यह कविता भगत सिंह के देशप्रेम, बलिदान, साहस और विचारों को स्मरण करते हुए युवाओं को मातृभूमि के प्रति समर्पण का संदेश देती है। कविता में स्वतंत्रता, समानता, न्याय और शोषणमुक्त भारत के उनके विचारों को याद रखने तथा उनके बलिदान से प्रेरणा लेने का आह्वान किया गया है। रचना का मूल भाव है कि भगत सिंह की सोच और देशप्रेम की ज्योति आने वाली पीढ़ियों के मन में सदैव जीवित रहनी चाहिए।
- भगत सिंह की सोच को दिल के पास
- शहादत से रोशन देशप्रेम
- इंकलाब की ज्योति
- वीरों के बलिदान का एहसास
डॉ. प्रियंका सौरभ
भगत सिंह की सोच को, रखना दिल के पास।
देशप्रेम की ज्योति से, रोशन हो हर साँस।।
माटी पर कुर्बान थे, लेकर मन में जोश।
भारत माँ की आन पर, छोड़ा ना संतोष।।
हँसकर फाँसी चढ़ गए, अमर हुआ इतिहास।
भगत सिंह की सोच को, रखना दिल के पास।।
इंकलाब की गूँज से, काँपा अत्याचार।
तभी युवाओं में जगा, आजादी का प्यार।।
जीना है बस देशहित, उनका था विश्वास।
भगत सिंह की सोच को, रखना दिल के पास।।
सच, समानता, न्याय का, मन में था उजियार।
भारत का वो चाहते, शोषण से अधिकार।।
उनके सपनों का बने, भारत आज प्रकाश।
भगत सिंह की सोच को, रखना दिल के पास।।
तन मिट जाए देश पर, मिटने देना आज।
मातृभूमि के मान से, बढ़कर क्या है काज।।
वीरों के बलिदान का, रख सदा एहसास।
भगत सिंह की सोच को, रखना दिल के पास।।
डॉ. प्रियंका सौरभ
पीएचडी (राजनीति विज्ञान)
कवयित्री | सामाजिक चिंतक | स्तंभकार
उब्बा भवन, आर्यनगर, हिसार (हरियाणा)


