
धामी कैबिनेट ने उत्तराखंड पूर्व सैनिक कल्याण निगम (उपनल) के माध्यम से कार्यरत सात हजार से अधिक कर्मचारियों के भविष्य को सुरक्षित करने वाले प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। बिना स्वीकृत पदों पर कार्यरत कर्मचारियों को नियुक्ति की तिथि से नियोजित माना जाएगा और सेवा में व्यवधान होने पर भी समान काम के लिए समान वेतन का लाभ मिलेगा। समान वेतन की व्यवस्था अलग-अलग नियुक्ति अवधि के आधार पर तीन चरणों में लागू की जाएगी, जिसकी कार्रवाई नवंबर 2026 और अप्रैल 2027 से शुरू होगी।
- धामी कैबिनेट का बड़ा फैसला, उपनल कर्मचारियों को मिलेगी सेवा सुरक्षा
- उपनल कर्मियों को बड़ी राहत, नियुक्ति की तारीख से नियोजित होंगे कर्मचारी
- समान काम के लिए समान वेतन का रास्ता साफ, हजारों उपनल कर्मियों को लाभ
- उपनल कर्मचारियों के हित में बड़ा निर्णय, सेवा में व्यवधान पर भी मिलेगा समान वेतन
देहरादून। उत्तराखंड में उत्तराखंड पूर्व सैनिक कल्याण निगम (उपनल) के माध्यम से विभिन्न विभागों में कार्यरत हजारों कर्मचारियों के लिए धामी सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में सात हजार से अधिक उपनल कर्मचारियों के भविष्य को सुरक्षित करने वाले प्रस्ताव को मंजूरी दी गई है। सरकार के इस फैसले से बिना स्वीकृत पदों पर कार्य कर रहे कर्मचारियों को भी बड़ी राहत मिलने का रास्ता साफ हुआ है।
कैबिनेट के फैसले के मुताबिक ऐसे उपनल कर्मचारी जो विभिन्न विभागों में बिना स्वीकृत पदों के कार्यरत हैं, उन्हें नियुक्ति की तिथि से नियोजित माना जाएगा। इसके साथ ही कर्मचारियों को समान काम के लिए समान वेतन का लाभ देने की प्रक्रिया भी तय की गई है। सरकार ने इस व्यवस्था को कर्मचारियों की नियुक्ति अवधि के आधार पर तीन चरणों में लागू करने का निर्णय लिया है।
तीन चरणों में मिलेगा समान काम, समान वेतन का लाभ
कैबिनेट में रखे प्रस्ताव के अनुसार समान काम के लिए समान वेतन का लाभ कर्मचारियों को तीन चरणों में दिया जाएगा। पहले चरण में एक जनवरी 2016 से पहले नियुक्त उपनल कर्मचारियों को शामिल किया गया है। वहीं दूसरे चरण में एक जनवरी 2016 से 12 नवंबर 2018 तक नियोजित कर्मचारियों के समान काम के लिए समान वेतन के मामले पर विचार किया जाएगा। इस संबंध में कार्रवाई नौ नवंबर 2026 से शुरू की जाएगी। तीसरे चरण में 13 नवंबर 2018 से 15 अक्तूबर 2024 तक नियोजित कर्मचारियों को समान कार्य के लिए समान वेतन देने की कार्रवाई की जाएगी। इस चरण की प्रक्रिया एक अप्रैल 2027 से शुरू होगी। इस व्यवस्था से लंबे समय से अलग-अलग विभागों में उपनल के माध्यम से काम कर रहे कर्मचारियों को उनके कार्य और नियुक्ति अवधि के आधार पर वेतन संबंधी लाभ मिलने की उम्मीद है।
सेवा में व्यवधान होने पर भी मिलेगा समान वेतन
सरकार के फैसले की एक महत्वपूर्ण बात यह है कि यदि किसी कर्मचारी की सेवा में किसी कारण से व्यवधान आया है, तो केवल इस आधार पर उसे समान काम के लिए समान वेतन के लाभ से वंचित नहीं किया जाएगा। कैबिनेट के निर्णय में ऐसे कर्मचारियों के हितों को भी ध्यान में रखा गया है। इससे उन कर्मचारियों को राहत मिलने की उम्मीद है जिनकी सेवाओं में बीच में किसी कारण से निरंतरता प्रभावित हुई है, लेकिन वे दोबारा उपनल के माध्यम से विभागों में कार्यरत रहे हैं।
निरंतर नियोजित रहने की शर्त हटाई
कैबिनेट के फैसले में सैनिक कल्याण विभाग के 20 फरवरी 2026 के शासनादेश में उल्लिखित निरंतर नियोजित रहने की शर्त को भी हटाने का निर्णय लिया गया है। इसका सीधा लाभ उन उपनल कर्मचारियों को मिलेगा जो एक जनवरी 2016 से पहले से कार्यरत हैं और वर्तमान में भी सेवा में हैं। ऐसे कर्मचारियों को न्यूनतम वेतन और महंगाई भत्ते का लाभ देने की व्यवस्था की गई है। यह लाभ तीन फरवरी 2026 को जारी संशोधित शासनादेश के तहत दिया जाएगा।
स्वीकृत पद के सापेक्ष नियोजित माने जाएंगे कर्मचारी
सरकार ने यह भी व्यवस्था की है कि यदि किसी विभाग में सृजित और स्वीकृत पदों के विपरीत उपनल कर्मचारी कार्यरत हैं, तो उन्हें नियुक्ति की तिथि से स्वीकृत पदों के सापेक्ष नियोजित माना जाएगा। वहीं, जिन कर्मचारियों के लिए तत्काल स्वीकृत पद उपलब्ध नहीं हैं, उन्हें स्वीकृत पद के सापेक्ष कार्ययोजित किए जाने तक उसी विभाग में सीधी भर्ती के पद के सापेक्ष वेतनमान के आधार पर कार्ययोजित किया जा सकेगा। इसके लिए संबंधित कर्मचारी के पास उस पद के लिए निर्धारित न्यूनतम शैक्षिक एवं अन्य आवश्यक अर्हता होना जरूरी होगा।
पद उपलब्ध नहीं होने पर अधिसंख्य पदों का होगा सृजन
सरकार ने पदों की कमी की स्थिति से निपटने के लिए भी व्यवस्था तय की है। यदि किसी कर्मचारी के नियोजन के लिए स्वीकृत पद उपलब्ध नहीं होता है तो अधिसंख्य पदों का सृजन और समायोजन कराया जाएगा। इसके लिए एक अलग व्यवस्था समिति गठित की जाएगी। समिति इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाने और कर्मचारियों के नियोजन से संबंधित आवश्यक व्यवस्थाओं को पूरा करने में भूमिका निभाएगी।
पूर्व उपनल कर्मचारियों को भी राहत
कैबिनेट के निर्णय में प्रत्यक्ष अनुबंध पर कार्य कर चुके पूर्व उपनल कर्मचारियों को भी राहत दी गई है। उच्च न्यायालय के आदेशों के क्रम में प्रत्यक्ष अनुबंध पर कार्यरत रहे पूर्व उपनल कर्मचारियों को वेतनमान का न्यूनतम और परिवर्तनीय महंगाई भत्ता देने की व्यवस्था की गई है। कुल मिलाकर धामी कैबिनेट का यह फैसला उपनल के माध्यम से विभिन्न सरकारी विभागों में लंबे समय से कार्यरत हजारों कर्मचारियों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सेवा में व्यवधान, स्वीकृत पदों की कमी और समान काम के लिए समान वेतन जैसे मामलों में सरकार की ओर से स्पष्ट व्यवस्था किए जाने से कर्मचारियों की नौकरी और वेतन संबंधी अनिश्चितता कम होने की उम्मीद है।





