
- उत्तराखंड में पहली बार अत्याधुनिक न्यूरो रिहैबिलिटेशन सेवाएं शुरू
- घर लौटकर सेवा का संकल्प: डॉ. नीलम मेहरा की प्रेरणादायक पहल
- देहरादून में खुला विश्वस्तरीय स्पाइनल कॉर्ड व न्यूरो रिहैबिलिटेशन सेंटर
- पलायन रोकने की दिशा में बड़ा कदम: रोजगार और चिकित्सा दोनों में बढ़ेगी मजबूती
देहरादून। उत्तराखंड जैसे पहाड़ी राज्यों में वर्षों से पलायन एक प्रमुख चुनौती रहा है, विशेषकर चिकित्सा क्षेत्र में विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी के कारण मरीजों को महानगरों का रुख करना पड़ता था। लेकिन अब इस प्रवृत्ति को उलटते हुए राज्य के लिए एक ऐतिहासिक और प्रेरणादायक पहल हुई है। विशेषज्ञ न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. नीलम मेहरा ने अपने व्यापक अनुभव और विशेषज्ञता के वर्षों को छोड़कर अपनी जन्मभूमि लौटने का निर्णय लिया है, ताकि उत्तराखंड के मरीजों को घर के पास ही विश्वस्तरीय उपचार मिल सके।
इसी उद्देश्य को सामने रखते हुए देहरादून में ‘न्यूरो स्टेप स्पाइनल कॉर्ड एवं न्यूरो रिहैबिलिटेशन सेंटर’ का भव्य शुभारंभ किया गया। उद्घाटन कार्यक्रम में धर्मपुर से भाजपा विधायक विनोद चमोली और भाजपा आईटी सेल के पूर्व संयोजक शेखर वर्मा ने फीता काटकर केंद्र का उद्घाटन किया। यह केवल एक चिकित्सा संस्थान का उद्घाटन नहीं था, बल्कि उत्तराखंड में ‘रिवर्स माइग्रेशन’ की दिशा में एक मजबूत और सकारात्मक संदेश था कि अब प्रदेश के युवा और विशेषज्ञ अपने घरों को लौटकर सेवाएं देने के लिए तैयार हैं।
अनुभव की वापसी: रिवर्स माइग्रेशन का सशक्त उदाहरण
डॉ. नीलम मेहरा और सह-संस्थापक डॉ. सुनील सैनी ने अन्य राज्यों में वर्षों तक कार्य करते हुए न्यूरोलॉजी और स्पाइनल रिहैबिलिटेशन के क्षेत्र में महत्वपूर्ण अनुभव प्राप्त किया। उनके अनुसार, उत्तराखंड के मरीजों को स्ट्रोक, स्पाइनल इंजरी, सेरेब्रल पाल्सी, स्पोर्ट्स इंजरी और अन्य न्यूरोलॉजिकल समस्याओं के लिए दिल्ली, चंडीगढ़, मुंबई या अन्य बड़े शहरों पर निर्भर रहना पड़ रहा था। यह न केवल आर्थिक रूप से भारी पड़ता था, बल्कि भावनात्मक और सामाजिक रूप से भी चुनौतीपूर्ण था।
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उत्तराखंड पलायन निवारण आयोग की सदस्य रंजना रावत ने इस पहल की सराहना करते हुए इसे रिवर्स माइग्रेशन का आदर्श नमूना बताया। उन्होंने कहा कि यह इस बात का प्रमाण है कि उत्तराखंड के युवा और विशेषज्ञ अपने राज्य की ज़रूरतों को समझते हुए वापसी कर सकते हैं और विकास में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं।
विश्वस्तरीय सुविधाओं वाला अत्याधुनिक न्यूरो स्टेप सेंटर
देहरादून में खुला न्यूरो स्टेप सेंटर अत्याधुनिक तकनीकों से लैस है, जो उत्तराखंड में अब तक अनुपलब्ध थी। यह केंद्र रोबोटिक न्यूरो रिहैबिलिटेशन, स्पाइनल कॉर्ड इंजरी मैनेजमेंट, स्ट्रोक रिहैब, पैरालिसिस थेरेपी, बाल चिकित्सा न्यूरो थेरेपी, स्पोर्ट्स इंजरी रिहैबिलिटेशन और ऑर्थोपेडिक से जुड़ी कई अन्य सेवाओं का समग्र समाधान प्रदान करता है।
उद्घाटन के दौरान विधायक विनोद चमोली ने कहा कि यह केंद्र उत्तराखंड के लिए एक बड़ा स्वास्थ्य सुधार होगा। उन्होंने कहा कि मरीजों को अब दिल्ली-मुंबई जैसे महानगरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे और उनका समय, धन और ऊर्जा बचेगी।
रोजगार और पलायन निवारण में बड़ी भूमिका
डॉ. नीलम मेहरा ने स्पष्ट कहा कि उनका लक्ष्य केवल उत्तम स्वास्थ्य सेवाएं देना नहीं है, बल्कि उत्तराखंड में रोजगार अवसरों का विस्तार करना भी है। उन्होंने बताया कि आने वाले वर्षों में वे इस केंद्र की अन्य शाखाएँ भी राज्य में खोलने की योजना बना रही हैं, जिससे स्थानीय युवाओं को रोजगार मिलेगा और प्रदेश के अंदर चिकित्सा ढांचा मजबूत होगा।
समाजसेवी पवन दूबे ने इस पहल को राज्य के लिए मील का पत्थर बताया और कहा कि यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के पलायन रोकने और स्थानीय रोजगार बढ़ाने के विज़न को मजबूती देता है। उन्होंने इसे राज्य के युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत बताया।
कार्यक्रम में उपस्थित लोग और आगे की दिशा
इस अवसर पर स्थानीय पार्षद आलोक कुमार, गौरव रौतेला, लक्ष्मण सिंह मेहरा, कमला मेहरा, प्रेमा, तथा अन्य सम्मानित लोग उपस्थित रहे। उद्घाटन कार्यक्रम के बाद मेहमानों को सेंटर का भ्रमण कराया गया, जहां उन्होंने अत्याधुनिक मशीनों, प्रशिक्षित स्टाफ एवं बहु-विषयक टीम द्वारा प्रदान की जा रही सुविधाओं को करीब से समझा।
न्यूरो स्टेप सेंटर आने वाले समय में उत्तराखंड ही नहीं बल्कि पूरे उत्तर भारत के लिए उच्चस्तरीय न्यूरो रिहैबिलिटेशन का केंद्र बन सकता है। इस पहल से राज्य में स्वास्थ्य सुविधाओं के प्रति विश्वास बढ़ेगा और लोगों को घर के पास ही जीवन-परिवर्तनकारी उपचार मिलेगा।





