उत्तराखंड में एमबीबीएस दाखिले के लिए चल रही नीट काउंसलिंग के दौरान पांच अभ्यर्थियों के प्रमाणपत्र संदिग्ध पाए गए, जिसके बाद संबंधित जिला अधिकारियों को इसकी जानकारी दी गई और प्रमाणपत्र रद्द कर दिए गए। मेडिकल एजुकेशन निदेशक डॉ. आशुतोष सयाना के अनुसार नीट काउंसलिंग ऑनलाइन और पारदर्शी तरीके से होती है तथा अभ्यर्थियों की मेरिट और परीक्षा परिणाम आधिकारिक वेबसाइट पर प्रदर्शित किए जाते हैं। उन्होंने बताया कि इन अभ्यर्थियों ने अभी कॉलेज में पढ़ाई शुरू नहीं की थी और भविष्य में काउंसलिंग में लाभ लेने वाले अभ्यर्थियों के प्रमाणपत्र जारी करने वाले प्राधिकरण से भौतिक सत्यापन कराने की व्यवस्था की जाएग।
- उत्तराखंड में MBBS दाखिले के पांच प्रमाणपत्रों पर उठे सवाल
- नीट काउंसलिंग में संदिग्ध प्रमाणपत्र मिले, जिला अधिकारियों को दी गई सूचना
- MBBS दाखिला: पांच अभ्यर्थियों के प्रमाणपत्र रद्द, दूसरे चरण की काउंसलिंग जारी
- मेडिकल एजुकेशन निदेशक बोले- काउंसलिंग ऑनलाइन और पारदर्शी, पांच प्रमाणपत्र मिले संदिग्ध
देहरादून। उत्तराखंड में एमबीबीएस दाखिले के लिए चल रही नीट-यूजी काउंसलिंग के दौरान पांच अभ्यर्थियों के प्रमाणपत्र संदिग्ध पाए गए हैं। मामला सामने आने के बाद संबंधित जिला अधिकारियों को इसकी जानकारी दी गई, जिसके बाद इन प्रमाणपत्रों को रद्द कर दिया गया। मेडिकल एजुकेशन निदेशक डॉ. आशुतोष सयाना ने यह जानकारी देते हुए कहा कि उत्तराखंड में नीट काउंसलिंग पूरी तरह ऑनलाइन और पारदर्शी तरीके से संचालित की जाती है। उनके अनुसार काउंसलिंग प्रक्रिया में अभ्यर्थियों की मेरिट और परीक्षा परिणाम आधिकारिक वेबसाइट पर प्रदर्शित किए जाते हैं। प्रमाणपत्रों की जांच के दौरान पांच अभ्यर्थियों के दस्तावेज संदिग्ध पाए गए। इसके बाद संबंधित अधिकारियों को सूचना देकर प्रमाणपत्र रद्द किए गए।
पांच प्रमाणपत्र मिले संदिग्ध
मेडिकल एजुकेशन निदेशक डॉ. आशुतोष सयाना के अनुसार नीट काउंसलिंग के दौरान अभ्यर्थियों द्वारा प्रस्तुत किए गए दस्तावेजों की प्रक्रिया के तहत जांच की गई। इसी दौरान पांच अभ्यर्थियों के प्रमाणपत्र संदिग्ध पाए गए। मामला सामने आने के बाद इसकी जानकारी संबंधित जिला अधिकारियों को भेजी गई। अधिकारियों की कार्रवाई के बाद इन प्रमाणपत्रों को रद्द कर दिया गया। हालांकि उपलब्ध जानकारी में यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि पांचों प्रमाणपत्रों में किस प्रकार की अनियमितता पाई गई थी।
काउंसलिंग प्रक्रिया ऑनलाइन और पारदर्शी
डॉ. सयाना ने बताया कि उत्तराखंड में नीट काउंसलिंग पूरी तरह ऑनलाइन और पारदर्शी तरीके से होती है। इसमें अभ्यर्थियों की मेरिट और परीक्षा परिणाम आधिकारिक वेबसाइट पर प्रदर्शित किए जाते हैं। काउंसलिंग प्रक्रिया में आरक्षण, डोमिसाइल और अन्य श्रेणियों के आधार पर दाखिले का लाभ लेने वाले अभ्यर्थियों के संबंधित प्रमाणपत्र भी महत्वपूर्ण होते हैं। इसी वजह से प्रमाणपत्रों की वैधता और उनकी पात्रता से संबंधित जांच को दाखिला प्रक्रिया का अहम हिस्सा माना जा रहा है।
अभ्यर्थियों ने अभी कॉलेज में पढ़ाई शुरू नहीं की
मेडिकल एजुकेशन निदेशक के अनुसार शैक्षणिक सत्र अभी शुरू नहीं हुआ है। इसलिए जिन अभ्यर्थियों के प्रमाणपत्र संदिग्ध पाए गए हैं, उन्होंने कॉलेज में पढ़ाई शुरू नहीं की है। उन्होंने बताया कि कॉलेज स्तर पर दाखिले के समय अभ्यर्थियों के प्रमाणपत्रों का भौतिक सत्यापन भी किया जाता है। इससे दाखिले की प्रक्रिया में दस्तावेजों की दोबारा जांच का अवसर मिलता है।
संबंधित जिला अधिकारियों को भेजी गई जानकारी
पांच संदिग्ध प्रमाणपत्रों का मामला सामने आने के बाद संबंधित जिला अधिकारियों को इसकी जानकारी दी गई। इसके बाद प्रमाणपत्रों को रद्द करने की कार्रवाई की गई। मेडिकल शिक्षा विभाग के स्तर पर सामने आई इस कार्रवाई से यह भी स्पष्ट होता है कि काउंसलिंग के दौरान प्रस्तुत दस्तावेजों की जांच की जा रही है। हालांकि उपलब्ध जानकारी के अनुसार इन पांच अभ्यर्थियों के नाम और प्रमाणपत्रों में पाई गई विशिष्ट खामियों का विवरण सार्वजनिक नहीं किया गया है।
दूसरे चरण की काउंसलिंग जारी
डॉ. सयाना के अनुसार फिलहाल नीट काउंसलिंग का दूसरा चरण चल रहा है। ऐसे में दाखिले की प्रक्रिया के साथ अभ्यर्थियों के दस्तावेजों की जांच भी महत्वपूर्ण बनी हुई है। दूसरे चरण में शामिल अभ्यर्थियों के प्रमाणपत्रों की जांच के दौरान किसी प्रकार की अनियमितता सामने आने पर संबंधित प्रमाणपत्र जारी करने वाले प्राधिकरण से सत्यापन कराया जा सकता है।
आगे प्रमाणपत्रों का भौतिक सत्यापन कराने की तैयारी
मेडिकल एजुकेशन निदेशक ने बताया कि आगे से उत्तराखंड की नीट काउंसलिंग से लाभ लेने वाले अभ्यर्थियों के प्रमाणपत्रों को संबंधित प्रमाणपत्र जारी करने वाले प्राधिकरण को भौतिक सत्यापन के लिए भेजा जाएगा। यह व्यवस्था केवल किसी एक विशेष श्रेणी तक सीमित नहीं रहेगी। उनके अनुसार ऐसे अभ्यर्थी चाहे डोमिसाइल या किसी अन्य श्रेणी के आधार पर दाखिला ले रहे हों, उनके संबंधित प्रमाणपत्रों का भौतिक सत्यापन कराया जाएगा।
प्रमाणपत्रों की जांच पर बढ़ा जोर
एमबीबीएस दाखिले की प्रक्रिया में प्रमाणपत्रों की वैधता का सत्यापन महत्वपूर्ण है। पांच प्रमाणपत्र संदिग्ध पाए जाने और रद्द किए जाने के बाद विभाग ने भविष्य की काउंसलिंग प्रक्रिया में प्रमाणपत्रों के भौतिक सत्यापन पर और अधिक जोर देने की तैयारी की है। इस व्यवस्था का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि काउंसलिंग में दाखिला पाने वाले अभ्यर्थियों की ओर से प्रस्तुत प्रमाणपत्र संबंधित सक्षम प्राधिकरण द्वारा जारी किए गए हों और निर्धारित प्रक्रिया के अनुरूप हों। इससे काउंसलिंग प्रक्रिया में दस्तावेजों के सत्यापन को और मजबूत करने की दिशा में कदम उठाया जा सकेगा।

