
महाराष्ट्र की राजनीति में बड़ा उलटफेर करते हुए शिवसेना (यूबीटी) के छह सांसद एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में शामिल हो गए हैं। इस घटनाक्रम के बाद शिंदे गुट ने अपनी ताकत बढ़ने का दावा किया है, जबकि उद्धव ठाकरे खेमे में नई टूट की आशंकाएं गहरा गई हैं। दलबदल को लेकर दोनों पक्षों के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं।
- महाराष्ट्र की राजनीति में भूचाल, उद्धव गुट में बड़ी टूट
- ऑपरेशन टाइगर को मिली रफ्तार, शिंदे खेमे की ताकत बढ़ी
- छह सांसदों के दलबदल से उद्धव ठाकरे पर बढ़ा दबाव
- आदित्य ठाकरे का पलटवार, बोले- जनादेश के साथ हुआ विश्वासघात
मुंबई। महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर बड़ा राजनीतिक भूचाल देखने को मिला है। शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) को अब तक का सबसे बड़ा झटका देते हुए उसके छह मौजूदा सांसदों ने पार्टी छोड़कर उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना का दामन थाम लिया है। इस घटनाक्रम ने राज्य की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है और शिवसेना (यूबीटी) के भविष्य को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। राजनीतिक गलियारों में इस घटनाक्रम को शिंदे गुट के तथाकथित “ऑपरेशन टाइगर” की बड़ी सफलता माना जा रहा है। छह सांसदों के शामिल होने के बाद शिंदे खेमे का उत्साह चरम पर है, जबकि उद्धव ठाकरे गुट के भीतर असंतोष और संभावित टूट की चर्चाएं तेज हो गई हैं।
इस राजनीतिक घटनाक्रम के बीच शिवसेना सांसद डॉ. श्रीकांत शिंदे ने विपक्ष को खुली चेतावनी देते हुए संकेत दिया है कि आने वाले दिनों में और भी बड़े राजनीतिक बदलाव देखने को मिल सकते हैं। पत्रकारों से बातचीत में श्रीकांत शिंदे ने कहा कि पिछले चार वर्षों से लगातार राजनीतिक झटके दिए जा रहे हैं और यह सिलसिला अभी थमने वाला नहीं है। उन्होंने कहा कि यह तो केवल शुरुआत है और आगे भी कई बड़े राजनीतिक घटनाक्रम सामने आएंगे। उनके बयान को उद्धव ठाकरे गुट के लिए स्पष्ट राजनीतिक संदेश के रूप में देखा जा रहा है। शिंदे गुट में शामिल होने वाले सांसदों में संजय हरिभाऊ जाधव, भाऊसाहेब राजाराम वाकचौरे, ओमप्रकाश भूपालसिंह निंबालकर, संजय दीना पाटिल, संजय उत्तमराव देशमुख और नागेश बापूराव पाटिल अष्टिकर शामिल हैं। इन नेताओं के शामिल होने से संसद में शिंदे गुट की स्थिति और मजबूत होने की संभावना जताई जा रही है।
सूत्रों के अनुसार, इन सांसदों ने औपचारिक रूप से शिंदे गुट में शामिल होने से पहले मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के साथ कई दौर की गोपनीय बैठकों में हिस्सा लिया था। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि यह पूरी प्रक्रिया लंबे समय से चल रही थी और अब इसका परिणाम सामने आया है। मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने नए सांसदों का स्वागत करते हुए कहा कि उनकी पार्टी लगातार मजबूत हो रही है। उन्होंने नए साथियों को पार्टी की ताकत बताते हुए कहा कि संगठन में अब कई नए नेतृत्वकर्ता जुड़े हैं, जो पार्टी को और मजबूत बनाएंगे। उनके बयान से यह स्पष्ट संकेत मिला कि शिंदे गुट आने वाले समय में और विस्तार की रणनीति पर काम कर रहा है। दूसरी ओर, शिवसेना (यूबीटी) ने इस दलबदल को जनता के विश्वास और जनादेश के साथ धोखा बताया है।
पार्टी नेता आदित्य ठाकरे ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि इन सांसदों की जीत महाविकास आघाड़ी और इंडिया गठबंधन के संयुक्त प्रयासों का परिणाम थी। उन्होंने आरोप लगाया कि निजी राजनीतिक हितों के लिए पार्टी छोड़ना मतदाताओं के विश्वास का अपमान है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस घटनाक्रम से महाराष्ट्र की राजनीति में शक्ति संतुलन पर असर पड़ सकता है। लोकसभा और राज्य की राजनीति दोनों में शिंदे गुट की स्थिति पहले से अधिक मजबूत दिखाई दे रही है, जबकि उद्धव ठाकरे के सामने संगठन को एकजुट बनाए रखने की चुनौती और बढ़ गई है। फिलहाल महाराष्ट्र की राजनीति में इस बड़े दलबदल को लेकर चर्चाओं का दौर जारी है। आने वाले दिनों में यदि और नेता या जनप्रतिनिधि पाला बदलते हैं तो राज्य की राजनीतिक तस्वीर में और बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं। यही वजह है कि सभी राजनीतिक दल इस घटनाक्रम पर करीबी नजर बनाए हुए हैं।








