
उत्तराखंड में शिक्षकों के तबादले अब अनिवार्य नहीं बल्कि अनुरोध के आधार पर किए जाएंगे। हाईकोर्ट के अंतिम फैसले तक सरकार ने नई व्यवस्था लागू करने का निर्णय लिया है। शिक्षकों को स्वास्थ्य, पारिवारिक और सेवा परिस्थितियों के आधार पर राहत दी जाएगी।
- अनिवार्य तबादलों पर ब्रेक, सरकार का नया फैसला
- शिक्षकों को राहत, अब आवेदन के आधार पर ट्रांसफर
- हाईकोर्ट के निर्णय तक बदली नीति लागू
- बीमारी और पारिवारिक कारणों पर मिलेंगे तबादले
देहरादून: उत्तराखंड में शिक्षकों के तबादलों को लेकर सरकार ने बड़ा निर्णय लिया है। अब प्रदेश में अनिवार्य तबादलों के बजाय अनुरोध के आधार पर ट्रांसफर किए जाएंगे। यह व्यवस्था तब तक लागू रहेगी, जब तक इस मामले में उत्तराखंड हाईकोर्ट का अंतिम फैसला नहीं आ जाता।
मुख्य सचिव की अध्यक्षता में आयोजित धारा 27 की बैठक में इस प्रस्ताव पर सहमति बनी, जिसके बाद फाइल अनुमोदन के लिए मुख्यमंत्री के पास भेजी गई है। शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत के अनुसार, हाईकोर्ट ने सुगम और दुर्गम क्षेत्रों के आधार पर अनिवार्य तबादलों पर फिलहाल रोक लगा रखी है। ऐसे में सरकार ने वैकल्पिक व्यवस्था के तहत अनुरोध आधारित तबादलों का निर्णय लिया है।
नई व्यवस्था के तहत शिक्षक अपनी व्यक्तिगत और पारिवारिक परिस्थितियों के आधार पर तबादले के लिए आवेदन कर सकेंगे। इसमें गंभीर बीमारी, पति-पत्नी की एक ही स्थान पर तैनाती, बच्चों की शिक्षा, विधवा या विदुर होने जैसी परिस्थितियों को प्राथमिकता दी जाएगी। इसके अलावा सुगम से दुर्गम, दुर्गम से दुर्गम और 55 वर्ष से अधिक आयु के शिक्षकों को भी इस नीति के तहत राहत मिल सकती है।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि इस संबंध में अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी कर दिए गए हैं और जल्द ही शिक्षकों से आवेदन आमंत्रित किए जाएंगे। शिक्षा विभाग का मानना है कि इस व्यवस्था से शिक्षकों को राहत मिलेगी और प्रशासनिक संतुलन भी बना रहेगा।
विशेषज्ञों के अनुसार, यह निर्णय न केवल शिक्षकों की समस्याओं को कम करेगा, बल्कि शिक्षा व्यवस्था में स्थिरता बनाए रखने में भी सहायक साबित हो सकता है। अब सभी की नजर हाईकोर्ट के अंतिम फैसले पर टिकी है, जिसके बाद ही स्थायी नीति तय की जाएगी।





