
उत्तराखंड में लागू समान नागरिक संहिता अब असम और पश्चिम बंगाल तक राजनीतिक एजेंडे के रूप में पहुंच गई है। भाजपा ने दोनों राज्यों के चुनावी संकल्प पत्र में इसे शामिल कर विस्तार का संकेत दिया है। इससे UCC राष्ट्रीय स्तर पर बहस और नीति का महत्वपूर्ण विषय बनता जा रहा है।
- उत्तराखंड के बाद पूर्वी भारत में UCC की दस्तक
- भाजपा के एजेंडे में UCC, दो राज्यों में चुनावी असर
- असम और बंगाल में UCC पर सियासी हलचल तेज
- उत्तराखंड बना UCC का राष्ट्रीय मॉडल
देहरादून: उत्तराखंड में लागू समान नागरिक संहिता (UCC) अब देश के अन्य हिस्सों में भी तेजी से अपनी उपस्थिति दर्ज करा रही है। राज्य से शुरू हुई यह पहल अब असम और पश्चिम बंगाल तक पहुंच चुकी है, जहां इसे राजनीतिक और चुनावी एजेंडे के रूप में प्रमुखता दी जा रही है।
दरअसल, हालिया विधानसभा चुनावों में भारतीय जनता पार्टी ने अपने संकल्प पत्र में समान नागरिक संहिता लागू करने का वादा किया था। इससे यह स्पष्ट संकेत मिला कि पार्टी इस कानून को राष्ट्रीय स्तर पर विस्तार देने की दिशा में आगे बढ़ रही है।
उत्तराखंड देश का पहला राज्य बना, जिसने स्वतंत्रता के बाद UCC को लागू किया। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में 2022 के विधानसभा चुनाव में किया गया वादा सरकार बनने के बाद पूरा किया गया। इसके बाद से अन्य राज्यों में भी इस कानून को लेकर राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गई हैं।
असम में UCC के साथ-साथ लव जिहाद और लैंड जिहाद जैसे मुद्दों पर सख्त कानून बनाने की बात भी संकल्प पत्र में शामिल की गई है। वहीं पश्चिम बंगाल में भी सत्ता में आने पर इस कानून को लागू करने का वादा किया गया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इन घोषणाओं का मतदाताओं पर व्यापक प्रभाव पड़ा है।
विशेषज्ञों के अनुसार, UCC केवल कानूनी सुधार नहीं, बल्कि सामाजिक और प्रशासनिक एकरूपता की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। उत्तराखंड का मॉडल अब अन्य राज्यों के लिए आधार बनता दिख रहा है, जिससे आने वाले समय में इसे और राज्यों में लागू करने की संभावनाएं बढ़ सकती हैं।
इसके साथ ही, तीन राज्यों में मिली चुनावी सफलता के बाद भाजपा के हौसले बुलंद नजर आ रहे हैं। पार्टी अब 2027 के विधानसभा चुनाव से आगे बढ़कर 2029 के लोकसभा और 2032 के आगामी चुनावों की रणनीति पर भी विचार कर रही है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि UCC जैसे मुद्दे भविष्य में राष्ट्रीय राजनीति की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।





