
आशीष तिवारी निर्मल
अश्कों की इक कहानी लेकर चलता हूँ
दर्द की इक राजधानी लेकर चलता हूँ।
ना तो हवा हूँ और ना ही हूँ आसमान मैं
सीने में आग और पानी लेकर चलता हूँ।
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जिसको जो समझना है वह समझे भले
खुद में कुछ लतें रुहानी लेकर चलता हूँ।
सफलता इसीलिए कदम चूमती है मेरे
बुजुर्गों की मैं निशानी लेकर चलता हूँ।
मेरी संगत में रहने वाला तो महकेगा ही
चम्पा,चमेली और रातरानी लेकर चलता हूँ।
अपनी कोई नही विसात ईश्वर के बगैर
विधाता की मेहरबानी लेकर चलता हूँ।
हँसी-खुशी के हरपल हों या रुदन भरे
दिल में आतिश-बयानी लेकर चलता हूँ॥
¤ प्रकाशन परिचय ¤
![]() | From »आशीष तिवारी निर्मलकवि, लेखक एवं पत्रकारAddress »लालगाँव, रीवा (मध्य प्रदेश) | Mob : 8602929616Publisher »देवभूमि समाचार, देहरादून (उत्तराखण्ड) |
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