
(देवभूमि समाचार)
राज्य शैक्षिक प्रबंधन एवं प्रशिक्षण संस्थान (सीमैट) प्रयागराज उत्तर प्रदेश में अकादमिक रिसोर्स पर्सन के चार दिवसीय प्रशिक्षण के समापन अवसर पर नवाबगंज ब्लॉक संसाधन केंद्र में कार्यरत अकादमिक रिसोर्स पर्सन सुनील कुमार ने संस्थान की निदेशिका सुत्ता सिंह जी को अपना हालिया प्रकाशित काव्य संग्रह भावों के मोती भेंट किया।
इस काव्य संग्रह में सुनील कुमार की चुनिंदा 161 रचनाएं शामिल हैं। इस संग्रह की रचनाएं जीवन और समाज के प्रति सहज और संवेदनशील नजरिया अपनाती हैं। एक सरल मनुष्य की तरह चीजों को देखना और एक सहज आदर्श की अभिव्यक्ति इस युवा रचनाकार की रचनाओं में देखने को मिलती है।
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संग्रह में शामिल खुशियों की तलाश में, चलता चला गया, मंजिल ही ठिकाना है, बढ़ते रहो जीवन पथ पर,जब हम कुछ बन जाएं आदि रचनाएं हमें निरंतर लक्ष्य की ओर बढ़ने के लिए प्रेरित करती हैं। वहीं मैली मत कर काया अपनी, रैन बसेरा, माटी कहे मानव से, जीवन का न कोई ठिकाना आदि रचनाएं हमें जीवन के अंतिम सत्य का बोध कराती हैं
।संग्रह में शामिल बचपन के दिन, मीत मेरे बचपन के, यादों की बारिश, दादी अम्मा के सौ रूपये आदि रचनाएं हमें हमारे बचपन के दिनों की याद दिलाते हैं। बाबूजी, मेरी प्यारी मां,बेटियां,आदि रचनाएं संतान के प्रति माता-पिता के त्याग व परिवारिक संबंधों की महत्ता को दर्शाती हैं।
बढ़ती आबादी, धरती कहे पुकार के, आओ पेड़ लगाएं, हरियाली, झरना, नदी की पीड़ा, बदलती हवाओं का इशारा, आदि कविताएं पर्यावरणीय समस्याओं व उनके समाधान की ओर हमारा ध्यान आकृष्ट कराती हैं। संग्रह की कविताएं वह सुबह कब आएगी,भगवान तेरे संसार में,रंग बदलते देखा है,फर्क पड़ता है,विजय दशमी,मोबाइल जनरेशन, क्या से क्या हो गए, बहू दहेज में क्या लाई है,आदि रचनाएं वर्तमान भारतीय समाज का दर्शन कराती हैं।
कुल मिलाकर संग्रह में शामिल रचनाएं हमें हमारे जीवन के अनुभवों से परिचय कराती हैं। अगर सही मायने में देखा जाए तो सुनील कुमार का प्रस्तुत काव्य संग्रह युवाओं के लिए मार्गदर्शक है।







