
उत्तराखंड की आयुध फैक्ट्रियों में भारतीय सेना के लिए अत्याधुनिक नाइट विजन कैमरे तैयार किए जा रहे हैं, जो दिन और रात दोनों परिस्थितियों में सटीक निगरानी और लक्ष्य भेदन में मदद करते हैं। स्वदेशी तकनीक से निर्मित ये कैमरे टी-90 भीष्म टैंकों समेत सैन्य हथियारों की क्षमता बढ़ा रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार ये उपकरण सैनिकों को कम समय में दुश्मन की पहचान कर प्रभावी कार्रवाई करने में सक्षम बनाते हैं।
- अंधेरे में दुश्मन पर सटीक नजर, देहरादून में तैयार हो रही हाईटेक तकनीक
- टी-90 टैंकों की ताकत बढ़ा रहे स्वदेशी नाइट विजन सिस्टम
- उत्तराखंड की आयुध फैक्ट्रियों से सेना को मिल रही आधुनिक दृष्टि
- तीन सेकंड में दुश्मन की पहचान, भारतीय सेना को मिल रही नई क्षमता
देहरादून। भारतीय सेना की युद्ध क्षमता को और अधिक मजबूत बनाने के लिए उत्तराखंड की आयुध निर्माण इकाइयों में अत्याधुनिक नाइट विजन कैमरों का निर्माण किया जा रहा है। आधुनिक सैन्य तकनीक से लैस ये कैमरे दिन और रात दोनों परिस्थितियों में सैनिकों को बेहतर दृश्यता उपलब्ध करा रहे हैं। रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार ये उपकरण सेना के लिए किसी ‘तीसरी आंख’ से कम नहीं हैं, क्योंकि इनके माध्यम से सैनिक अंधेरे और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में भी दुश्मन की गतिविधियों पर सटीक नजर रख सकते हैं।
उत्तराखंड में तैयार किए जा रहे ये नाइट विजन कैमरे अंतरराष्ट्रीय मानकों की गुणवत्ता के अनुरूप हैं और वैश्विक बाजार में उपलब्ध समान प्रणालियों की तुलना में कम लागत पर भारतीय सेना को उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इससे न केवल रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिल रहा है, बल्कि विदेशी उपकरणों पर निर्भरता भी कम हो रही है। रक्षा मामलों के जानकारों के अनुसार वर्ष 2001 में रूस से प्राप्त टी-90 टैंकों के भारतीयकरण की प्रक्रिया में भारतीय आयुध क्षेत्र की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। इस दौरान टैंकों को आधुनिक फायर कंट्रोल सिस्टम और उन्नत विजन तकनीक से लैस किया गया। वर्तमान में स्वदेशीकरण के बाद ‘भीष्म’ नाम से पहचाने जाने वाले टी-90 टैंक आधुनिक नाइट विजन और निगरानी प्रणालियों से सुसज्जित हैं।
इन उन्नत कैमरों की सहायता से टैंक के भीतर मौजूद सैनिक बिना बाहर निकले लगभग 10 किलोमीटर तक की दूरी पर गतिविधियों को स्पष्ट रूप से देख सकते हैं। इससे युद्धक्षेत्र में सैनिकों की सुरक्षा बढ़ने के साथ-साथ लक्ष्य भेदन की सटीकता भी कई गुना बढ़ जाती है। आधुनिक विजन सिस्टम चालक और गनर दोनों को बेहतर परिचालन क्षमता प्रदान करता है। विशेषज्ञों का कहना है कि ये कैमरे महत्वपूर्ण सैन्य अभियानों के दौरान सैनिकों को तीन सेकंड से भी कम समय में दुश्मन की पहचान करने और उस पर कार्रवाई शुरू करने में सक्षम बनाते हैं। नाइट विजन तकनीक रात के समय दृश्यता को लगभग 20 हजार गुना तक बढ़ा सकती है, जिससे घने अंधेरे, कोहरे या सीमित रोशनी वाली परिस्थितियों में भी प्रभावी निगरानी संभव हो पाती है।
देहरादून स्थित आयुध निर्माण इकाइयों में विकसित हो रही यह तकनीक केवल भारतीय सेना तक सीमित नहीं है। विभिन्न अर्धसैनिक बल और सुरक्षा एजेंसियां भी इन उत्पादों का उपयोग कर रही हैं। इससे देश की सामरिक क्षमताओं को मजबूती मिलने के साथ-साथ ‘मेक इन इंडिया’ और रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को भी गति मिल रही है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य के युद्धों में निगरानी, लक्ष्य पहचान और त्वरित प्रतिक्रिया सबसे महत्वपूर्ण कारक होंगे। ऐसे में उत्तराखंड में विकसित हो रही नाइट विजन तकनीक भारतीय सुरक्षा बलों को तकनीकी बढ़त दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।






