
चारधाम यात्रा के दौरान हेली सेवा संचालित करने वाली कंपनियों पर बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति का करीब तीन करोड़ रुपये बकाया हो गया है। विशेष दर्शन की सुविधा देने के बावजूद कंपनियों ने शुल्क का भुगतान नहीं किया। समिति ने 15 दिन के भीतर विधिक नोटिस जारी कर ब्याज समेत वसूली के निर्देश दिए हैं।
- बदरीनाथ-केदारनाथ हेली सेवा पर मंदिर समिति का शिकंजा
- विशेष दर्शन शुल्क नहीं चुकाने पर कंपनियों को नोटिस
- 15 दिन में वसूली के निर्देश, ब्याज समेत रकम मांगी जाएगी
- हेली यात्रियों के लिए बनेगी नई एसओपी
देहरादून। चारधाम यात्रा के दौरान हेलिकॉप्टर और चार्टर्ड सेवाएं संचालित करने वाली एविएशन कंपनियों पर बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) का लगभग तीन करोड़ रुपये बकाया हो गया है। यह राशि उन विशेष दर्शन व्यवस्थाओं के एवज में है, जो हेलिकॉप्टर से आने वाले श्रद्धालुओं को उपलब्ध कराई जाती हैं। चारधाम यात्रा में बड़ी संख्या में श्रद्धालु केदारनाथ धाम और बदरीनाथ धाम तक हेलिकॉप्टर के माध्यम से पहुंचते हैं। ऐसे श्रद्धालुओं को मंदिर समिति की ओर से सुव्यवस्थित और त्वरित विशेष दर्शन कराए जाते हैं।
इसके लिए निर्धारित शुल्क एविएशन कंपनियों से लिया जाता है, जो अपने पैकेज में इस सुविधा को शामिल करती हैं। हालांकि, समिति ने दर्शन की व्यवस्था तो की, लेकिन कई कंपनियों ने शुल्क का भुगतान नहीं किया। समय के साथ यह बकाया बढ़ते-बढ़ते करीब तीन करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। बताया जा रहा है कि कुछ हेली कंपनियां यात्रा सीजन समाप्त होने के बाद राज्य से बाहर जा चुकी हैं। भुगतान न मिलने के कारण मंदिर समिति को आर्थिक नुकसान झेलना पड़ रहा है, जिससे व्यवस्थाओं पर भी असर पड़ सकता है।
15 दिन में विधिक नोटिस के निर्देश
बीकेटीसी अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने मामले का कड़ा संज्ञान लिया है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि 15 दिनों के भीतर सभी संबंधित हेली सेवा कंपनियों को विधिक नोटिस जारी किए जाएं और बकाया राशि की ब्याज समेत वसूली की कार्रवाई की जाए। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भविष्य में इस तरह की स्थिति से बचने के लिए हेली सेवा से आने वाले श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए स्पष्ट एसओपी (स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर) तैयार की जाएगी, ताकि भुगतान प्रक्रिया पारदर्शी और समयबद्ध हो सके।
यात्रा व्यवस्थाओं पर असर की आशंका
चारधाम यात्रा उत्तराखंड की आस्था और अर्थव्यवस्था दोनों के लिए महत्वपूर्ण है। हेली सेवा के जरिए हर वर्ष हजारों श्रद्धालु कम समय में धाम पहुंचते हैं। ऐसे में शुल्क विवाद का लंबा खिंचना यात्रा प्रबंधन के लिए चुनौती बन सकता है। मंदिर समिति अब कानूनी प्रक्रिया के माध्यम से राशि वसूलने की तैयारी में है, ताकि आगामी यात्रा सीजन से पहले वित्तीय स्थिति संतुलित की जा सके।






