
राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम के तहत सुधार के प्रयासों के बावजूद स्वच्छ वायु सर्वेक्षण-2026 में काशीपुर और ऋषिकेश की रैंकिंग में गिरावट दर्ज की गई है। काशीपुर की रैंकिंग 18 से गिरकर 21वीं और ऋषिकेश की 14 से 16वीं हो गई है, जिसके बाद पीसीबी ने दोनों शहरों में हवा की गुणवत्ता सुधारने के लिए नए कदमों की तैयारी शुरू की है। काशीपुर में कंस्ट्रक्शन एंड डिमोलिशन वेस्ट प्लांट लगाने के साथ सड़कों की धूल हटाने के लिए मैकेनिकल रोड स्वीपिंग मशीन से सफाई कराने और खनन वाहनों से उड़ने वाली धूल पर पानी का छिड़काव करने की योजना है।
- स्वच्छ वायु सर्वेक्षण में पिछड़े काशीपुर और ऋषिकेश, पीसीबी ने बनाई नई योजना
- काशीपुर-ऋषिकेश की हवा पर बढ़ी चिंता, धूल और मलबे से निपटने की तैयारी
- काशीपुर में लगेगा सीएंडडी वेस्ट प्लांट, सड़कों की मशीन से होगी सफाई
- धूल के कण बने प्रदूषण की बड़ी वजह, मैकेनिकल स्वीपिंग से सफाई की तैयारी
देहरादून। राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम के तहत उत्तराखंड के शहरों में वायु गुणवत्ता सुधारने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन स्वच्छ वायु सर्वेक्षण-2026 के परिणामों में काशीपुर और ऋषिकेश की रैंकिंग में गिरावट ने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (पीसीबी) की चिंता बढ़ा दी है। पिछले वर्षों में वायु गुणवत्ता सुधारने की दिशा में काम होने के बावजूद इस बार दोनों शहरों की रैंकिंग नीचे गई है। इसके बाद पीसीबी ने प्रदूषण के प्रमुख कारणों को कम करने के लिए नई कार्ययोजना तैयार करने पर जोर दिया है।
काशीपुर और ऋषिकेश की रैंकिंग में गिरावट
प्रदेश में राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम के तहत देहरादून, काशीपुर और ऋषिकेश में वायु गुणवत्ता सुधारने के लिए कार्यक्रम चलाया जा रहा है। इन प्रयासों से पिछले वर्षों में सुधार भी दर्ज किया गया था। हालांकि स्वच्छ वायु सर्वेक्षण-2026 में काशीपुर और ऋषिकेश की स्थिति पिछले सर्वेक्षण की तुलना में कमजोर रही। काशीपुर की रैंकिंग 18वीं से गिरकर 21वीं हो गई है, जबकि ऋषिकेश 14वीं रैंक से खिसककर 16वें स्थान पर पहुंच गया है। रैंकिंग में आई इस गिरावट को देखते हुए अब दोनों शहरों में प्रदूषण के प्रमुख स्रोतों पर अधिक प्रभावी तरीके से काम करने की तैयारी है।
धूल के कणों से प्रभावित हो रही हवा
पीसीबी के सदस्य सचिव डॉ. पराग मधुकर धकाते के अनुसार वायु गुणवत्ता पर धूल के कणों का काफी प्रभाव पड़ता है। शहरों में धूल बढ़ने के कई कारण हैं, जिनमें भवनों से निकलने वाला मलबा भी प्रमुख है। निर्माण और भवनों को गिराने के दौरान निकलने वाले मलबे का उचित निस्तारण नहीं होने पर इससे धूल फैलने की समस्या बढ़ सकती है। इसी को ध्यान में रखते हुए कंस्ट्रक्शन एंड डिमोलिशन वेस्ट यानी सीएंडडी वेस्ट के प्रसंस्करण के लिए प्लांट लगाने की दिशा में काम किया जा रहा है।
देहरादून के प्लांट से ऋषिकेश को भी लाभ
पीसीबी के अनुसार देहरादून में कंस्ट्रक्शन एंड डिमोलिशन वेस्ट प्लांट लगाने की योजना पर पहले से काम चल रहा है। इस प्लांट का उपयोग ऋषिकेश के लिए भी किया जाएगा। इससे निर्माण और भवनों को गिराने से निकलने वाले मलबे के व्यवस्थित प्रसंस्करण में मदद मिलने की उम्मीद है। पीसीबी का मानना है कि निर्माण कार्यों और भवनों के मलबे से निकलने वाले धूल कणों को नियंत्रित करने से शहर की वायु गुणवत्ता सुधारने में मदद मिल सकती है।
काशीपुर में भी सीएंडडी वेस्ट प्लांट की तैयारी
कुमाऊं क्षेत्र में काशीपुर के लिए भी इसी तरह के कंस्ट्रक्शन एंड डिमोलिशन वेस्ट प्लांट की योजना बनाई जा रही है। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत काशीपुर में सिर्फ स्थानीय स्तर पर निकलने वाले मलबे को ही नहीं, बल्कि आसपास के अन्य शहरों से आने वाले भवन निर्माण और ध्वस्तीकरण के मलबे को भी प्रसंस्करण के लिए लाया जा सकेगा। इससे निर्माण एवं ध्वस्तीकरण से निकलने वाले मलबे के व्यवस्थित निस्तारण की व्यवस्था विकसित करने में मदद मिलेगी और खुले में मलबा पड़े रहने से होने वाले धूल प्रदूषण को कम करने का प्रयास किया जाएगा।
खनन वाहनों से उड़ने वाली धूल पर भी नजर
काशीपुर में वायु प्रदूषण के एक कारण के रूप में खनन वाहनों से उड़ने वाली धूल को भी देखा जा रहा है। इन वाहनों की आवाजाही के कारण सड़कों और आसपास के क्षेत्रों में धूल के कण बढ़ने की समस्या सामने आती है। पीसीबी की ओर से इस दिशा में भी काम करने की बात कही गई है। धूल को नियंत्रित करने के लिए संबंधित क्षेत्रों में पानी का छिड़काव कराने की योजना है। इसका उद्देश्य सड़कों और आसपास जमा धूल के कणों को हवा में फैलने से कम करना है।
मैकेनिकल रोड स्वीपिंग मशीन से होगी सफाई
सड़कों पर जमा धूल को हटाने के लिए मैकेनिकल रोड स्वीपिंग मशीन के इस्तेमाल की योजना भी तैयार की गई है। अभी राज्य में देहरादून में मैकेनिकल स्वीपिंग मशीन के माध्यम से सड़कों की सफाई की जाती है। यहां यह कार्य रात के समय कराया जाता है। पीसीबी सदस्य सचिव डॉ. पराग मधुकर धकाते के अनुसार अब अन्य शहरों में भी इस तरह की मशीनों के माध्यम से सड़कों की सफाई कराने की योजना है। काशीपुर और ऋषिकेश समेत अन्य शहरों में सड़क की धूल को नियंत्रित करने के लिए यह व्यवस्था उपयोगी मानी जा रही है।
प्रदूषण के स्रोतों पर नियंत्रण पर जोर
स्वच्छ वायु सर्वेक्षण-2026 में रैंकिंग गिरने के बाद पीसीबी का जोर अब केवल प्रदूषण की निगरानी तक सीमित रखने के बजाय उसके प्रमुख स्रोतों पर नियंत्रण करने पर है। निर्माण और ध्वस्तीकरण से निकलने वाला मलबा, सड़कों पर जमा धूल और खनन वाहनों से उड़ने वाले धूल कण ऐसे प्रमुख बिंदु हैं, जिन पर नई कार्ययोजना के तहत काम किया जाएगा। पीसीबी की ओर से तैयार की जा रही इन व्यवस्थाओं का उद्देश्य काशीपुर और ऋषिकेश में वायु गुणवत्ता में सुधार लाना और आने वाले स्वच्छ वायु सर्वेक्षणों में दोनों शहरों की स्थिति बेहतर करना है।






