उत्तराखंड के सरकारी स्कूलों में कक्षा एक से आठ तक के विद्यार्थियों को गणवेश, जूते और बैग के लिए निर्धारित धनराशि अब तक समय पर नहीं मिल पाई है। गणवेश के लिए 600 रुपये में दो शर्ट और दो पैंट तथा जूतों के लिए निर्धारित राशि में मौजूदा कीमतों के बीच अंतर को लेकर सवाल उठ रहे हैं। विभाग के अनुसार स्कूल बैग और जूतों की राशि जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालयों को दी जा चुकी है, जबकि गणवेश की धनराशि भी जल्द विद्यार्थियों के खातों में भेजने की बात कही गई है।
- सरकारी स्कूलों के बच्चों की ड्रेस का पैसा अब तक अटका
- 600 रुपये में दो पैंट-शर्ट, जूतों के लिए भी तय राशि
- सितंबर बीतने को, विद्यार्थियों को नहीं मिली गणवेश की रकम
- सरकारी स्कूलों के 4.55 लाख बच्चों को डीबीटी का इंतजार
देहरादून। उत्तराखंड के सरकारी विद्यालयों में पढ़ने वाले गरीब और ग्रामीण विद्यार्थियों को गणवेश, जूते और स्कूल बैग उपलब्ध कराने के लिए दी जाने वाली धनराशि को लेकर सवाल उठने लगे हैं। एक ओर विद्यार्थियों के लिए निर्धारित राशि सीमित है, वहीं दूसरी ओर शैक्षिक सत्र की पहली छमाही समाप्त होने को है और कक्षा एक से आठ तक के कई विद्यार्थियों को अभी तक यह धनराशि प्राप्त नहीं हुई है। सरकारी विद्यालयों में पढ़ने वाले कक्षा एक से आठ तक के विद्यार्थियों को गणवेश के लिए प्रति छात्र 600 रुपये दिए जाते हैं।
इस राशि में दो शर्ट और दो पैंट लेना अनिवार्य बताया गया है। ऐसे में मौजूदा बाजार कीमतों को देखते हुए यह सवाल उठ रहा है कि निर्धारित 600 रुपये में विद्यार्थी दो पैंट और दो शर्ट की आवश्यकता किस तरह पूरी कर पाएगा। इसी तरह स्कूल जूतों के लिए निर्धारित राशि भी चर्चा का विषय है। कक्षा एक से पांच तक के विद्यार्थियों के लिए बैग और जूतों के लिए कुल 318 रुपये निर्धारित हैं, जिसमें बैग के लिए 165 रुपये और जूतों के लिए 153 रुपये शामिल हैं। कक्षा छह से आठ तक के विद्यार्थियों के लिए कुल 462 रुपये निर्धारित हैं, जिसमें बैग के लिए 275 रुपये और जूतों के लिए 187 रुपये दिए जाते हैं।
पहली छमाही समाप्त होने को, राशि का इंतजार
शैक्षिक सत्र की पहली छमाही यानी सितंबर माह समाप्त होने में अब कुछ ही दिन शेष हैं। इसके बावजूद कक्षा एक से आठ तक के विद्यार्थियों के खातों में गणवेश, जूते और बैग के लिए निर्धारित धनराशि समय पर नहीं पहुंचने को लेकर चिंता बनी हुई है। प्राथमिक शिक्षक संघ के पदाधिकारियों ने इस मामले को उच्चाधिकारियों के समक्ष उठाते हुए वस्तुस्थिति से अवगत कराया है। उनका कहना है कि सरकारी विद्यालयों में बड़ी संख्या में ऐसे विद्यार्थी पढ़ते हैं जिनके परिवारों के लिए बच्चों की पढ़ाई से जुड़ी अतिरिक्त जरूरतों का खर्च उठाना आसान नहीं होता। ऐसे में सरकार की ओर से दी जाने वाली सहायता समय पर मिलना विद्यार्थियों के लिए महत्वपूर्ण है।
प्रदेश में 4.55 लाख से अधिक विद्यार्थी
उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार उत्तराखंड में प्राथमिक स्तर के 11,580 विद्यालयों में 3,54,041 विद्यार्थी अध्ययनरत हैं। वहीं उच्च प्राथमिक स्तर पर 2,603 विद्यालयों में 1,01,111 विद्यार्थी हैं। इस तरह कक्षा एक से आठ तक के राजकीय विद्यालयों में कुल 4,55,152 विद्यार्थी गणवेश, जूते और बैग के लिए निर्धारित सहायता के दायरे में आते हैं। समग्र शिक्षा की ओर से यह धनराशि विद्यार्थियों के बैंक खातों में डीबीटी (डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर) के माध्यम से भेजी जाती है। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों और उनके परिवारों को स्कूल की आवश्यक सामग्री खरीदने के लिए सीधे आर्थिक सहायता उपलब्ध कराना है।
कितनी मिलती है राशि?
कक्षा एक से आठ तक के विद्यार्थियों को गणवेश के लिए प्रति छात्र 600 रुपये दिए जाते हैं। इसके अलावा कक्षा एक से पांच तक के विद्यार्थियों के लिए स्कूल बैग और जूतों के लिए कुल 318 रुपये निर्धारित हैं। इसमें बैग के लिए 165 रुपये और जूतों के लिए 153 रुपये शामिल हैं। कक्षा छह से आठ तक के विद्यार्थियों के लिए बैग और जूतों के लिए कुल 462 रुपये निर्धारित हैं। इसमें स्कूल बैग के लिए 275 रुपये और जूतों के लिए 187 रुपये दिए जाते हैं।
निर्धारित राशि और बाजार में उपलब्ध वस्तुओं की वास्तविक कीमत के बीच अंतर को लेकर शिक्षक संगठनों और अभिभावकों की ओर से सवाल उठाए जा रहे हैं। खासतौर पर गणवेश के लिए 600 रुपये में दो पैंट और दो शर्ट उपलब्ध कराने की व्यवस्था को लेकर व्यावहारिक कठिनाइयों की बात सामने आ रही है।
विभाग ने जल्द भुगतान का दिया भरोसा
अपर राज्य परियोजना निदेशक, समग्र शिक्षा केएस रावत के अनुसार स्कूल बैग और जूतों के लिए निर्धारित धनराशि जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालयों को दी जा चुकी है। विद्यार्थियों को यह राशि अभी तक क्यों नहीं मिल पाई, इसकी पड़ताल की जाएगी। उन्होंने कहा कि गणवेश की धनराशि भी जल्द विद्यार्थियों के खातों में हस्तांतरित कर दी जाएगी। साथ ही अगले वर्ष से समग्र शिक्षा की धनराशि जारी होने में विलंब न हो, इसके लिए प्रयास किए जाने की बात कही गई है।
सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों के लिए गणवेश, जूते और बैग केवल स्कूल की आवश्यक सामग्री नहीं हैं, बल्कि उनकी नियमित उपस्थिति और विद्यालयी व्यवस्था का भी हिस्सा हैं। ऐसे में सहायता राशि की समयबद्ध उपलब्धता और निर्धारित रकम की मौजूदा बाजार कीमतों के अनुरूप पर्याप्तता, दोनों पहलुओं पर ध्यान देना विद्यार्थियों और उनके परिवारों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

