
कर्नाटक विधान परिषद चुनाव 2026 में कांग्रेस ने आठ में से पांच सीटों पर जीत दर्ज कर अपनी राजनीतिक स्थिति और मजबूत कर ली है। चुनाव में कांग्रेस को अपेक्षा से 11 अधिक प्रथम वरीयता वोट मिलने से भाजपा और जेडी(एस) खेमे में क्रॉस वोटिंग की चर्चाएं तेज हो गई हैं। गुप्त मतदान के कारण विपक्षी दलों के लिए बागी वोटों की पहचान करना चुनौती बन गया है।
- कर्नाटक परिषद चुनाव में कांग्रेस ने जीती पांच सीटें, विपक्ष में मचा हड़कंप
- गुप्त मतदान ने बढ़ाई BJP-JD(S) की मुश्किलें, क्रॉस वोटिंग के संकेत
- विधान परिषद चुनाव में कांग्रेस का दबदबा, विपक्षी एकजुटता पर सवाल
- डीके शिवकुमार की रणनीति सफल, परिषद में कांग्रेस की ताकत बढ़ी
बेंगलुरु। कर्नाटक विधान परिषद (एमएलसी) चुनाव 2026 के नतीजों ने राज्य की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। सत्तारूढ़ कांग्रेस ने आठ उम्मीदवारों के मुकाबले सात सीटों के लिए हुए चुनाव में पांच सीटें जीतकर अपनी स्थिति मजबूत कर ली है। वहीं भाजपा और जनता दल (सेक्युलर) गठबंधन को अपेक्षा से कमजोर प्रदर्शन का सामना करना पड़ा है। सबसे अधिक चर्चा उन 11 अतिरिक्त प्रथम वरीयता वोटों की हो रही है, जिन्होंने विपक्षी दलों की आंतरिक एकजुटता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। कांग्रेस को अपने पांच उम्मीदवारों को विजयी बनाने के लिए 140 प्रथम वरीयता वोटों की आवश्यकता थी, लेकिन मतगणना में पार्टी को कुल 151 वोट प्राप्त हुए।
इस अप्रत्याशित बढ़त ने राजनीतिक गलियारों में क्रॉस वोटिंग की अटकलों को तेज कर दिया है। चूंकि मतदान गुप्त मतपत्र के माध्यम से हुआ, इसलिए भाजपा और जेडी(एस) के लिए यह पता लगाना आसान नहीं होगा कि किन विधायकों ने पार्टी लाइन से हटकर मतदान किया। राजनीतिक सूत्रों के अनुसार भाजपा नेतृत्व को संदेह है कि कुछ विधायकों ने कांग्रेस उम्मीदवारों के पक्ष में मतदान किया। वहीं जेडी(एस) के भीतर भी इस बात को लेकर चर्चा है कि पार्टी के कुछ वोट कांग्रेस की ओर खिसके हो सकते हैं। हालांकि जेडी(एस) नेताओं का दावा है कि उनके उम्मीदवार को मिले वोट यह संकेत देते हैं कि पार्टी में बड़े पैमाने पर क्रॉस वोटिंग नहीं हुई।
इस चुनाव में कांग्रेस के उम्मीदवार विनय कार्तिक, टिप्पन्नाप्पा कामाकानूर, बी.एस. शिवन्ना, बी.के. हरिप्रसाद और पी.वी. मोहन विजयी घोषित हुए। भाजपा के रघु कौटिल्य और लिंगराज पाटिल भी निर्वाचित हुए, जबकि जेडी(एस) के गोविंद राजू को अपेक्षित समर्थन नहीं मिल सका। मतगणना के अनुसार विनय कार्तिक को 32, टिप्पन्नाप्पा कामाकानूर को 30, बी.एस. शिवन्ना को 30, बी.के. हरिप्रसाद को 30 और पी.वी. मोहन को 29 वोट प्राप्त हुए। भाजपा उम्मीदवार रघु कौटिल्य को 29 तथा लिंगराज पाटिल को 27 वोट मिले, जबकि गोविंद राजू 14 वोटों पर सिमट गए।
18 जून को आयोजित इस चुनाव में सभी 222 पात्र विधायकों ने मतदान किया और मतदान प्रतिशत 100 रहा। आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली के तहत प्रत्येक उम्मीदवार को जीत के लिए न्यूनतम 28 वोटों की आवश्यकता थी। यह चुनाव उन सात सदस्यों के स्थान पर कराया गया जिनका कार्यकाल 30 जून को समाप्त हो रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस परिणाम से 75 सदस्यीय विधान परिषद में कांग्रेस की स्थिति और मजबूत हुई है।
इससे सरकार को विधायी कार्यों और महत्वपूर्ण विधेयकों को पारित कराने में अधिक सुविधा मिलेगी। साथ ही यह परिणाम राज्य में कांग्रेस नेतृत्व और उपमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार की राजनीतिक रणनीति की सफलता के रूप में भी देखा जा रहा है। चुनाव परिणामों के बाद कांग्रेस खेमे में उत्साह का माहौल है, जबकि भाजपा और जेडी(एस) अब यह आकलन करने में जुटे हैं कि क्रॉस वोटिंग की आशंकाओं के पीछे वास्तविक कारण क्या रहे और भविष्य में ऐसी स्थिति से कैसे निपटा जाए।








