
नैनीताल। उत्तराखंड हाईकोर्ट बार एसोसिएशन में नई कार्यकारिणी के चुनाव को लेकर स्थिति टकरावपूर्ण होती जा रही है। गुरुवार अपराह्न बुलाई गई आम सभा से ठीक पहले उत्तराखंड बार काउंसिल द्वारा राज्यभर की सभी बार एसोसिएशनों के चुनावों पर रोक लगाने का आदेश जारी किया गया, लेकिन इस आदेश को अधिवक्ताओं ने पूरी तरह नकार दिया। अधिवक्ताओं का तर्क है कि बार काउंसिल का कार्यकाल दिसंबर 2024 में समाप्त हो चुका है और सुप्रीम कोर्ट पहले ही उत्तराखंड बार काउंसिल के चुनाव के लिए पूर्व न्यायाधीश राजीव शर्मा को चुनाव अधिकारी नियुक्त कर चुका है। ऐसे में बार काउंसिल के अध्यक्ष को कोई आदेश जारी करने का अधिकार नहीं रह जाता।
बार सभागार में हुई इस महत्वपूर्ण आम सभा में अधिवक्ताओं ने बार काउंसिल के आदेश की वैधता पर गंभीर प्रश्न उठाए। वक्ताओं का कहना था कि वर्तमान परिस्थितियों में किसी भी तात्कालिक निर्णय का अधिकार केवल सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त चुनाव अधिकारी को है, न कि बार काउंसिल को। इसी आधार पर हाईकोर्ट बार एसोसिएशन की आम सभा ने एक स्वर में नई कार्यकारिणी के चुनाव की प्रक्रिया आगे बढ़ाने का निर्णय लिया।
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सभा में सर्वसम्मति से हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के पूर्व सचिव कुर्बान अली को चुनाव अधिकारी नियुक्त किया गया। उनसे आग्रह किया गया कि वे पूरी चुनाव प्रक्रिया संचालित करें और चुनाव समिति गठित करें। यह नियुक्ति उस समय हुई जब बार काउंसिल ने यह कहकर सभी चुनावों पर रोक लगा दी थी कि मार्च से पहले बार काउंसिल के चुनाव होने हैं। अधिवक्ताओं ने इस आदेश को अव्यवहारिक और अधिकारहीन बताते हुए अस्वीकार कर दिया।
नई कार्यकारिणी के वर्ष 2025–2026 के चुनाव पर्ची सिस्टम से कराए जाने का निर्णय लिया गया है। बैठक में बार अध्यक्ष डी.एस. मेहता, डॉ. महेंद्र सिंह पाल, पुष्पा जोशी, वीरेंद्र अधिकारी, अमन बलूनी, चित्रा जोशी, चेतन शर्मा, रोहित गौड़ सहित अनेक अधिवक्ता मौजूद रहे। अधिवक्ताओं का कहना है कि बार काउंसिल के आदेश से कार्य बाधित नहीं होगा और चुनाव प्रक्रिया तय समय के अनुसार आगे बढ़ेगी।
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स्थिति अब खुला टकराव का रूप ले चुकी है, और अधिवक्ताओं में इस बात को लेकर स्पष्टता है कि हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के निर्णय को प्राथमिकता दी जाएगी। आगे की कार्रवाई किस दिशा में जाएगी, इस पर अब सबकी नजरें टिक गई हैं।





