- उत्तराखंड के सम्मान के मुद्दे पर सड़कों पर उतरे प्रदर्शनकारी, अखिलेश यादव से माफी की मांग
- अखिलेश यादव की टिप्पणी के विरोध में देहरादून से रुद्रप्रयाग तक प्रदर्शन
- उत्तराखंडवासियों पर टिप्पणी को लेकर भाजपा ने कांग्रेस को घेरा
- राज्य आंदोलनकारियों और पूर्व सैनिकों ने भी जताया विरोध
देहरादून। उत्तराखंडवासियों को घुसपैठिया कहे जाने से जुड़ी टिप्पणी को लेकर प्रदेश में राजनीतिक विवाद गहरा गया है। रविवार को पहाड़ से मैदान तक कई स्थानों पर विरोध प्रदर्शन किए गए और समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के पुतले जलाए गए। प्रदर्शनकारियों ने टिप्पणी पर नाराजगी जताते हुए माफी की मांग की। इस मुद्दे पर भारतीय जनता पार्टी ने कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के राजनीतिक संबंधों को लेकर भी सवाल उठाए। देहरादून, हल्द्वानी, टनकपुर, अल्मोड़ा, बागेश्वर, रुद्रपुर, खटीमा, बाजपुर, विकासनगर, ऋषिकेश, पौड़ी, मसूरी और रुद्रप्रयाग सहित कई स्थानों पर विरोध दर्ज कराया गया। इन प्रदर्शनों में भाजपा कार्यकर्ताओं, युवा मोर्चा के सदस्यों, पहाड़ी आर्मी, शिवसैनिकों और राज्य आंदोलन से जुड़े लोगों ने भाग लिया।
देहरादून में गणेश जोशी के नेतृत्व में प्रदर्शन
राजधानी देहरादून में कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी के नेतृत्व में भाजपा कार्यकर्ताओं ने कुठाल गेट पर प्रदर्शन कर अखिलेश यादव का पुतला दहन किया। इस दौरान कार्यकर्ताओं ने टिप्पणी की निंदा करते हुए सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग उठाई। गणेश जोशी ने कहा कि प्रदर्शन के माध्यम से अखिलेश यादव की टिप्पणी और उससे जुड़ी सोच का विरोध किया गया है। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि उत्तराखंड के लोगों के योगदान और सम्मान को ध्यान में रखते हुए सार्वजनिक जीवन में जिम्मेदार भाषा का इस्तेमाल किया जाना चाहिए।
महेंद्र भट्ट ने कांग्रेस से मांगा जवाब
भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने अखिलेश यादव की टिप्पणी की निंदा करते हुए कांग्रेस सहित प्रदेश के अन्य राजनीतिक दलों से समाजवादी पार्टी के साथ अपने संबंधों पर स्थिति स्पष्ट करने को कहा। उन्होंने सवाल उठाया कि उत्तराखंडवासियों के सम्मान से जुड़े इस विवाद के बावजूद यदि कांग्रेस सपा के साथ राजनीतिक संबंध बनाए रखती है, तो प्रदेश की जनता इसे किस रूप में देखेगी। भट्ट ने कहा कि उत्तराखंड की जनता अपने सम्मान और स्वाभिमान के मुद्दे पर राजनीतिक दलों का रुख देख रही है। भाजपा ने इस विवाद को प्रदेश की पहचान और सम्मान से जोड़ते हुए कांग्रेस पर राजनीतिक समीकरणों को प्राथमिकता देने का आरोप लगाया।
दीप्ति रावत ने टिप्पणी को बताया दुर्भाग्यपूर्ण
भाजपा की प्रदेश महामंत्री दीप्ति रावत ने कहा कि उत्तराखंड के युवाओं ने सेना, सुरक्षा बलों, प्रशासन और राष्ट्रसेवा के विभिन्न क्षेत्रों में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। ऐसे प्रदेश के लोगों के लिए अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल करना दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने अखिलेश यादव की पत्नी डिंपल यादव के उत्तराखंड से पारिवारिक संबंध का उल्लेख करते हुए कहा कि इस पृष्ठभूमि में प्रदेशवासियों के सम्मान को ठेस पहुंचाने वाली टिप्पणी और अधिक संवेदनशील हो जाती है।
राज्य आंदोलनकारियों ने भी जताई नाराजगी
रुड़की में राज्य आंदोलनकारियों ने इस मामले में विरोध दर्ज कराया। प्रदर्शन के दौरान कुछ आंदोलनकारियों ने पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव को दिए गए पद्म विभूषण सम्मान को वापस लेने की मांग भी उठाई। आंदोलनकारियों ने उत्तराखंड के पर्वतीय मूल के नेताओं और मुख्यमंत्रियों के उत्तर प्रदेश की राजनीति में योगदान का उल्लेख करते हुए कहा कि राज्य के लोगों के सम्मान से जुड़े मुद्दों को गंभीरता से लिया जाना चाहिए। इस मांग के साथ उन्होंने टिप्पणी पर नाराजगी व्यक्त की।
गढ़वाल क्षेत्र में भी हुए प्रदर्शन
गढ़वाल क्षेत्र के विभिन्न स्थानों पर भी अखिलेश यादव की टिप्पणी के विरोध में प्रदर्शन किए गए। विकासनगर में पूर्व सैनिकों ने पुतला दहन कर अपना विरोध जताया। रुद्रप्रयाग जिले के तिलवाड़ा में भाजपा युवा मोर्चा के कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन किया। ऋषिकेश में भाजपा कार्यकर्ताओं ने समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष का पुतला जलाया, जबकि पौड़ी और मसूरी में भी विरोध प्रदर्शन कर टिप्पणी की निंदा की गई। रायवाला में रसिक महाराज ने भी अखिलेश यादव से माफी मांगने की मांग उठाई।
राजनीतिक विवाद के केंद्र में प्रदेश का सम्मान
उत्तराखंड में इस टिप्पणी को लेकर हुए प्रदर्शनों ने राजनीतिक बहस को तेज कर दिया है। भाजपा नेताओं ने जहां इसे प्रदेश के स्वाभिमान से जुड़ा विषय बताया, वहीं विभिन्न स्थानों पर प्रदर्शनकारियों ने सार्वजनिक रूप से माफी की मांग की। राज्य आंदोलनकारियों और पूर्व सैनिकों की भागीदारी ने इस मुद्दे को राजनीतिक विरोध से आगे बढ़ाकर प्रदेश की पहचान और सम्मान से जुड़े विमर्श का रूप दिया है। फिलहाल इस विवाद के बीच राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं। इस मामले में संबंधित बयान का पूरा संदर्भ और राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी महत्वपूर्ण हैं, ताकि पाठक टिप्पणी, उसके विरोध और उससे जुड़े राजनीतिक दावों को समग्र रूप से समझ सकें।
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