- SIR के बाद लक्सर सीट पर बड़ा बदलाव, 90,944 रह गए मतदाता
- लक्सर में मतदाता सूची बदली, 2027 के चुनाव पर पड़ेगा असर
- जीत के अंतर से ज्यादा घटे मतदाता, लक्सर में नए सिरे से बनेगा चुनावी गणित
- लक्सर में SIR के बाद 11,676 मतदाता कम, बूथवार बदलेंगे सियासी समीकरण
लक्सर। विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के बाद लक्सर विधानसभा सीट की मतदाता सूची में बड़ा बदलाव सामने आया है। नई मतदाता सूची में मतदाताओं की संख्या 90,944 रह गई है। यह संख्या वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव के मुकाबले 11,676 कम है। वहीं, वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में लक्सर विधानसभा क्षेत्र में 1,03,680 मतदाता थे, जबकि अब यह संख्या घटकर 90,944 रह गई है। इस तरह लोकसभा चुनाव के मुकाबले भी मतदाताओं की संख्या में 12,736 की कमी दर्ज हुई है।
मतदाता सूची में हुए इस बड़े बदलाव के बाद आगामी 2027 विधानसभा चुनाव में लक्सर सीट के राजनीतिक समीकरणों पर असर पड़ने की संभावना जताई जा रही है। खासतौर पर उन बूथों और गांवों में चुनावी गणित बदल सकता है, जहां मतदाता सूची में अपेक्षाकृत अधिक बदलाव हुआ है। राजनीतिक दलों और संभावित प्रत्याशियों को अब नई मतदाता सूची के आधार पर अपनी रणनीति और बूथ स्तर के समीकरण तैयार करने होंगे।
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2022 के चुनाव से भी कम हुए 11,676 मतदाता
वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में लक्सर सीट पर कुल 1,02,620 मतदाता थे। इसके बाद 2024 के लोकसभा चुनाव में यह संख्या बढ़कर 1,03,680 हो गई थी। SIR प्रक्रिया के बाद अब मतदाता संख्या 90,944 रह गई है। इस तरह वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव की तुलना में वर्तमान मतदाता सूची में 11,676 मतदाता कम हैं। वहीं 2024 के लोकसभा चुनाव के आंकड़े से तुलना करें तो 12,736 मतदाताओं की कमी सामने आती है। मतदाता संख्या में यह बदलाव इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि यह 2022 के विधानसभा चुनाव में प्रत्याशियों के बीच रहे जीत-हार के अंतर से अधिक है।
जीत-हार के अंतर से ज्यादा का बदलाव
वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में लक्सर सीट पर बसपा प्रत्याशी शहजाद ने 34,899 वोट हासिल कर जीत दर्ज की थी। दूसरे स्थान पर रहे भाजपा प्रत्याशी संजय गुप्ता को 24,459 वोट मिले थे। दोनों प्रत्याशियों के बीच जीत-हार का अंतर 10,440 वोट रहा था। अब SIR के बाद मतदाता सूची में 11,676 मतदाताओं की कमी हुई है। यानी मतदाता संख्या में हुआ बदलाव पिछले विधानसभा चुनाव में जीत-हार के अंतर से भी अधिक है। ऐसे में यह बदलाव आगामी विधानसभा चुनाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। हालांकि केवल मतदाताओं की संख्या में कमी के आधार पर चुनावी परिणाम का अनुमान नहीं लगाया जा सकता। मतदाता सूची में हुए बदलाव किस क्षेत्र, बूथ और गांव में कितने हुए हैं, यह भी चुनावी रणनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण होगा।
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SIR के दौरान 3,840 आपत्तियां स्वीकार
लक्सर में SIR प्रक्रिया के दौरान 3,840 आपत्तियां स्वीकार की गई हैं। मैपिंग के बाद प्री-SIR की स्थिति में मतदाता सूची में 2,679 मतदाताओं की कमी दर्ज हुई थी। हालांकि इसे पूरी SIR प्रक्रिया के तहत हटाए गए नामों की संख्या नहीं माना जा रहा है। इसमें SIR प्रक्रिया के दौरान सूची में शामिल हुए नए मतदाता और किए गए संशोधन भी शामिल हैं। SIR प्रक्रिया के दौरान मतदाता सूची और गणना प्रपत्रों की जांच में कई तरह की विसंगतियां भी सामने आईं। कुल 37,726 गणना प्रपत्रों में नाम, फोटो और पते आदि से संबंधित अंतर या अन्य विसंगतियां मिलीं।
इनमें 8,144 ऐसे मतदाता शामिल रहे जो वर्ष 2003 की विधानसभा चुनाव मतदाता सूची में शामिल नहीं थे। वहीं 8,586 मतदाता ऐसे पाए गए जो मृत्यु, स्थान परिवर्तन और अन्य कारणों से बीएलओ के संपर्क करने के बावजूद अपने पते पर नहीं मिले। ऐसे मतदाताओं को गणना प्रपत्रों का वितरण नहीं हो सका। नगर क्षेत्र में भी दो हजार से अधिक मतदाता ऐसे मिले जिनके नाम में परिवर्तन, मृत्यु अथवा दो स्थानों पर मतदाता सूची में नाम शामिल होने जैसी स्थितियां सामने आईं।
132 पोलिंग स्टेशन, अब बूथवार नजर
लक्सर विधानसभा क्षेत्र में वर्तमान मतदाता सूची के साथ कुल 132 पोलिंग स्टेशन हैं। SIR के बाद मतदाता संख्या में आए बदलाव को देखते हुए अब राजनीतिक दलों की नजर बूथवार आंकड़ों पर रहेगी। किस बूथ पर कितने मतदाता कम हुए, किन गांवों में अधिक नाम हटे या संशोधित हुए और कहां नए मतदाता जुड़े, ये सभी आंकड़े आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों में महत्वपूर्ण हो सकते हैं। लक्सर विधानसभा सीट पर पिछले चुनाव में जीत-हार का अंतर 10,440 वोट था।
वर्तमान मतदाता सूची में इससे भी अधिक 11,676 मतदाताओं की कमी सामने आई है। ऐसे में SIR के बाद बदली मतदाता सूची आगामी 2027 विधानसभा चुनाव के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। राजनीतिक दलों और प्रत्याशियों को अब पुराने चुनावी आंकड़ों के बजाय नई मतदाता सूची के आधार पर बूथ और गांव स्तर पर अपनी रणनीति तैयार करनी होगी। विशेष रूप से उन क्षेत्रों में समीकरणों का नए सिरे से आकलन करना होगा, जहां मतदाता सूची में सबसे अधिक बदलाव दर्ज हुए हैं।


