
भूमि संबंधी कथित अनियमितताओं और सरकारी जमीनों के हस्तांतरण के मामलों को लेकर कांग्रेस ने प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल के नेतृत्व में सचिवालय कूच किया। सचिवालय के निकट पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को बैरिकेडिंग लगाकर रोक दिया, जिसके बाद नारेबाजी, धरना और पुलिस से नोकझोंक हुई। पुलिस ने गणेश गोदियाल समेत कई कांग्रेस नेताओं को हिरासत में लिया, जिन्हें बाद में रिहा कर दिया गया।
- बैरिकेडिंग पर चढ़े कांग्रेसी, सचिवालय के बाहर हुआ जोरदार प्रदर्शन
- जल-जंगल-जमीन के मुद्दे पर कांग्रेस का शक्ति प्रदर्शन
- पुलिस और कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच धक्का-मुक्की, कई नेता हिरासत में
- भूमि घोटालों के आरोपों को लेकर कांग्रेस का सरकार पर हमला
देहरादून। उत्तराखंड में भूमि से जुड़े विभिन्न विवादों और कथित अनियमितताओं के खिलाफ कांग्रेस ने सोमवार को राजधानी देहरादून में जोरदार शक्ति प्रदर्शन किया। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल के नेतृत्व में पार्टी कार्यकर्ताओं और नेताओं ने कांग्रेस मुख्यालय से सचिवालय तक मार्च निकाला। इस दौरान कांग्रेस नेताओं ने राज्य सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए भूमि आवंटन, सरकारी जमीनों के हस्तांतरण और लैंड बैंक नीति से जुड़े मामलों में जवाबदेही की मांग उठाई। प्रदर्शनकारी राजपुर रोड से होते हुए सचिवालय की ओर बढ़ रहे थे। जैसे ही जुलूस सुभाष रोड पर सचिवालय के समीप पहुंचा, पुलिस ने सुरक्षा कारणों से बैरिकेडिंग लगाकर उन्हें आगे बढ़ने से रोक दिया।
पुलिस की रोक के बावजूद कांग्रेस कार्यकर्ता वहीं डटे रहे और सरकार विरोधी नारे लगाने लगे। इस दौरान प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल समेत कई वरिष्ठ नेता बैरिकेडिंग पर चढ़ गए और सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन तेज कर दिया। स्थिति तब और तनावपूर्ण हो गई जब प्रदर्शनकारी सड़क पर बैठकर धरने पर बैठ गए। पुलिस अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों से धरना समाप्त कर निर्धारित स्थान पर जाने का आग्रह किया, लेकिन कांग्रेस नेता अपनी मांगों पर अड़े रहे। इसके बाद पुलिस और कार्यकर्ताओं के बीच तीखी नोकझोंक हुई। कुछ समय के लिए धक्का-मुक्की की स्थिति भी बनी रही, जिससे क्षेत्र में तनाव का माहौल बन गया।
पुलिस ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए कार्रवाई करते हुए गणेश गोदियाल सहित कई कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं को हिरासत में ले लिया। सभी को पुलिस लाइन ले जाया गया, जहां आवश्यक कार्रवाई के बाद उन्हें रिहा कर दिया गया। हिरासत में लिए जाने के दौरान भी कांग्रेस कार्यकर्ता सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते रहे। प्रदर्शन को संबोधित करते हुए गणेश गोदियाल ने कहा कि पिछले एक दशक में राज्य में भूमि से जुड़े कई ऐसे मामले सामने आए हैं, जिन्होंने शासन और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि विभिन्न सरकारी विभागों और निगमों की भूमि के उपयोग और हस्तांतरण को लेकर पारदर्शिता का अभाव दिखाई देता है, जिससे जनता के बीच अविश्वास की स्थिति पैदा हुई है।
गोदियाल ने कहा कि हरिद्वार नगर निगम की भूमि खरीद प्रकरण की जांच में अनियमितताओं की पुष्टि होने और अधिकारियों पर कार्रवाई के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि भूमि संबंधी मामलों में कठोर निगरानी और जवाबदेही की आवश्यकता है। उन्होंने मसूरी के जॉर्ज एवरेस्ट क्षेत्र की भूमि, डाकपत्थर में जल विद्युत निगम की भूमि के हस्तांतरण और रामगढ़ क्षेत्र में सरकारी भूमि के कथित हस्तांतरण जैसे मामलों का भी उल्लेख किया। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने उत्तराखंड निवेश एवं अवसंरचना विकास बोर्ड (यूआईआईडीबी) द्वारा विकसित किए जा रहे लैंड बैंक को लेकर भी चिंता जताई। उनका कहना था कि राजस्व, पर्यटन, कृषि, उद्यान, सिडकुल और ऊर्जा निगमों की भूमि को एकत्रित कर भविष्य में निजी हितों के लिए इस्तेमाल किए जाने की आशंकाओं को लेकर जनता चिंतित है।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस राज्य की जल, जंगल और जमीन की रक्षा के लिए लगातार संघर्ष करती रहेगी और किसी भी प्रकार के समझौते को स्वीकार नहीं करेगी। प्रदर्शन में कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता और पदाधिकारी शामिल रहे। इनमें प्रदेश उपाध्यक्ष सूर्यकांत धस्माना, नवीन जोशी, विरेंद्र पोखरियाल, गोदावरी थापली, पूर्व विधायक राजकुमार, गरिमा महरा दसौनी, महिला कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ज्योति रौतेला, लालचंद शर्मा और महेंद्र नेगी सहित बड़ी संख्या में कार्यकर्ता मौजूद रहे। राजधानी में हुए इस प्रदर्शन को कांग्रेस ने जनता के हितों और राज्य की भूमि संपदा की सुरक्षा के लिए चलाए जा रहे अभियान का हिस्सा बताया है। वहीं, राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आगामी समय में भूमि और संसाधनों से जुड़े मुद्दे उत्तराखंड की राजनीति में प्रमुख विषय बने रह सकते हैं।





