धारचूला हाईवे पर कूलागाड़ से चीन सीमा तक सड़क संपर्क बहाल होने से व्यास और दारमा घाटी समेत उच्च हिमालयी क्षेत्रों में फंसे लोगों को राहत मिली है। बीआरओ ने गस्कू, तवाघाट और दोबाट समेत कई स्थानों से मलबा और बोल्डर हटाकर यातायात सुचारू किया है, जबकि कूलागाड़ में बेली ब्रिज का निर्माण तेजी से चल रहा है। इसी बीच धारचूला और बंगापानी तहसील के कुछ क्षेत्रों में भूस्खलन और भूधंसाव से परिवारों पर खतरा बना हुआ है।
- चीन सीमा तक सड़क खुली, कूलागाड़ में बेली ब्रिज निर्माण तेज
- भूस्खलन के बाद धारचूला हाईवे पर लौटी आवाजाही
- व्यास-दरमा घाटी के लोगों को राहत, सड़क संपर्क बहाल
- कूलागाड़ से लिपुलेख तक वाहनों की आवाजाही शुरू
पिथौरागढ़। धारचूला हाईवे पर कूलागाड़ से चीन सीमा तक सड़क संपर्क बहाल होने से उच्च हिमालयी क्षेत्रों में फंसे लोगों को बड़ी राहत मिली है। बीआरओ की ओर से विभिन्न स्थानों पर बंद पड़े मार्गों से मलबा और बोल्डर हटाए जाने के बाद वाहनों की आवाजाही शुरू हो गई है। इसके साथ ही व्यास घाटी में लिपुलेख और दारमा घाटी में तिदांग तक जाने वाले मार्ग पर भी यातायात बहाल हो गया है। पिछले कुछ दिनों से सड़क मार्ग बाधित होने के कारण उच्च हिमालयी घाटियों में कई लोग फंसे हुए थे। मार्ग खुलने के बाद इन लोगों का धारचूला लौटना शुरू हो गया है। मंगलवार को तवाघाट के पास चट्टान टूटकर सड़क पर गिरने और बाद में धारचूला से करीब पांच किलोमीटर दूर दोबाट के आगे पहाड़ दरकने से यातायात प्रभावित हुआ था। खास बात यह रही कि दोबाट के पास पहाड़ दरकने की घटना वर्षा के बिना हुई।
गस्कू, तवाघाट और दोबाट में मार्ग खोला गया
धारचूला हाईवे के कई हिस्सों में भूस्खलन के कारण यातायात रुक गया था। बीआरओ ने दोनों प्रमुख स्थानों से मलबा हटाकर वाहनों का संचालन शुरू कराया। तवाघाट-गुंजी मार्ग के बीच गस्कू और मलघटिया के पास भी मलबा तथा बड़े बोल्डर हटाकर मार्ग खोल दिया गया। इसके बाद चीन सीमा क्षेत्र से सड़क संपर्क दोबारा स्थापित हो सका। धारचूला से कूलागाड़ तक वाहनों का संचालन हो रहा है। कूलागाड़ के पास निर्माणाधीन व्यवस्था के कारण कुछ स्थानों पर लोगों को पैदल गार्डरों को पार कर दूसरी ओर पहुंचना पड़ रहा है, जिसके बाद वे वाहनों से अपने गंतव्य की ओर रवाना हो रहे हैं।
कूलागाड़ में बेली ब्रिज का निर्माण जारी
कूलागाड़ में बेली ब्रिज के निर्माण का काम भी तेजी से आगे बढ़ रहा है। रिपोर्ट के अनुसार मंगलवार दोपहर तक पुल में दस फीट के दस स्लैब लगाए जा चुके थे और करीब 100 फीट पुल तैयार हो चुका था। मौसम अनुकूल रहने से निर्माण कार्य में तेजी आई है। उपजिलाधिकारी आशीष जोशी ने राजस्व टीम के साथ मौके पर पहुंचकर बेली ब्रिज निर्माण कार्य का निरीक्षण किया। हालांकि निर्माण स्थल के आसपास पहाड़ी से बोल्डर गिरने का खतरा बना हुआ है।
सोमवार शाम बेली ब्रिज के अपाटमेंट तक कुछ बोल्डर गिर गए थे, जिसके बाद वहां काम कर रहे मजदूरों को तत्काल हटना पड़ा। स्थानीय लोगों ने पहाड़ी पर अटके बोल्डरों को हटाने की आवश्यकता जताई है। स्थानीय समाजसेवी केशर सिंह धामी ने भी कहा कि पहले इन बोल्डरों को हटाया जाना जरूरी है, ताकि निर्माण कार्य और आवाजाही के दौरान खतरा कम हो सके।
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आदि कैलास यात्रा मार्ग पर भी आवाजाही शुरू
सीमांत क्षेत्र में पिछले तीन दिनों से बाधित आदि कैलास यात्रा मार्ग पर भी मंगलवार को वाहनों की आवाजाही शुरू हो गई। बीआरओ ने तवाघाट से घटियाबगड़ तक के महत्वपूर्ण मार्ग को सुचारू किया। इससे सीमांत क्षेत्र में आवागमन और यात्रा गतिविधियों को फिर से गति मिलने की उम्मीद है।
भूस्खलन और भूधंसाव से कई परिवार खतरे में
सड़क संपर्क बहाल होने के साथ ही धारचूला तहसील और आसपास के क्षेत्रों में भूस्खलन तथा भूधंसाव का खतरा अभी बना हुआ है। धारचूला तहसील के ताकुल गांव स्थित मल्ला घट्टाबगड़ तोक में अतिवृष्टि के कारण दो परिवारों के सामने संकट खड़ा हो गया है। भूधंसाव के कारण मूंगा देवी और कमला देवी के आवासीय मकानों का आंगन पूरी तरह जमींदोज हो गया है। इससे दोनों मकानों की नींव पर सीधा खतरा मंडरा रहा है और उनके कभी भी क्षतिग्रस्त होने की आशंका बनी हुई है। पीड़ित परिवारों ने प्रशासन से तत्काल सर्वे कराने के साथ आर्थिक सहायता और सुरक्षा उपलब्ध कराने की मांग की है।
बंगापानी तहसील क्षेत्र में भी भारी वर्षा के कारण छोरीबगड़ और ऊंचाई वाले लुम्ती के देवलेक तोक में भूस्खलन की स्थिति सामने आई है। इससे कुछ परिवारों के लिए खतरा पैदा हो गया है। क्षेत्र में रात के समय भी भारी वर्षा होने की सूचना है, जबकि मंगलवार शाम धारचूला, बंगापानी और डीडीहाट तहसील क्षेत्रों में वर्षा जारी थी। फिलहाल सड़क संपर्क बहाल होने से सीमांत क्षेत्र के लोगों को राहत मिली है, लेकिन पहाड़ी से गिरते बोल्डर, भूस्खलन और भूधंसाव के कारण संवेदनशील इलाकों में खतरा पूरी तरह टला नहीं है। ऐसे में बेली ब्रिज का निर्माण पूरा होने और संवेदनशील हिस्सों में सुरक्षा उपाय किए जाने पर स्थानीय लोगों की नजर बनी हुई है।

