
अटल उत्कृष्ट स्कूलों में पांच साल के लिए तैनात किए गए कुछ शिक्षकों का महज दो महीने बाद ही तबादला किए जाने से शिक्षा विभाग के फैसले पर सवाल उठ रहे हैं। शिक्षकों का आरोप है कि तबादलों में सुगम-दुर्गम का आधार नहीं अपनाया गया और काउंसलिंग भी नहीं कराई गई, जिससे लंबे समय से दुर्गम क्षेत्रों में सेवा दे रहे शिक्षकों को लाभ नहीं मिल सका। कुछ तबादला आदेशों में पत्नी की बीमारी को आधार बताए जाने को लेकर भी सवाल उठे हैं और इसे लिपिकीय त्रुटि या किसी अन्य कारण से जोड़कर जांच की मांग की जा रही है।
- अटल उत्कृष्ट स्कूलों में शिक्षकों के तबादलों पर उठे सवाल
- पांच साल की तैनाती का दावा, दो महीने में ही बदल दी शिक्षकों की तैनाती
- तबादलों में न काउंसलिंग हुई, न मानक सार्वजनिक, शिक्षकों में नाराजगी
- 20 साल से दुर्गम में तैनात शिक्षक रह गए वंचित, तबादलों पर सवाल
देहरादून। उत्तराखंड के अटल उत्कृष्ट स्कूलों में शिक्षकों की तैनाती और उसके बाद किए गए तबादलों को लेकर शिक्षा विभाग के फैसले पर सवाल उठने लगे हैं। प्रदेश के इन स्कूलों में शिक्षकों को सामान्य तौर पर पांच साल के लिए तैनात किया जाता है, लेकिन हाल ही में जिन शिक्षकों की तैनाती अटल उत्कृष्ट स्कूलों में की गई थी, उनमें से कुछ का महज दो महीने बाद ही तबादला कर दिया गया। इससे विभागीय प्रक्रिया और तबादला नीति को लेकर शिक्षकों में नाराजगी है।
शिक्षकों का कहना है कि अटल उत्कृष्ट स्कूलों में तैनाती के लिए निर्धारित अवधि और प्रक्रिया को ध्यान में रखते हुए शिक्षकों को वहां काम करने का पर्याप्त अवसर मिलना चाहिए। ऐसे में तैनाती के कुछ ही समय बाद तबादला किए जाने से विभाग के फैसले पर सवाल खड़े होना स्वाभाविक है। खासतौर पर तब, जब अनुरोध के आधार पर किए गए तबादलों में सभी शिक्षकों के लिए समान मानक अपनाए जाने को लेकर स्पष्टता नहीं है।
पांच साल की तैनाती, दो महीने में तबादला
प्रदेश के अटल उत्कृष्ट स्कूलों में शिक्षकों की तैनाती पांच वर्ष की अवधि के लिए की जाती है। हालिया तबादलों में ऐसे भी शिक्षक शामिल हैं, जिन्हें करीब दो महीने पहले ही इन विद्यालयों में तैनात किया गया था। अब इतनी कम अवधि में उनके तबादले किए जाने से दूसरे शिक्षक भी सवाल उठा रहे हैं। शिक्षकों का कहना है कि यदि किसी शिक्षक को पांच वर्ष के लिए अटल उत्कृष्ट स्कूल में तैनात किया गया है तो महज दो महीने बाद उसका तबादला करने के पीछे स्पष्ट और पारदर्शी कारण होना चाहिए। उनका आरोप है कि मौजूदा प्रक्रिया में इस संबंध में पर्याप्त पारदर्शिता नहीं दिखाई गई।
सुगम-दुर्गम का आधार नहीं अपनाने का आरोप
तबादलों को लेकर शिक्षकों की सबसे बड़ी आपत्ति यह है कि इसमें सुगम और दुर्गम क्षेत्रों में सेवा की अवधि को पर्याप्त महत्व नहीं दिया गया। शिक्षकों के अनुसार, ऐसे कई शिक्षक हैं जो लंबे समय से दुर्गम क्षेत्रों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं, लेकिन उन्हें इस तबादला प्रक्रिया में अपेक्षित लाभ नहीं मिला। बताया जा रहा है कि कुछ शिक्षक करीब 20 वर्षों से दुर्गम क्षेत्रों में तैनात हैं। उनका कहना है कि यदि तबादलों में सेवा अवधि और सुगम-दुर्गम क्षेत्र को आधार बनाया जाता तो लंबे समय से दुर्गम में सेवा दे रहे शिक्षकों को प्राथमिकता मिल सकती थी।
काउंसलिंग नहीं होने पर भी सवाल
शिक्षकों ने तबादला प्रक्रिया में काउंसलिंग नहीं किए जाने पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि यदि तबादले अनुरोध के आधार पर किए जा रहे हैं तो पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए संबंधित शिक्षकों के सामने मानक स्पष्ट किए जाने चाहिए थे। इसके अलावा तबादलों के लिए अपनाए गए मानकों को भी सार्वजनिक नहीं किया गया। इससे शिक्षकों के बीच यह असमंजस बना हुआ है कि आखिर किन आधारों पर कुछ शिक्षकों के तबादले किए गए और किन्हें यथावत रखा गया।
तबादला आदेश में पत्नी की बीमारी का उल्लेख
तबादला आदेशों से जुड़ा एक और मामला भी चर्चा में है। कुछ शिक्षिकाओं के तबादले का आधार पत्नी की बीमारी लिखा गया है। शिक्षकों का कहना है कि यह केवल एक मामले तक सीमित नहीं है, बल्कि तीन से चार शिक्षिकाओं के नाम और उनके स्कूल के आगे भी पत्नी की बीमारी का उल्लेख किया गया है। इसको लेकर सवाल उठाया जा रहा है कि क्या यह केवल लिपिकीय त्रुटि है या इसके पीछे कोई अन्य वजह है। शिक्षकों का कहना है कि आदेशों में इस तरह की समान त्रुटि सामने आना जांच का विषय है। यदि यह केवल कार्यालयी या टंकण संबंधी गलती है तो विभाग को इसे स्पष्ट करना चाहिए, ताकि तबादला प्रक्रिया को लेकर भ्रम की स्थिति समाप्त हो सके।
शिक्षकों में बढ़ रही नाराजगी
अटल उत्कृष्ट स्कूलों के शिक्षकों के तबादलों को लेकर उठ रहे सवालों के बीच शिक्षा विभाग की तबादला प्रक्रिया पर पारदर्शिता को लेकर चर्चा तेज हो गई है। शिक्षकों की मांग है कि तबादलों में अपनाए गए मानकों को सार्वजनिक किया जाए और यह स्पष्ट किया जाए कि किन परिस्थितियों में दो महीने पहले तैनात किए गए शिक्षकों का स्थानांतरण किया गया। शिक्षकों का कहना है कि यदि तबादलों में सेवा अवधि, सुगम-दुर्गम क्षेत्र, अनुरोध की प्राथमिकता और अन्य निर्धारित मानकों को समान रूप से लागू किया जाता तो विवाद की स्थिति पैदा नहीं होती। वहीं, लंबे समय से दुर्गम क्षेत्रों में सेवा दे रहे शिक्षकों को भी उम्मीद है कि विभाग उनकी सेवा अवधि और परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए भविष्य की तबादला प्रक्रिया में उचित अवसर देगा।





