
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि अमेरिका का होर्मुज जलडमरूमध्य पर लगभग पूरा नियंत्रण है और ईरान की अर्थव्यवस्था पूरी तरह चरमरा रही है। ईरान के खिलाफ अमेरिकी हवाई हमलों और उसके जवाब में ईरानी कार्रवाई के बीच होर्मुज को लेकर तनाव और बढ़ गया है, जिसका असर वैश्विक तेल बाजार पर भी दिखाई दिया। ट्रंप के बयान के बाद कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई और एशियाई शेयर बाजारों में भी दबाव देखने को मिला।
- होर्मुज पर ट्रंप का बड़ा दावा, ईरान को दी खुली चुनौती
- ईरान से टकराव के बीच ट्रंप बोले- होर्मुज पर लगभग पूरा नियंत्रण
- होर्मुज संकट गहराया, कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल
- अमेरिका-ईरान तनाव बढ़ा, ट्रंप के बयान से बाजारों में हलचल
वॉशिंगटन/तेहरान। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर बड़ा दावा किया है। ट्रंप ने कहा है कि अमेरिका का रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य पर लगभग पूरा नियंत्रण है और ईरान की अर्थव्यवस्था पूरी तरह चरमरा रही है। ट्रंप के इस बयान के बाद वैश्विक ऊर्जा बाजार में चिंता बढ़ गई और कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिला।
ट्रंप ने यह बयान ईरान के खिलाफ अमेरिका की ओर से किए गए नए हवाई हमलों के बाद दिया। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर पोस्ट करते हुए उन खबरों को भी खारिज किया, जिनमें दावा किया गया था कि वह ईरान को फिर से बातचीत की मेज पर लाने के लिए दबाव बना रहे हैं। ट्रंप ने कहा कि वह ईरान को किसी समझौते के लिए मजबूर नहीं कर रहे हैं और यदि तेहरान किसी ऐसे समझौते को स्वीकार नहीं करता, जिसे वह अपने लिए खराब या बेकार मानता है, तो उन्हें इसकी चिंता नहीं है।
ट्रंप ने कहा- बातचीत के लिए दबाव नहीं
ट्रंप ने स्पष्ट किया कि मौजूदा परिस्थितियां उनके लिए किसी बातचीत से बेहतर हैं। उन्होंने दावा किया कि अमेरिका का होर्मुज जलडमरूमध्य पर लगभग पूर्ण नियंत्रण है और ईरान की अर्थव्यवस्था तेजी से कमजोर हो रही है। ट्रंप के इस बयान को अमेरिका और ईरान के बीच जारी सैन्य और आर्थिक दबाव की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है। उन्होंने ईरान की जनता को भी सीधे संबोधित करते हुए अपने देश की सरकार के खिलाफ आवाज उठाने का आह्वान किया। ट्रंप ने सवाल किया कि ईरानी जनता कब अपने शासन के खिलाफ उठ खड़ी होगी और संघर्ष करेगी। उनके इस बयान से दोनों देशों के बीच पहले से जारी तनाव और राजनीतिक रूप से भी अधिक तीखा हो गया है।
होर्मुज को लेकर अमेरिका और ईरान के दावे अलग
होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर अमेरिका और ईरान के दावे एक-दूसरे से पूरी तरह अलग हैं। ट्रंप कई बार यह दावा कर चुके हैं कि अमेरिका ने इस रणनीतिक जलमार्ग पर नियंत्रण स्थापित कर लिया है। दूसरी ओर, ईरान लगातार अमेरिकी दावों को खारिज करता रहा है और उसका कहना है कि इस महत्वपूर्ण जलमार्ग पर उसका नियंत्रण बना हुआ है। होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है। फारस की खाड़ी से निकलने वाले तेल और गैस के बड़े हिस्से के परिवहन के लिए इसका इस्तेमाल होता है। यही कारण है कि यहां किसी भी तरह का सैन्य तनाव या जहाजों की आवाजाही में रुकावट का सीधा असर अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतों और दुनिया के ऊर्जा बाजार पर पड़ सकता है।
अमेरिकी हमलों के बाद ईरान की जवाबी कार्रवाई
अमेरिका ने मंगलवार को ईरान के कई ठिकानों को निशाना बनाते हुए हवाई हमले किए। इसके जवाब में ईरान ने भी क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी ठिकानों और परिसंपत्तियों को निशाना बनाया। रिपोर्टों के अनुसार, ईरान की जवाबी कार्रवाई जॉर्डन, बहरीन और इराक में मौजूद अमेरिकी परिसंपत्तियों तक पहुंची। अमेरिका और ईरान के बीच ताजा सैन्य टकराव ऐसे समय में हुआ है, जब दोनों देशों के बीच पहले से ही तनाव काफी बढ़ चुका है। सप्ताहांत में भी दोनों पक्षों के बीच लड़ाई हुई थी। इसके बाद सोमवार को होर्मुज से बाहर निकल रहे दो टैंकरों को लेकर भी स्थिति तनावपूर्ण हो गई।
तेल की कीमतों में तेज उछाल
अमेरिका-ईरान टकराव और होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर बढ़ती अनिश्चितता का असर अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल बाजार पर भी पड़ा। रिपोर्ट के अनुसार, मंगलवार को वैश्विक तेल कीमतों में चार डॉलर प्रति बैरल से अधिक की तेजी आई और कीमतें लगभग पांच सप्ताह के उच्च स्तर तक पहुंच गईं। ब्रेंट क्रूड की कीमत 96 डॉलर प्रति बैरल के पार जाने की बात भी सामने आई। ऊर्जा बाजार में तेजी की प्रमुख वजह होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल की आपूर्ति को लेकर बढ़ती चिंता मानी जा रही है। यदि इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग से तेल टैंकरों की आवाजाही लंबे समय तक बाधित होती है, तो वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की उपलब्धता पर दबाव बढ़ सकता है। इससे तेल आयात पर निर्भर देशों के लिए आर्थिक चुनौतियां भी बढ़ सकती हैं।
एशियाई शेयर बाजारों पर भी असर
तेल की कीमतों में अचानक तेजी और अमेरिका-ईरान संघर्ष के और गहराने की आशंका का असर एशियाई वित्तीय बाजारों पर भी दिखाई दिया। जापान, दक्षिण कोरिया और हांगकांग के शेयर बाजारों में निवेशकों के बीच चिंता बढ़ी। वैश्विक बाजारों में आमतौर पर भू-राजनीतिक तनाव बढ़ने पर निवेशक जोखिम वाली परिसंपत्तियों से दूरी बनाने लगते हैं। होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर जारी तनाव ने बाजारों की चिंता इसलिए भी बढ़ाई है क्योंकि यह केवल अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य विवाद का विषय नहीं है, बल्कि वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति से सीधे जुड़ा हुआ है।
ईरान ने दी तेल निर्यात को लेकर चेतावनी
ईरान की ओर से भी होर्मुज को लेकर कड़ा रुख अपनाया गया है। इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स यानी आईआरजीसी ने कहा है कि अमेरिकी हमलों से रणनीतिक जलमार्ग पर उसकी पकड़ और मजबूत होगी। ईरानी अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि तेहरान को फारस की खाड़ी के रास्ते तेल निर्यात करने से रोका गया, तो किसी अन्य देश को भी इस मार्ग से तेल निर्यात करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। ईरान की इस चेतावनी ने वैश्विक ऊर्जा बाजार में चिंता और बढ़ा दी है। अंतरराष्ट्रीय बाजार पहले से ही युद्ध और भू-राजनीतिक तनाव के कारण अस्थिर है। ऐसे में होर्मुज से जुड़ी किसी भी गंभीर बाधा का प्रभाव तेल की कीमतों से आगे बढ़कर परिवहन, ऊर्जा लागत और महंगाई पर भी पड़ सकता है।
ट्रंप ने युद्धविराम की संभावना भी खारिज की
ट्रंप ने ईरान के साथ एक और युद्धविराम की संभावना को भी खारिज किया है। उनका कहना है कि तेहरान के साथ किया गया पिछला समझौता उस कागज के भी लायक नहीं था, जिस पर वह लिखा गया था। ट्रंप ने दावा किया कि ईरान को पहले भी कई मौके दिए जा चुके हैं। अमेरिका और ईरान के बीच मौजूदा टकराव से पहले भी दोनों देशों के बीच तनाव कई महीनों तक बढ़ता रहा था। जून में दोनों पक्षों के बीच एक समझौता हुआ था, लेकिन वह ज्यादा समय तक कायम नहीं रह सका। इसके बाद सैन्य तनाव दोबारा बढ़ गया। होर्मुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण भी दोनों पक्षों के बीच विवाद का एक प्रमुख मुद्दा रहा है।
होर्मुज संकट से बढ़ी वैश्विक चिंता
मौजूदा घटनाक्रम ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि यदि अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष और बढ़ता है तो वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर इसका कितना व्यापक असर पड़ेगा। होर्मुज जलडमरूमध्य की रणनीतिक स्थिति इसे केवल क्षेत्रीय विवाद का हिस्सा नहीं रहने देती, बल्कि इसका प्रभाव दुनिया के तेल बाजारों तक पहुंच जाता है। फिलहाल अमेरिका होर्मुज पर लगभग पूर्ण नियंत्रण का दावा कर रहा है, जबकि ईरान इन दावों को स्वीकार नहीं करता। दोनों पक्षों के बीच सैन्य कार्रवाई जारी रहने और तेल टैंकरों की आवाजाही को लेकर अनिश्चितता के कारण आने वाले दिनों में अंतरराष्ट्रीय बाजारों की नजर इस क्षेत्र पर बनी रहेगी। संघर्ष यदि और बढ़ता है तो तेल की कीमतों, समुद्री परिवहन और वैश्विक शेयर बाजारों पर दबाव और बढ़ने की आशंका बनी हुई है।








