसका प्रवेश नहीं हो सका। डोली ने गद्दीस्थल में प्रवेश के लिए कई बार प्रयास किया, लेकिन प्रशासन की ओर से गेट नहीं हटाया गया। इससे पहले भी बुधवार को इसी कारण डोली को लौटना पड़ा था। इसे लेकर भक्तों में भारी आक्रोश फैल गया। भक्तों का कहना था कि यह मार्ग पारंपरिक दिवारा यात्रा का रास्ता है, जहां हाल में निर्माण कर गेट लगाया गया।
🔨 गेट टूटा, तब पहुंची डोली – लंबे इंतजार और प्रशासनिक अनदेखी के बाद आक्रोशित भक्तों ने ड्रिल मशीन और हथौड़ों से गेट को स्वयं ही तोड़ दिया। करीब पांच घंटे की मशक्कत के बाद शाम चार बजे गेट ध्वस्त हुआ, जिसके बाद डोली ने अगस्त्यमुनि मैदान की परिक्रमा की और गद्दीस्थल पर विराजमान हुई। वहां ऋषि अगस्त्य मुनि महाराज ने भक्तों की कुशलक्षेम जानी और फिर शाम को मंदिर की ओर प्रस्थान किया।
🚧 हाईवे जाम, एम्बुलेंस फंसी – गेट तोड़ने की कार्रवाई और डोली के हाईवे पर रुकने से अगस्त्यमुनि बाजार में दोपहर 12:30 बजे से भारी जाम लग गया। केदारनाथ और रुद्रप्रयाग की ओर जाने वाले वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। इस दौरान एम्बुलेंस भी घंटों जाम में फंसी रही। पुलिस को तिलवाड़ा और गंगानगर से वाहनों को वैकल्पिक मार्गों से भेजना पड़ा। शाम करीब 4:30 बजे यातायात सामान्य हो सका।
⚡ बिजली-पानी ठप, जनता परेशान – आस्था के इस महापर्व के बीच नगर क्षेत्र में दिनभर बिजली और पानी की आपूर्ति बाधित रही। ऑनलाइन कार्य, व्यापार और छात्रों की पढ़ाई प्रभावित हुई। पानी की किल्लत के कारण होटल व्यवसायियों और स्थानीय लोगों को वैकल्पिक स्रोतों से पानी भरना पड़ा। देर शाम बिजली बहाल हुई, लेकिन पानी की समस्या बनी रही।
🚔 52 लोगों पर एफआईआर- घटना के बाद प्रशासन ने सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और शांति भंग करने के आरोप में 52 लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है। इससे क्षेत्र में धार्मिक आस्था और प्रशासनिक सख्ती को लेकर नई बहस छिड़ गई है।
🗣️ भक्तों का आरोप – भक्तों और स्थानीय लोगों का कहना है कि बीते एक माह से यहां निर्माण कार्य का विरोध चल रहा था और प्रशासन से कई बार गेट हटाने की मांग की गई, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। उनका आरोप है कि प्रशासन की जिद और अनदेखी के कारण धार्मिक भावनाएं आहत हुईं और यह स्थिति बनी।









