
लालपुल क्षेत्र में एक तेज रफ्तार सिटी बस ने सड़क किनारे खड़े दिहाड़ी मजदूरों को कुचल दिया, जिसमें कई श्रमिक गंभीर रूप से घायल हो गए और एक की मौत हो गई। हादसे के बाद घायल मजदूर लंबे समय तक सड़क पर तड़पते रहे, जबकि कई वाहन चालक मदद के लिए नहीं रुके। पुलिस और स्थानीय लोगों के प्रयास से घायलों को अस्पताल पहुंचाया गया।
- खून से लथपथ सड़क पर तड़पते रहे मजदूर, मदद को नहीं रुके वाहन
- लालपुल में बड़ा हादसा, बस की चपेट में आए कई दिहाड़ी श्रमिक
- मजदूरी का इंतजार कर रहे श्रमिकों पर टूटा कहर, मची चीख-पुकार
- एंबुलेंस में देरी, पुलिस ने ई-रिक्शा से पहुंचाए घायल अस्पताल
देहरादून। राजधानी देहरादून के लालपुल क्षेत्र में सोमवार को हुआ दर्दनाक सड़क हादसा कई परिवारों की खुशियां छीन गया। रोज की तरह सुबह-सुबह दिहाड़ी मजदूर रोजगार की उम्मीद लेकर सड़क किनारे खड़े थे, लेकिन कुछ ही क्षणों में एक बेकाबू सिटी बस उनके लिए काल बनकर टूट पड़ी। हादसे में एक मजदूर की मौत हो गई, जबकि कई अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। घटना के बाद पूरे क्षेत्र में अफरा-तफरी और चीख-पुकार का माहौल बन गया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार लालपुल क्षेत्र में रोजाना बड़ी संख्या में मजदूर सुबह छह से सात बजे के बीच एकत्रित होते हैं।
यहां ठेकेदार और आम लोग मजदूरी के लिए श्रमिकों को अपने साथ ले जाते हैं। सोमवार को भी कई मजदूर काम मिलने की उम्मीद में सड़क किनारे खड़े थे। अधिकांश मजदूर सुबह ही काम पर जा चुके थे, जबकि कुछ लोग अब भी रोजगार की प्रतीक्षा कर रहे थे। इसी दौरान करीब 11 बजे तेज रफ्तार सिटी बस अचानक नियंत्रण खो बैठी और मजदूरों के समूह में घुस गई। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि बस की गति इतनी अधिक थी कि मजदूरों को संभलने या बचने का अवसर तक नहीं मिला। देखते ही देखते कई लोग सड़क पर गिर पड़े और घटनास्थल खून से लाल हो गया। लोगों का कहना है कि यदि यह हादसा सुबह के समय होता, जब वहां लगभग 250 मजदूर मौजूद रहते हैं, तो जनहानि कहीं अधिक हो सकती थी।
हादसे के बाद घटनास्थल पर दर्दनाक दृश्य देखने को मिले। घायल मजदूर सड़क पर पड़े कराहते रहे और मदद के लिए गुहार लगाते रहे। स्थानीय लोग तुरंत उनकी सहायता के लिए आगे आए, लेकिन सबसे बड़ी चुनौती घायलों को अस्पताल पहुंचाने की थी। एंबुलेंस के पहुंचने में देरी होने के कारण लोगों ने गुजर रहे वाहनों को रोकने का प्रयास किया, लेकिन कई वाहन चालक घायल मजदूरों को देखकर भी नहीं रुके। स्थानीय लोगों के अनुसार कई वाहन चालकों ने रुकने से साफ इनकार कर दिया, जिससे लोगों में नाराजगी फैल गई। बाद में पुलिस ने मौके पर पहुंचकर स्थिति संभाली और सख्ती दिखाते हुए ई-रिक्शा तथा अन्य वाहनों को रुकवाया।
इसके बाद घायलों को तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि यदि समय पर अस्पताल पहुंचाने की व्यवस्था हो जाती तो कुछ घायलों की स्थिति और बेहतर हो सकती थी। घटना के बाद लालपुल क्षेत्र में भारी भीड़ जमा हो गई। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर यातायात व्यवस्था संभाली और राहत एवं बचाव कार्य शुरू कराया। हादसे के कारण कुछ समय तक यातायात भी प्रभावित रहा। आसपास के लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि इस क्षेत्र में श्रमिकों की सुरक्षा के लिए विशेष इंतजाम किए जाएं, क्योंकि रोजाना बड़ी संख्या में मजदूर यहां रोजगार की तलाश में जुटते हैं।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि राजधानी में मजदूरों की सुरक्षा एक गंभीर मुद्दा बनती जा रही है। सड़क किनारे खड़े होकर काम का इंतजार करने वाले श्रमिक अक्सर दुर्घटनाओं के खतरे के बीच रहते हैं। ऐसे में प्रशासन को उनके लिए सुरक्षित प्रतीक्षा स्थल विकसित करने और यातायात नियंत्रण के प्रभावी उपाय करने की आवश्यकता है। इस दर्दनाक हादसे ने न केवल श्रमिकों की असुरक्षा को उजागर किया है, बल्कि सड़क पर घायल लोगों की मदद करने के प्रति समाज की संवेदनहीनता पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। सड़क पर तड़पते मजदूरों को देखकर भी कई वाहन चालकों का आगे बढ़ जाना लोगों को झकझोर गया। फिलहाल पुलिस हादसे के कारणों की जांच कर रही है और संबंधित वाहन चालक के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई की जा रही है।





