
मुंबई डांस पार्टी बयान से चर्चा में आए पूर्व विधायक कुंवर प्रणव सिंह चैंपियन के लंढौरा स्थित आवास पर भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट पहुंचे। दोनों नेताओं ने मुलाकात को पारिवारिक बताया, लेकिन फोटो वायरल होने के बाद सियासी अटकलें तेज हो गईं। इस भेंट को लेकर भाजपा के भीतर भी हलचल देखी जा रही है।
- लंढौरा रंगमहल में हुई भट्ट और चैंपियन की मुलाकात
- सोशल मीडिया पोस्ट से खुली भट्ट-चैंपियन भेंट की जानकारी
- डांस पार्टी बयान के बाद बदले सियासी समीकरण?
- पारिवारिक मुलाकात या राजनीतिक संकेत, चर्चा तेज
देहरादून। उत्तराखंड की राजनीति में एक नई हलचल उस समय तेज हो गई जब भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने चर्चाओं में चल रहे पूर्व विधायक कुंवर प्रणव सिंह चैंपियन के लंढौरा स्थित रंगमहल आवास पर पहुंचकर उनसे मुलाकात की। इस भेंट की जानकारी स्वयं चैंपियन ने सोशल मीडिया पर साझा की, जिसके बाद राजनीतिक गलियारों में कयासों का दौर शुरू हो गया।
डांस पार्टी बयान से बढ़ी थी सियासी गर्मी
कुछ दिन पहले चैंपियन ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में गणेश गोदियाल और हरक सिंह का जिक्र करते हुए मुंबई की एक डांस पार्टी को लेकर टिप्पणी की थी। इस बयान के बाद राजनीतिक माहौल गरमा गया था। गणेश गोदियाल ने पलटवार करते हुए कहा था कि संबंधित कार्यक्रम में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष भी मौजूद थे। इसके बाद यह चर्चा तेज हो गई थी कि पार्टी नेतृत्व चैंपियन के बयान से नाराज है। हालांकि, इन अटकलों के बीच महेंद्र भट्ट का चैंपियन के आवास पहुंचना कई संकेत देता नजर आया। लंढौरा स्थित रंगमहल में हुई इस मुलाकात की तस्वीरों में चैंपियन की पत्नी रानी देवयानी भी मौजूद रहीं।
पारिवारिक मुलाकात या राजनीतिक संदेश?
चैंपियन ने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा कि इस मुलाकात के दौरान संगठनात्मक विषयों और कुछ गंभीर मुद्दों पर चर्चा की गई। वहीं महेंद्र भट्ट ने इस भेंट को पूरी तरह पारिवारिक बताते हुए कहा कि देहरादून में आयोजित प्रशिक्षण वर्ग कार्यक्रम में रानी देवयानी को शामिल होना था, लेकिन अस्वस्थता के कारण वे नहीं पहुंच सकीं। इसी सिलसिले में वे हालचाल जानने पहुंचे थे। प्रदेश अध्यक्ष ने यह भी स्पष्ट किया कि पार्टी के भीतर किसी प्रकार की नाराजगी या मतभेद की बात सही नहीं है।
भाजपा के भीतर बढ़ी चर्चाएं
हालांकि दोनों नेताओं ने इस मुलाकात को सामान्य बताया है, लेकिन राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि हालिया बयानबाजी और आरोप-प्रत्यारोप के बाद यह भेंट कई संदेश दे रही है। भाजपा संगठन के भीतर भी इस मुलाकात को लेकर चर्चाओं का दौर जारी है। राजनीतिक पर्यवेक्षकों के अनुसार, आगामी चुनावी परिदृश्य को देखते हुए पार्टी नेतृत्व किसी भी तरह की आंतरिक असहमति को सार्वजनिक रूप से उभरने नहीं देना चाहता।
ऐसे में यह मुलाकात एक प्रकार से डैमेज कंट्रोल या संबंधों को सामान्य करने की कोशिश के रूप में भी देखी जा रही है। फिलहाल, इस मुलाकात ने उत्तराखंड की राजनीति में नई बहस को जन्म दे दिया है और आने वाले दिनों में इसके दूरगामी राजनीतिक संकेत सामने आ सकते हैं।





